सड़क समाचार पत्रिका (जनता की आवाज) 🌎: INFORMATION

सड़क समाचार पत्रिका(जनता की आवाज़) एक हिंदी समाचार वेबसाइट और मीडिया प्लेटफ़ॉर्म है जो भारतीय राजनीति, सरकारी नीतियों, सामाजिक मुद्दों और समसामयिक मामलों से संबंधित समाचार और जानकारी प्रदान करने पर केंद्रित है। मंच का उद्देश्य आम लोगों की आवाज़ को बढ़ाना और उनकी चिंताओं और विचारों पर ध्यान आकर्षित करना है।

INFORMATION लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
INFORMATION लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

20/12/2025

क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच कसम

दिसंबर 20, 2025 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज 
क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच कसम

बांग्लादेश में प्रगतिशील सांस्कृतिक कर्मियों ,मीडिया और अल्पसंख्यकों पर किए जा रहे दमन की तीव्र निंदा की क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच ने *

एक वक्तव्य में 

बांग्लादेश में प्रगतिशील सांस्कृतिक कर्मियों ,मीडिया और अल्पसंख्यकों पर किए जा रहे दमन की तीव्र निंदा की क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच ने *

एक वक्तव्य में क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच कसम ने कहा कि हम गहरी चिंता के साथ यह देख रहे हैं कि हमारे पड़ोसी देश बांग्लादेश में 1961 से निरंतर सांस्कृतिक गतिविधियाँ संचालित करने वाली प्रतिष्ठित संस्था "छायानट" ,प्रगतिशील सांस्कृतिक दल "उडीची", समाचार पत्र" प्रथम आलो"और " डेली स्टार" पर हाल ही में युनुस प्रशासन के प्रशय से धार्मिक कट्टरपंथियों द्वारा किया गया बर्बर हमला अत्यंत निंदनीय और अभूतपूर्व है।

बांग्लादेश की तरह हमारे देश में भी संघी मनुवादी हिंदुत्ववादी फासीवादी ताकतों के बेलगाम हमलों के ज़रिये अन्य भाषा व संस्कृतियों की उपेक्षा कर जबरिया हिंदी हिन्दू हिन्दुस्तान के विचार को थोपकर,एक देश एक चुनाव,विपक्ष मुक्त भारत , इतिहास और संस्कृति का विकृतिकरण व सांप्रदायीकरण तथा नई शिक्षा नीति के जरिए शिक्षा का निजीकरण व भगवाकरण किया जा रहा है।भगवा फासिस्ट कॉरपोरेट गठबंधन द्वारा हमारी बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक विरासत पर आघात किया जा रहा है। साथ ही साथ अडानी अंबानी सरीखे महाभ्रष्ट कॉरपोरेट घराने और उनकी लठैत फासिस्ट संघ परिवार,केंद्र में और भाजपा शासित राज्यों में दमनकारी नीतियों के माध्यम से जनता को कुचलते हुए सांझी शहादत साझी विरासत वाली हमारी सांस्कृतिक सामाजिक परंपरा को नष्ट करने का प्रयास कर रही हैं।

