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14/02/2026

आज की राजनीति भ्रष्टाचार पर निर्भर है।

फ़रवरी 14, 2026 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज हमारे बॉलीवुड के सितारों की भीड़ दुनिया के सबसे बड़े और सबसे पुराने फासीवादी संगठन RSS के शताब्दी वर्ष समारोह में गर्व से देखे गए।एक ऐसे आतंकवादी संगठन जिसके हाथ महात्मा गांधी सहित बहुतेरे मुसलमानों,ईसाइयों,दलितों /उत्पीड़ितों और कम्युनिस्टों के खून से रंगे हैं।जो संगठन एक अर्ध गुप्त गैर कानूनी अर्ध सैनिक संगठन है जो जन्म से ही ब्रिटिश साम्राज्यवादियों और देशी विदेशी कॉरपोरेट घरानों के तलवे चाटते आ रहा है।अभी अमरीकी साम्राज्यवाद और महाभ्रष्ट कॉरपोरेट घरानों अदाणी अंबानी के तलवे चाटने के लिए भारत की 90 फीसदी आम जनता को तबाह कर रहा है।ये अपने शताब्दी वर्ष में नफ़रत और विभाजन का जहर फैलाकर गर्व से जिस हिंदुराष्ट्र के लिए पागल हो गए हैं, वो क्रूर मनुस्मृति आधारित है।जिसमें दलितों, उत्पीड़ितों, महिलाओं, आदिवासियों,गरीब मेहनतकश जनता और अल्पसंख्यकों को गुलाम का दर्जा दिया गया है।हमारे ज्यादातर बॉलीवुड सितारे लिजलिजे और बिना रीढ़ की हड्डी के हैं।इनकी तुलना में अमरीका के हॉलीवुड के नामचीन सितारों को देखिए ।कैसे फासिस्ट साम्राज्यवादी सरगना डोनाल्ड ट्रंप के मुस्लिम विरोधी,आप्रवासी विरोधी,नस्लवादी,गाज़ा फिलिस्तीन,वेनेजुएला, ग्रीनलैंड पर हमलावर नीति ,जेफ्री एपस्टाइन के साथ मिलकर बच्चियों पर यौन अत्याचार के खिलाफ और गरीब मेहनतकश विरोधी नीतियों के खिलाफ साहस के साथ बड़े बड़े मंचों पर गर्ज रहे हैं ।
-तुहिन
हर जगह बच्चों की जान बचाएं 

09/02/2026

अमेरिका भारत व्यापारिक संधि

फ़रवरी 09, 2026 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज   

अमेरिका भारत व्यापारिक संधि पर ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट का वक्तव्य

अमेरिका और भारत के बीच में जो व्यापारिक संधि हुई है, उसने पूरे देश में एक बड़ा भ्रम पैदा कर दिया है। देश की लोकतांत्रिक ताकतों द्वारा यह कहा जा रहा है कि भारत ने कृषि और डेयरी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र को अमेरिकी कंपनियों के लिए खोल दिया है। अमेरिका से खाद्यान्न और डेयरी उत्पाद बड़े पैमाने पर आयात किए जायेंगे। अमेरिकी कृषि मंत्री के द्वारा भी इस आशय का वक्तव्य दिया गया है। राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा यह कहना कि भारत अब रूस जैसे मित्र देशों से तेल नहीं खरीदेगा भी भारत के लिए नुकसानदेह है। एआईपीएफ की राष्ट्रीय कार्य समिति ने कहा है कि यदि ऐसा हुआ है तो यह भारत के आम नागरिकों, मजदूरों, किसानों हितों के साथ देश की आर्थिक सम्प्रभुता के लिए भी बड़ा संकट पैदा करेगा। एआईपीएफ ने कहा कि इस समझौते में भारतीय समानों पर टैरिफ लगाने की बात आ रही है। यह विश्व व्यापार संगठन द्वारा तय नियमों के विरुद्ध है। इससे भारत के टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल आदि क्षेत्रों के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न होगा।ऐसे में ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट देश के उन सभी राजनीतिक दलों, संगठनों के साथ है जो इस व्यापारिक समझौते को संसद के पटल पर रखने की मांग उठा रहे हैं।

राष्ट्रीय कार्य समिति की तरफ से,

एस. आर. दारापुरी, 
राष्ट्रीय अध्यक्ष 
ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट।