इसी तरह पड़ोसी देश बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार की तानाशाही के खिलाफ जन आक्रोश का सहारा ले कर मोहम्मद युनुस के नेतृत्व में अमरीकी साम्राज्यवाद के दलाल सांप्रदायिक फासिस्ट ताकतों ने सत्ता पर कब्जा जमाया है। योजनाबद्ध रूप से बांग्लादेश को ,लोकतंत्र,मुक्ति युद्ध की विरासत और धर्मनिरपेक्षता के मूल्यों को खत्म कर कट्टर इस्लामिक देश बनाया जा रहा है।पिछले एक साल से कभी बाउल-फकीरों पर हिंसक हमले, ऑपरेशन डेविल हंट के तहत हजारों प्रगतिशील वामपंथी धर्मनिरपेक्ष कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारियाँ, हत्याएं,पीरों की मजारों को तोड़ना, मंदिरों, बुद्धविहार और गिरजाघरों पर हमले, और अब ‘छायानट’ जैसी प्रसिद्ध संस्था पर आक्रमण हुआ है-जो बाचिक परंपरा, नज़रुल संगीत और रवींद्र संगीत की व्यापक सांस्कृतिक धारा का प्रतिनिधित्व करती है—साम्प्रदायिक कट्टरपंथ की भयावहता को उजागर करता है।
छायानट संस्था 1970–71 से भी पहले से अपनी सांस्कृतिक गतिविधियाँ संचालित करती आ रही है और बांग्लादेश के मुक्ति युद्ध के दौरान इसकी ऐतिहासिक भूमिका रही हपूरी दुनिया में साम्राज्यवाद और उसके सहयोगी, विभिन्न देशों की ठोस परिस्थिति के अनुसार धार्मिक कट्टरपंथ को उभारकर नव फासीवादी जिन्न पैदा कर रहे हैं जो शासक कॉरपोरेट घरानों के एक प्रमुख हथियार के रूप में इस्तेमाल किए जा रहे हैं। एशिया , अफ्रीका और दक्षिण अमरीका सहित विश्व के अनेक क्षेत्रों में लोकतंत्र को वस्तुतः ध्वस्त किया जा रहा है। केवल विपक्षी राजनीतिक दल ही नहीं, बल्कि आम सांस्कृतिक संगठन भी फासीवादी दमन से अछूते नहीं हैं।बांग्लादेश जो कि दक्षिण पूर्व एशिया में साम्प्रदायिक कट्टरपंथी तानाशाही विरोधी "शाहबाग आंदोलन" जैसे वामपंथी प्रगतिशील,लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष आंदोलन और परंपराओं का गढ़ रहा है को साम्राज्यवादी पूंजीवादी ताकतें,भारत की तरह एक फासिस्ट साम्प्रदायिक बांग्लादेश बनाने पर तुली है ।

हम क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच की ओर से बांग्लादेश की जनता के साथ एकजुट होकर फासीवादी और कट्टरपंथी हमलों के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद करते हैं और बांग्लादेश में सांस्कृतिक कर्मियों,मीडिया,अल्पसंख्यकों,प्रगतिशील ताकतों और गरीब मेहनतकश जनता पर किए जा रहे साम्प्रदायिक दमन की कठोर भर्त्सना करते हैं।

तुहिन, असीम गिरि
(अखिल भारतीय संयोजक गण)
क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच RCF

 कसम ने कहा कि हम गहरी चिंता के साथ यह देख रहे हैं कि हमारे पड़ोसी देश बांग्लादेश में 1961 से निरंतर सांस्कृतिक गतिविधियाँ संचालित करने वाली प्रतिष्ठित संस्था "छायानट" ,प्रगतिशील सांस्कृतिक दल "उडीची", समाचार पत्र" प्रथम आलो"और " डेली स्टार" पर हाल ही में युनुस प्रशासन के प्रशय से धार्मिक कट्टरपंथियों द्वारा किया गया बर्बर हमला अत्यंत निंदनीय और अभूतपूर्व है।

बांग्लादेश की तरह हमारे देश में भी संघी मनुवादी हिंदुत्ववादी फासीवादी ताकतों के बेलगाम हमलों के ज़रिये अन्य भाषा व संस्कृतियों की उपेक्षा कर जबरिया हिंदी हिन्दू हिन्दुस्तान के विचार को थोपकर,एक देश एक चुनाव,विपक्ष मुक्त भारत , इतिहास और संस्कृति का विकृतिकरण व सांप्रदायीकरण तथा नई शिक्षा नीति के जरिए शिक्षा का निजीकरण व भगवाकरण किया जा रहा है।भगवा फासिस्ट कॉरपोरेट गठबंधन द्वारा हमारी बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक विरासत पर आघात किया जा रहा है। साथ ही साथ अडानी अंबानी सरीखे महाभ्रष्ट कॉरपोरेट घराने और उनकी लठैत फासिस्ट संघ परिवार,केंद्र में और भाजपा शासित राज्यों में दमनकारी नीतियों के माध्यम से जनता को कुचलते हुए सांझी शहादत साझी विरासत वाली हमारी सांस्कृतिक सामाजिक परंपरा को नष्ट करने का प्रयास कर रही हैं।