02/02/2026

बजट 2026

फ़रवरी 02, 2026 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज

• लोगों की क्रय शक्ति को कमजोर करता बजट
• देश में मंदी, मंहगाई, आर्थिक संकट और बढ़ेगा 
• एआईपीएफ की केंद्र सरकार के बजट
रुपये की गिरती कीमत 



पर प्रतिक्रिया

लखनऊ, 02/02/2026। 

आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट की राष्ट्रीय कार्य समिति ने कल पेश बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए जारी बयान में कहा कि केंद्र सरकार द्वारा कल संसद में 53 लाख 40 हजार करोड़ का बजट पेश किया गया है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी अनुमान 393 लाख करोड़ है। बजट के संसाधन जुटाने में 16 लाख करोड़ की भारी-भरकम राशि उधार व अन्य देयताएं शामिल है। जिसका नतीजा है कि देश में कर्ज तेजी से बढ़ा है और बजट का एक बड़ा हिस्सा 14 लाख करोड़ ब्याज अदायगी में खर्च हो जाता है। इसी तरह कारपोरेट टैक्स का योगदान 12 लाख करोड़ है जोकि आम तौर पर मध्य वर्ग द्वारा अदा किए जाने वाले इनकम टैक्स 14.6 लाख करोड़ से कम है। पूंजी गत व्यय भी जिसे बढ़ाया गया है वह भी मुख्यतः नेशनल हाईवे व रेलवे कारिडोर जैसे मदों पर है जिसका लाभ कारपोरेट व धनाढ्य वर्ग को होगा। इस पूंजी गत व्यय में शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि क्षेत्र के इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बेहद कम है। स्पष्ट है कि संसाधन जुटाने में आम आदमी पर बोझ डाला गया है जबकि उनके ऊपर खर्च यथावत है जोकि पहले से ही बेहद कम है। 
          बजट शेयर के आधार पर तुलनात्मक अध्ययन से स्पष्ट है कि शिक्षा में 2.54 फीसद से 2.60 फीसद व स्वास्थ्य 1.94 फीसद से 1.95 फीसद मामूली बढ़ोतरी हुई है, जो मुद्रा स्फीति की तुलना में कम ही हुई है। इसके ग्रामीण विकास 5.25 फीसद से 5.10 फीसद, कृषि व संबद्ध कार्यकलाप 3.13 फीसद से 3.04 फीसद, खाद्य सब्सिडी 4.62 फीसद से 4.25 फीसद, उर्वरक सब्सिडी 3.31 फीसद से 3.19 फीसद जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मामूली गिरावट आई है। स्पष्ट है कि सरकार ने सामाजिक सुरक्षा की जवाबदेही से पल्ला झाडा है।
         बहुप्रचारित न्यू इंटर्नशिप प्रोग्राम में 10831 करोड़ आवंटित बजट में महज 526 करोड़ ही खर्च हो सकता पाया, इस मद में बजट घटाकर 4788 करोड़ कर दिया गया। इसी तरह एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में आवंटित 7089 करोड़ में 4900 करोड़, स्किल इंडिया में 2700 करोड़ में महज 200 करोड़ रुपए खर्च किए गए। 
        बजट में सरकारी विभागों में रिक्त पदों को भरने, स्कीम वर्कर्स के लिए सम्मानजनक वेतनमान, सरकारी कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाली जैसी न्यूनतम मांगों को हल करने का जिक्र तक नहीं है। 
       कुल मिलाकर बजट की दिशा कारपोरेट व धनाढ्य वर्ग के हितों के अनुरूप है। जरूरत थी कि कारपोरेट व धनाढ्य वर्ग की संपत्ति पर समुचित टैक्स लगाया जाता जिससे विदेशी कर्ज पर निर्भरता भी घटती और रोजगार सृजन, सामाजिक कल्याण, छोटे मझोले उद्योगों और कृषि जैसे क्षेत्रों में निवेश में बढ़ोतरी होती, जिससे आम नागरिकों की क्रय शक्ति बढ़ती और महंगाई व मंदी से देश उबरता। लेकिन यह न करके सरकार के बजट से लोगों की क्रय शक्ति, सामाजिक सुरक्षा घटेगी और देश गंभीर आर्थिक संकट का सामना करेगा।

राष्ट्रीय कार्य समिति की तरफ से!

एस. आर. दारापुरी 
राष्ट्रीय अध्यक्ष 
ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट। 
9415164845

31/01/2026

धर्मेन्द्र आज़ाद

जनवरी 31, 2026 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज.                                                                                              जहाँ धर्म कमजोर हुआ, वहाँ अपराध भी कम होते गये!      

भारत जैसे देशों में एक पुराना, चिपचिपा झूठ लगातार फैलाया जाता है—कि धर्म और आस्था इंसान को अच्छा बनाते हैं, और नास्तिकता का मतलब है अपराध, अराजकता और नैतिक पतन। लेकिन रुकिए, ज़रा आँकड़ों पर नज़र डालिए, और दुनिया का नक्शा खोलिए—सच्चाई कुछ और ही है!

चलते हैं उन देशों की ओर जहाँ “भगवान” का नाम सुनते ही लोग पूछते हैं—“वो किस डिपार्टमेंट में काम करता है?”
नॉर्वे, स्वीडन, डेनमार्क, जापान, ऑस्ट्रेलिया, चीन, वियतनाम जैसे देशों में 70% से ज्यादा लोग किसी देवता, पैगंबर या परलोक में विश्वास नहीं रखते।
जापान में तो 86% लोग खुद को नास्तिक या अग्नोस्टिक मानते हैं, लेकिन वहीं अपराध इतने कम हैं कि पुलिसवाले अपने काम के बीच Sudoku और कॉफ़ी से वक्त बिताते हैं।
नॉर्वे में 2023 में पूरे साल भर में सिर्फ 40 हत्याएँ हुईं—जो भारत के किसी एक ज़िले में एक हफ्ते में हो सकती हैं!
इन देशों में अपराध क्यों कम हैं? क्योंकि वहाँ शिक्षा, स्वास्थ्य, घर और रोजगार जैसे बुनियादी अधिकार काफ़ी हद तक पहले से मिले हुए हैं, ये वहां लक्ज़री नहीं, अधिकार माने जाते हैं।

अब नज़र डालिए उन देशों की तरफ जहाँ धर्म हर गली, हर सरकारी योजना और हर सोशल मीडिया पोस्ट में गूंजता है—भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश।
यहाँ धर्म का नेटवर्क 5G से भी तेज़ है—मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे, तीर्थयात्रा, भगवा रैलियाँ, हरे झंडे, गेरुए महंत—धर्म हर जगह है, मगर इंसाफ़, सुरक्षा और इंसानियत कहीं नज़र नहीं आती।
राधे श्याम यादव 



इन देशों में बलात्कार, मॉब लिंचिंग, सांप्रदायिक हिंसा, भ्रूण हत्या, भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी और घोटालों का बोलबाला है—और सरकारें इन अपराधों पर धर्म का पर्दा डाल देती हैं।
पाकिस्तान में धर्म के नाम पर हत्या सामान्य बात हो गई है, बांग्लादेश में कट्टरता और लैंगिक हिंसा बढ़ती जा रही है, और भारत में धर्म और राजनीति का गठबंधन एक “पवित्र अपराध तंत्र” बन चुका है।

अब सोचिए—अगर धर्म से ही अपराध रुकते, तो पाकिस्तान अब तक जन्नत होता, भारत में हर गली स्वर्ग बन चुकी होती, और बांग्लादेश में नैतिकता के झरने बह रहे होते!

असल में क्या हो रहा है?
धर्म का इस्तेमाल लोगों को डराने, बाँटने और असली मुद्दों से भटकाने के लिए किया जा रहा है, जबकि जिन देशों में अधिकतर लोग नास्तिक हैं उन्हें, भाग्य, पुनर्जन्म के कर्म, स्वर्ग-जन्नत, गाय-गोबर आदि के नाम से वेवकूफ बनाया जाना मुश्किल होता है। 

पिछड़े देशों में अपराध का असली कारण क्या है?
इसकी जड़ में है वह शोषणकारी तंत्र जो इंसान को इंसान नहीं रहने देता। जहाँ रोटी किस्मत का खेल बन जाए, इलाज अमीरों की चीज़ हो, और शिक्षा केवल मुनाफ़े का धंधा हो—वहाँ अपराध पनपेगा ही। जहाँ मेहनत की कमाई पर कुछ लोग ऐश करते हैं, वहाँ बाकी लोग या तो गुलाम बनते हैं, या अपराधी, या आत्महत्या कर लेते हैं।
इसके अलावा जो सामंती सोच है—जात-पात, मर्दवाद, खानदानी अहंकार और धार्मिक श्रेष्ठता की दुकान—वो इस अपराध-तंत्र को सामाजिक मान्यता भी देती है।