इसी तरह पड़ोसी देश बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार की तानाशाही के खिलाफ जन आक्रोश का सहारा ले कर मोहम्मद युनुस के नेतृत्व में अमरीकी साम्राज्यवाद के दलाल सांप्रदायिक फासिस्ट ताकतों ने सत्ता पर कब्जा जमाया है। योजनाबद्ध रूप से बांग्लादेश को ,लोकतंत्र,मुक्ति युद्ध की विरासत और धर्मनिरपेक्षता के मूल्यों को खत्म कर कट्टर इस्लामिक देश बनाया जा रहा है।पिछले एक साल से कभी बाउल-फकीरों पर हिंसक हमले, ऑपरेशन डेविल हंट के तहत हजारों प्रगतिशील वामपंथी धर्मनिरपेक्ष कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारियाँ, हत्याएं,पीरों की मजारों को तोड़ना, मंदिरों, बुद्धविहार और गिरजाघरों पर हमले, और अब ‘छायानट’ जैसी प्रसिद्ध संस्था पर आक्रमण हुआ है-जो बाचिक परंपरा, नज़रुल संगीत और रवींद्र संगीत की व्यापक सांस्कृतिक धारा का प्रतिनिधित्व करती है—साम्प्रदायिक कट्टरपंथ की भयावहता को उजागर करता है।
छायानट संस्था 1970–71 से भी पहले से अपनी सांस्कृतिक गतिविधियाँ संचालित करती आ रही है और बांग्लादेश के मुक्ति युद्ध के दौरान इसकी ऐतिहासिक भूमिका रही हपूरी दुनिया में साम्राज्यवाद और उसके सहयोगी, विभिन्न देशों की ठोस परिस्थिति के अनुसार धार्मिक कट्टरपंथ को उभारकर नव फासीवादी जिन्न पैदा कर रहे हैं जो शासक कॉरपोरेट घरानों के एक प्रमुख हथियार के रूप में इस्तेमाल किए जा रहे हैं। एशिया , अफ्रीका और दक्षिण अमरीका सहित विश्व के अनेक क्षेत्रों में लोकतंत्र को वस्तुतः ध्वस्त किया जा रहा है। केवल विपक्षी राजनीतिक दल ही नहीं, बल्कि आम सांस्कृतिक संगठन भी फासीवादी दमन से अछूते नहीं हैं।बांग्लादेश जो कि दक्षिण पूर्व एशिया में साम्प्रदायिक कट्टरपंथी तानाशाही विरोधी "शाहबाग आंदोलन" जैसे वामपंथी प्रगतिशील,लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष आंदोलन और परंपराओं का गढ़ रहा है को साम्राज्यवादी पूंजीवादी ताकतें,भारत की तरह एक फासिस्ट साम्प्रदायिक बांग्लादेश बनाने पर तुली है ।

हम क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच की ओर से बांग्लादेश की जनता के साथ एकजुट होकर फासीवादी और कट्टरपंथी हमलों के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद करते हैं और बांग्लादेश में सांस्कृतिक कर्मियों,मीडिया,अल्पसंख्यकों,प्रगतिशील ताकतों और गरीब मेहनतकश जनता पर किए जा रहे साम्प्रदायिक दमन की कठोर भर्त्सना करते हैं।

तुहिन, असीम गिरि
(अखिल भारतीय संयोजक गण)
क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच RCF