दरअसल, समाज को भगवान नहीं, इंसाफ़ चाहिए।
रोटी, शिक्षा, इलाज और बराबरी चाहिए।
जहाँ ये नहीं मिलेगा, वहाँ अपराध ज़रूर मिलेगा—चाहे जितने भी मंदिर-मस्जिद बना लो या नमाज़ पढ़ लो।
असल लड़ाई भगवान और नास्तिकता की नहीं है।
असल लड़ाई है उस पूंजीवादी ढांचे से जो इंसान की ज़रूरतों को धंधा बना देता है और धर्म को उसका पर्दा।

इसलिए अगर अपराध मिटाना है, तो मंदिर या मस्जिद नहीं—उस व्यवस्था को बदलना होगा जो इंसान को जीने का हक़ ही नहीं देती।

भगवान को मानना या न मानना व्यक्तिगत निर्णय है। 

लेकिन इंसान को इंसान बनाए रखने की उम्मीद जिन सरकारों से की जाती थी वे या तो भ्रष्टाचार में डूबी हुई हैं या फिर समाज को अंधभक्ति में डुबो के अपना अपराधतन्त्र खड़ा कर रहे हैं ।
ऐसे में इन्साफ़पसंद आवाम को एकजुट होकर संघर्ष कर अपने हकों को हासिल करने की ज़रूरत है—तभी एक बेहतर समाज का निर्माण होगा।

—धर्मेन्द्र आज़ाद

12/01/2026

अंधराष्ट्रवाद,इस्लामोफोबिया

जनवरी 12, 2026 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज   

                                                                                        संघी मनुवादी फासीवादी ताकतों के पोस्टर बॉय अजीत डोभाल ने विकसित भारत पर युवाओं को प्रवचन देते हुए कहा कि हमें इतिहास में हुए अपमान का बदला लेना है।बदला लेने से हम ताकतवर बनेंगे।उन्होंने ये भी कहा कि हमारे पूर्वजों ने आजादी की लड़ाई लड़ी थी।बहुत फांसी पर चढ़े।हमने कभी किसी की सभ्यता या मंदिर नहीं तोड़ा,लेकिन हमारे सैकड़ों मंदिर तोड़े गए।हमने कभी अपनी प्रतिरक्षा पर जोर नहीं दिया।

 भगवा गिरोह के इस सितारे को   धुरंधर जैसी संघी एजेंडा वाली  फिल्मों के जरिए सुपरमैन के रूप में पेश किया जा रहा है।अंधराष्ट्रवाद,इस्लामोफोबिया और हिंसक हिंदुत्व का जहर नवीन नौकरशाहों को पिलाने का काम बखूबी ये संघी प्रचारक कर रहा है।लेकिन इस भगवा प्रवक्ता ने यह नहीं बताया कि ब्रिटिश साम्राज्यवादियों के खिलाफ लड़ाई में आर एस एस और हिन्दू महासभा के कितने लोगों को फांसी पर झुलाया गया है।हां,ये जरूर है कि संघ परिवार तो अंग्रेजों की गुलामी को गुलामी नहीं मानता बल्कि मुगलों के खिलाफ संघर्ष को ही आजादी की लड़ाई मानता रहा है।इसीलिए RSS और हिन्दू महासभा ने अपने जन्म के समय से ही  लगातार अंग्रेजों की गुलामी की थीऔर देश से गद्दारी की थी। अजीत डोभाल ने यह भी नहीं बताया कि सल्तनत काल में और मुगल काल में  सुलतानों और बादशाहों के दरबार में कई राजपूत राजाओं के लिए अपने राज्य की प्रतिरक्षा के मुद्दे से ज्यादा दिल्ली दरबार में अपनी हाजरी लगाकर अपनी धन संपदा में वृद्धि करना ज्यादा जरूरी था।
दूसरी बात ये है कि संघी फासिस्ट ,भारत के इतिहास और संस्कृति को विकृत व साम्प्रदायिक बनाने में जुटे हैं इसीलिए वो सत्य को छुपाते हैं।सत्य यह है कि  महमूद गजनवी के अलावा भारत के गैर मुस्लिम राजा महाराजाओं में से कई ने (जैसे कि कश्मीर के राजा ने ) मंदिर तोड़क अधिकारी और मंत्री नियुक्त किए थे। जो अपने राजा के निर्देश पर प्रतिद्वंद्वी राजाओं के कुलदेवता के मंदिर पर  आक्रमण कर उसको ध्वस्त करते और मंदिर की धन संपदा को लूट लेते।और ऐसा करने के जरिए दुश्मन राजा के सम्मान और गरिमा को चोट पहुंचाते।अब बात समझ में आती है कि कैसे अधिकांश IAS/ IPS   कैडर ( गैर भाजपा शासित राज्यों में भी) का भगवाकरण मुकम्मल हो रहा है।जो शपथ संविधान को रक्षा करने की लेते हैं,लेकिन जी जान से लागू करते हैं भागवत- मोदी- शाह के संघी मनुवादी फासीवादी एजेंडे को।