15/12/2025

आप गुलाम होने वाले है

दिसंबर 15, 2025 0

सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज मोदी मीडिया अब बिहार मे उन जगहो को चून रही है जहाँ भाजपा का बहुल्य है और जगह जगह सो कर के पूरे देश को बताना चाह रही है की जो बिहार मे चुनाव हुआ है वह सब सही है राहुल गान्धी अखलेश तेजस्वी जो कह रहे है वह गलत है
हम देश के लोगों से पूछता हूँ
जब चुनाव आयोग बताता है की 7 42 ०० ०० ० कुल मतदाता है
मतदान हो गया 7 4 5 o 00 0 0 हुआ
अब आप बतायें यह 300000 मतदाता कहा से आगये
अब आप बतायें जब कुल 65% मतदान हुआ है तब 35% कहा चले गये 
अब आप बताएं कुल मतदाता मे से 35%
अर्थात लगभग दो करोड जनता बोट देने नही गयी फीर भी उसका वोट EVM बताता है वोट पड़गया इसके अलावा 3 लाख वोट और बड गये आप बतायें यह कैसे होगया यह कौन सा मोदी मैजिक है -
अब आप सचेत हो नही तो आप गुलाम होने वाले है जादा बोलो गे तो जेल जाऔ गे - अब चूप रहो नही तो मोदी का मैजिक आ जायेगा - नेता डर रहा है नेता मे दम नही है विरोध करने का
क्या होगा देश का - - -
डा राधे श्याम यादव समाज वैज्ञानिक वाराणसी

25/11/2024

राम अवध विवाह के बारे में सोच रहे हैं

नवंबर 25, 2024 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज.         मैरिज लॉन में बिबाह 
राम अवध किसान नेता


ब्याह शादी में बहुत बड़ा चेंज हुआ है। नई नई रस्में बढ़ती जा रहे हैं। 
एक नया फैशन चल पड़ा है जड़ों के दिनों में शादियों का किसी शहर या बाजार में मैरिज लॉन में विवाह करने का। 
कृषि प्रधान गांव रहे हैं। जाड़े के दिनों में खेती-बाड़ी के काम घनी भूत हुआ करते हैं। खेती से ही जीविका है आमदनी है लोगों की। 
इसलिए गांव के लोग गर्मियों के दिन में विवाह करते थे। 
जाड़े के दिन में नहीं करते थे। 
शहर बाजार के व्यापारी सर्दियों के मौसम में विवाह करते थे इसलिए कि उनका धंधा पानी मंदा चलता था खाली रहते थे तो सोचते थे कि शादी वाला काम निपटाने का फुर्सत का वक्त है। वह लोग सही सोच रहे थे। 
अब उनकी नकल बिना अकल का प्रयोग किये गांव के लोग कर रहे हैं। 
कोई तर्क देता है की राम जी का विवाह अगहन में हुआ था। इस पर विचार करना चाहिए कि वह कौन सा जमाना था। क्या राम की खेती बाड़ी करते थे किसान थे। वह तो राजकुमार थे किस नहीं थे। उनकी नकल करना इस विषय पर बेवकूफी के सिवा कुछ भी नहीं है। 
एक पाश्चात्य विचारधारा भी देश के अंदर गहरी पैठ बना चुकी है। शोर शराबा डीजे अश्लील गीत नग्न देह प्रदर्शन। औरतों को तो लगता है कि कपड़ों की महंगाई ने ही नंगा किया है सर्दी की परवाह नहीं है लेकिन पोशाक शरीर को ढकने वाली नहीं है अगर शरीर ढक लिया तो पिछड़ी औरत दिखेगी इसलिए नंगा होना जरूरी है। सर्दी से मर जाना कबूल है लेकिन कपड़ा वह नहीं चाहिए जो शरीर को ढक ले। 
व्यापारियों की नकल में कुछ नौकरी पैसा वाले लोग मैरिज लान में शादी करना शुरू किये। फिर देखा देखी खेती करने वाले लोग भी जाड़े के दिनों में विवाह करना शुरू किये। फिर देखा देखी बढ़ने लगी। 
अभी भी देखने में ऐसा आया है की खास तौर से कायस्थ भूमिहार और क्षत्रिय ब्राह्मण की शादियां मैरिज लान में अधिकतर हो रही है। इनके अलावा दूसरे लोग भी लान में जा रहे हैं लेकिन कमतर।
जाड़े की रात में मोटरसाइकिल से निमंत्रण पर शहर जाना कितना कष्टकारी है कितना खर्चीला है इस पर विचार अवश्य करना चाहिए या फिर जिन्हें लान में करना है उन्हें यह करना चाहिए कि गांव के लोगों को निमंत्रण ही ना दें। 
दिन भर आदमी खेत खलिहान और सिवान में दौड़ा फिर रात में मोटरसाइकिल से ठिठुरते हुए निमंत्रण पर जाये कितना उल्टा लगता है। 
आज भी आप देखिए तो गांव का मजदूर वर्ग या गरीब किसान वर्ग इस तरह का उत्पात वाला काम नहीं करता चाहे ज्यादा में चाहे थोड़ा में ही वह अपने गांव में विवाह करता है। 
यही असली भारत है। यही असली किसान है। जो शहर में जा रहा है वह किसान हो सकता है लेकिन दिमाग से शहरी या व्यापारी या विदेशी सभ्यता को गले लग रहा होता है। 

गांव में शादी नहीं करने के पीछे भी लोग बहुत तर्क देते हैं लेकिन उनके सभी तर्क निराधार होते हैं। 
क्षेत्र और जवार के लोग आपको आपके गांव से आपके परिवार से आपके समाज से जुड़े हुए हैं कई पीढियां से जुड़े हुए हैं किसी मैरिज लान से नहीं जुड़े हैं किसी शहर से नहीं जुड़े हैं किसी बड़े के चमकदार लकदक डेकोरेशन से शहर से नहीं जुड़े हैं। आपकी मिट्टी से आपके घर से आपके बाप दादे से लोग जुड़े हैं किसी शहर से किसी लान से नहीं। 
बंद कीजिए ऐसा उत्पात 
व्यापारियों की नकल में अपने मूल से मत कटिये।
यह विचार गांव को खेती को जवार के परस्पर को संबंध को मिटाने वाला है आत्मघाती है। 
किसी को बुरा लगे तो मैं क्षमा चाहता हूं यह मेरा विचार है आपके विचार भिन्न हो सकते हैं इस पर मुझे कोई शिकवा शिकायत नहीं है। लेकिन मेरे मन में जो खौल रहा था सोचा कि आपसे शेयर करुं।
राम अवध सिंह 
63 065 48 397 
गांव खिलची शहाबगंज चंदौली 
🙏🙏

21/10/2024

एक नजर में बिहार की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर महापुरुषों की दुनिया में है

अक्टूबर 21, 2024 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज.         *🔹True Facts about BIHAR🔹*
_____________________________

*BIHAR* एक इकलौता राज्य जिसके
नाम से हमारे देश का
नाम बनता है .....
B- भारत , bharat 
I - इंडिया , india
H - हिन्दुतान , hindutan
A -आर्यावर्त , aryabrat
R - रिवा , riva , ये इंडिया का बहुत पुराना नाम है

Bihar ka capital ke naam se India ki sabhi misail ka naam hai.
P - Prithvi
A - Agni
T - Trisul
N - Naag
A - Aakash

जो बिहारी बाबू है !
वह इस मैसेज को फैला
दिजिए

कम से कम अपमान करने
वाले को पता चल जाए की
हम किसका अपमान कर रहे है
हम बिहार को झुकने नही देंगे चाहे कोई कितना भी
प्रयास कर ले

जय बिहार जय बिहार

*बिहार* - जिसने देश को पहला राष्ट्रपति दिया !

*बिहार* - जहाँ सबसे पहले महाजनपद बना अर्थात विश्व का पहला लोकतंत्र !

*बिहार* - जहाँ भगवान राम की पत्नी सीता का जन्म हुआ !

*बिहार* - जहाँ महाभारत के दानवीर कर्ण का जन्म हुआ !

*बिहार* - जहाँ भगवान् महावीर का जन्म हुआ, बुद्ध और महावीर को ज्ञान मिला !

*बिहार* - जहाँ सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह जी का जन्म हुआ !

*बिहार* - जहाँ के राजा चन्द्रगुप्त मौर्य से लड़ने की हिम्मत सिकंदर को भी नही हुई !

*बिहार*- जहाँ का लिट्टी चोखा पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय लिट्टी चोखा के नाम से प्रसिद्ध है !

*बिहार* - जहाँ के राजा महान अशोक ने अरब तक हिंदुस्तान का पताका फहराया और उसका स्तम्भ आज देश का राष्ट्रीय चिन्ह है !

*बिहार* - जो गांधी जी का पहला प्रेरणादायक स्रोत बना जिसने आज़ादी की आधारशिला रखी (चंपारण) !

*बिहार* - जहाँ राजा जरासंध, पाणिनि (जिसने संस्कृत व्याकरण लिखा), आर्यभट्ट जिन्होंने शून्य, दशमलव और सूर्य सिद्धांत दिया, चाणक्य (महान अर्थशास्त्री), रहीम, कबीर का जन्म हुआ !

*बिहार* - जहाँ के नंदवंश से लड़ने की हिम्मत सिकंदर की भी नही हुई और बिना लड़े विश्वविजेता डर कर भाग गया !

*बिहार* - जहाँ के 80 साल के बूढ़े ने 1857 के क्रांति में दो बार अंग्रेजों को हराया, अंग्रेजो के दांत खट्टे कर दिए (बाबु वीर कुंवर सिंह) !

*बिहार* - जहाँ के गोनू झा के किस्से पुरे हिंदुस्तान में प्रसिद्ध है !

*बिहार* - जहाँ सम्पूर्ण क्रांति के जनक महान जय प्रकाश नारायण का जन्म हुआ !

*बिहार* - जहाँ जन नायक कर्पूरी ठाकुर जी का जन्म हुआ !

*बिहार* - जहाँ भिखारी ठाकुर (विदेशिया) का जन्म हुआ !

*बिहार* - जहाँ शारदा सिन्हा जैसी महान भोजपुरी गायिका का जन्म हुआ !

*बिहार* - जहाँ स्वामी सहजानंद सरस्वती, राम शरण शर्मा, राज कमल झा, विद्यापति, रामधारी सिंह दिनकर, रामवृक्ष बेनीपुरी, फणीश्वर नाथ रेणु , देवकी नंदन खत्री, इन्द्रदीप सिन्हा, राम करण शर्मा, महामहोपाध्याय पंडित राम अवतार शर्मा, नलिन विलोचन शर्मा, गंगानाथ झा, ताबिश खैर, कलानाथ मिश्र, आचार्य रामलोचन सरन, गोपाल सिंह नेपाली, बिनोद बिहारी वर्मा, आचार्य रामेश्वर झा, राघव शरण शर्मा, नागार्जुन आचार्य जानकी बल्लभ शाश्त्री जैसे महान लेखको का जन्म हुआ !

*बिहार* - जहाँ बिस्स्मिल्लाह खान का जन्म हुआ !

*बिहार* - जहाँ दशरथ मांझी जैसा Mountain Man का जन्म हुआ !

*बिहार* - जहाँ एक साधारण शिक्षक SUPER 30 जैसा निःशुल्क कोचिंग बिना किसी सहायता के चलाकर गरीब बच्चों को IIT में दाखिला दिलाता है !

*बिहार* - जहाँ आज भी दिलो में प्रेम बसता है !

*बिहार* - जहाँ  भी बच्चे अपने माँ - बाप के पैर दबाये बिना नही सोते !

*बिहार* - जहाँ से सबसे ज्यादा बच्चे देश की सबसे कठिन परीक्षा UPSC और IIT पास करते है !

*बिहार* - जहाँ के गाँव में आज भी दादा-दादी अपने बच्चो को कहानियां सुनाते है !

*बिहार* - जहाँ आज भी भूखे रह के अतिथि को खिलाया जाता है !

*बिहार* – जहाँ आज भी सबसे ज्यादा संयुक्त परिवार है !

*बिहार* - जहाँ के बच्चे कोई सुविधा न होते हुए भी देश में सबसे ज्यादा सरकारी नौकरी पाते है !

इसी *बिहार* के रहने वाले हैं ! तो क्यूँ न करे खुद के *बिहारी* होने पर गर्व !

 *बिहार* !!👍🏻👍🏻

13/10/2024

कामरेड साईं बाबा को लाल सलाम

अक्टूबर 13, 2024 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज.         *कॉमरेड* *साईबाबा* *को* *लाल* *सलाम* !
Red star
रोडवे-न्यूज़ पर नवीनतम समाचार और जानकारी के लिए पढ़ें और देखें 


सीपीआई (एमएल) रेड स्टार दिल्ली विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्रोफेसर जीएन साईबाबा को अपनी क्रांतिकारी श्रद्धांजलि अर्पित करता है।जिन्हें फासीवादी क्रूर कानूनों के तहत एक दशक से अधिक समय तक जेल में रखा गया था और कुछ महीने पहले सबूतों की कमी और अभियोजन पक्ष द्वारा उनके खिलाफ आरोप साबित करने में विफलता के कारण उन्हें बरी कर दिया गया था। हम उनके तमाम परिजनों/  इष्ट मित्रों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करते हैं।नवीनतम समाचारों के लिए यहां क्लिक करें

हालांकि प्रोफेसर साईबाबा की मृत्यु का तात्कालिक कारण ऑपरेशन के बाद की जटिलताओं को माना जा सकता है, लेकिन  व्हीलचेयर पर बैठे साईबाबा को कई वर्षों तक जेल में रखकर उनकी अकाल मृत्यु के लिए मौजूदा फासीवादी सरकार ही जिम्मेदार है। कोई भी व्यक्ति, अमानवीय जेल-स्थितियों में शारीरिक रूप से अक्षम  और व्हीलचेयर पर बैठे  एक व्यक्ति को लंबे समय तक जेल में सड़ाने के नतीजे  को समझ सकता है।
अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के अनुसार, वैचारिक स्थिति को बनाए रखना कोई अपराध नहीं है, और कई अवसरों पर न्यायपालिका ने भी इसे बरकरार रखा है।  और यह पूरी तरह जानते हुए भी, माओवादियों से कथित संबंधों के लिए किसी व्यक्ति को जेल में डालना, खासकर तब जब  उस  व्यक्ति के शरीर का अधिकांश हिस्सा  शारीरिक अक्षमता का शिकार  हो और जब उनका स्वास्थ्य तेजी से बिगड़ रहा हो, मानवाधिकारों का सरासर उल्लंघन है। यह असहमति व्यक्त करने के मूल लोकतांत्रिक अधिकार के साथ-साथ स्वतंत्र अभिव्यक्ति के अधिकार के भी खिलाफ है।

कॉमरेड साईबाबा की असामयिक मृत्यु के पीछे फासीवादी वैधता की कड़ी निंदा करते हुए, हम एक बार फिर उन्हें अपनी क्रांतिकारी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

फासीवाद मुर्दाबाद!

पी जे जेम्स
महासचिव
सीपीआई (एमएल) रेड स्टार

नई दिल्ली
13.10.2024

10/10/2024

हरियाणा चुनाव पर एक रिपोर्ट

अक्टूबर 10, 2024 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज.         *हालिया* *चुनाव* *परिणाम* *जनता* *की* *फासीवाद* - *विरोधी* *भावना* *और* *विपक्ष* *द्वारा* *इसका* *उपयोग* *करने* *में* *विफलता* *को* *प्रकट* *करते* *हैं* !अधिक जानकारी के लिए यहां जाएं


जम्मू-कश्मीर चुनाव का परिणाम, धारा 370 को निरस्त करने सहित मोदी सरकार की फासीवादी नीतियों के खिलाफ लोगों का फैसला है, और बहुत ही उत्साहजनक है, खासकर जम्मू-कश्मीर के पूरे इतिहास में इस सबसे महत्वपूर्ण दौर में। हालाँकि, हरियाणा में फासीवादी "डबल इंजन" की हैट्रिक जीत, जो स्वयं फासीवादियों के लिए भी आश्चर्यजनक है, कांग्रेस के भीतर कलह सहित विपक्ष के राजनीतिक दिवालियापन का सीधा परिणाम है। इस बार, अभी भी 1.82% वोटों के साथ, बसपा इनेलो के साथ गठबंधन करके भाजपा विरोधी वोटों को विभाजित करने की अपनी सामान्य भूमिका निभा सकी , और आरएसएस/भाजपा फासीवादी गिरोह के साथ दलित और निचली जाति के वोटों को एकजुट करने में कामयाब रही। . 
साथ ही, इससे भी अधिक खुलासा करने वाली बात "उत्तर-वैचारिक" आम आदमी पार्टी (आप) की भूमिका है जो हरियाणा चुनाव की घोषणा तक इंडिया गठबंधन का हिस्सा थी। हैरानी की बात यह है कि चुनाव की पूर्व संध्या पर जमानत पर रिहा हुए केजरीवाल ने इंडिया अलायंस से अचानक वापसी की घोषणा की और सभी 90 सीटों पर चुनाव लड़ते हुए 1.79 प्रतिशत वोट हासिल किए।। जबकि केजरीवाल को गठबंधन का हिस्सा बनाए रखने में कांग्रेस की विफलता स्पष्ट है, अब समय आ गया है कि कांग्रेस और अन्य भाजपा विरोधी पार्टियों को एक लचीले फासीवादी उपकरण के रूप में आप की भूमिका को स्पष्ट रूप से समझ लेना चाहिए जैसा कि पिछले चुनावों में साबित हुआ है। यद्यपि कांग्रेस अपना वोट-शेयर 11% तक बढ़ा सकी, जबकि आप,बसपा जैसी विभाजनकारी ताकतों की मदद से फासीवादी ताकतें फासीवाद-विरोधी वोटों को प्रभावी ढंग से विभाजित करके अपनी स्थिति मजबूत करने में सफल रहीं।                      

सटीक रूप से कहें तो, जैसा कि चुनाव के रुझान स्पष्ट रूप से संकेत दे रहे हैं, लोग कॉर्पोरेट-फासीवादी ताकतों के खिलाफ उठने के लिए तैयार हैं। लेकिन जैसा कि हरियाणा के नतीजों से पता चलता है, यह स्वयंभू भाजपा विरोधी पार्टियों का राजनीतिक दिवालियापन और संगठनात्मक कमजोरी है जो चुनाव में फासीवादियों की हार में बाधा बन रही है। मेहनतकशों, दलितों, अल्पसंख्यकों और महिलाओं सहित तमाम उत्पीड़ितों के दीर्घकालिक हितों के नजरिए से एक दृढ़ वैचारिक-राजनीतिक अभिविन्यास वाली वास्तविक फासीवाद-विरोधी ताकतों के व्यापक संभव मोर्चे का निर्माण करके ही इस गंभीर स्थिति पर काबू पाया जा सकता है। .

पी जे जेम्स
महासचिव
भाकपा( माले) रेड स्टार 
9 अक्टूबर 2024

30/09/2024

फ़िलिस्तीनी हिटलर जहुआ अराफ़ात

सितंबर 30, 2024 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज.          यह है, यासर अराफत की बेटी, जहुआ अराफत!              यासर अराफात की बेटी

फ़िलिस्तीनी हिटलर जहुआ अराफ़ात 
यासर अराफत को किसी परिचय की आवश्यकता नहीं है!

उन्होंने लाखों फिलिस्तीन युवकों को मौत के दलदल में धकेल दिया 

उन्हें सपने शब्ज बाग  दिखाएं और  मध्य पूर्व को आतंकवाद की आग में झोंक दिया

यह लिखने का कारण यह है कि दुनिया के सभी पिताओं की तरह, उन्हें भी अपनी बेटी की चिंता थी।

और उन्होंने फिलिस्तीन की “सेवा" करते हुए जो धन इकट्ठा किया था, उसमें से कुछ अपनी बेटी के लिए रखा।

ज्यादा नहीं, बस थोड़ा सा…,

आज के बाजार मूल्य पर उसकी कीमत मात्र ₹66,311 करोड़ है!

पाकिस्तान के कुल विदेशी मुद्रा भंडार से कई गुना!

यह कहना गलत नहीं होगा कि यासर खुराफात  की यह बेटी लंदन में एक सड़क की मालकिन है, क्योंकि उस सड़क के दोनों तरफ की ज़्यादातर संपत्तियाँ इसी महिला के नाम पर हैं।

पिछले कई सालों से वह पेरिस के एक बेहद महंगे इलाके में आलीशान हवेली में रह रही है और पिछले 25 सालों में उसने फिलिस्तीन का चेहरा भी नहीं देखा है।

उसे चार भाषाएं आती  है, लेकीन वह अरेबिक नही जानती!

संयुक्त राष्ट्र के निर्देशानुसार उसे शरणार्थी का दर्जा दिया गया है!

यह है जन्नत और जिहाद नामक उद्योग की हकीकत!