07/01/2026

अखिलेंद्र

जनवरी 07, 2026 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज*दृष्टिकोण* 
Ajay roy


*हाल में योगेंद्र यादव का जेएनयू में दिया राजनीतिक सिद्धांत पर व्याख्यान, उनके व्यापक बौद्धिक रुझान को प्रतिबिंबित करता है।* वे भारत बचाओ आंदोलन से जुड़े हैं और स्वराज इंडिया के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं। 
उनका तर्क है कि राजनीतिक सिद्धांत को केवल बौद्धिक दायरे तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे राजनीतिक कार्रवाई की तरफ ले जाना चाहिए। उनकी बौद्धिक गहराई भारतीय राजनीतिक चिंतन के संदर्भात्मक अध्ययन में निहित है, जहाँ वे सिद्धांत को समाज और राजनीति से जोड़ते हैं। अपने वक्तव्य में उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि राजनीतिक सिद्धांत को पश्चिम से उधार लिए गए ढाँचों के बजाय भारत के जीवंत लोकतांत्रिक अनुभवों में निहित होना चाहिए। उन्होंने राजनीतिक कल्पनाशीलता के क्षरण, लोकतांत्रिक मानकों के कमजोर होने और सिद्धांत व राजनीतिक व्यवहार के बीच बढ़ती दूरी की सही पहचान की। उनका भाषण लोकतंत्र में व्याप्त नैतिक और संस्थागत पतन की ओर आकर्षित करता है।
हालाँकि, उनके पूरे वक्तव्य में मुझे कहीं भी राजनीतिक अर्थव्यवस्था का संदर्भ नहीं मिला। जबकि समकालीन भारत को समझने के लिए कोई भी पर्याप्त राजनीतिक सिद्धांत राजनीतिक अर्थनीति को अपने केंद्र में रखे बिना अधूरा है। भारत में लोकतंत्र केवल नैतिक गिरावट का शिकार नहीं हो रहा है, बल्कि *इसे संरचनात्मक रूप से कॉरपोरेट–हिंदुत्व गठजोड़ द्वारा पुनर्गठित किया जा रहा है।* जो राज्य स्वायत्त होना चाहिए था, वह स्वयं इस गठजोड़ का हिस्सा बनता जा रहा है।
भारतीय राजनीतिक चिंतन कभी भी केवल नैतिक या संवैधानिक नहीं रहा है। यह उपनिवेशवाद, सामंतवाद, जाति उत्पीड़न और साम्राज्यवादी वर्चस्व के खिलाफ संघर्षों के बीच गढ़ा गया है। आंबेडकर ने संविधान को संघर्ष के औज़ार के रूप में देखा। गांधी की राजनीतिक नैतिकता, उपनिवेश-विरोधी संघर्ष से जुड़ी थी। मार्क्सवादी परंपरा ने लोकतंत्र को संघर्ष का मैदान माना। *भारतीय राजनीतिक सिद्धांत हमेशा टकरावपूर्ण, जोखिम उठाने वाला और वर्चस्व-विरोधी रहा है।*
ऐसे समय में जब भारतीय राज्य खुलकर हिंदुत्व और पूंजी के हितों की सेवा कर रही है, भारतीय राजनीतिक सिद्धांत का अर्थ केवल शब्दावली में बदलाव नहीं हो सकता। उसे जन लोकतंत्र और समावेशी राष्ट्रवाद के लिए एक व्यापक जन-लोकतांत्रिक योजना से जुड़ना होगा।

अखिलेंद्र प्रताप सिंह
संस्थापक सदस्य, एआईपीएफ

दिनांक : 6 जनवरी, 2026

24/12/2025

सकारात्मक और नकारात्मक सोच(Radhey shyam yadav)

दिसंबर 24, 2025 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज 
mr. radhey shyam yadav(bhagat singh vichar manch)
सकारात्मक और नकारात्मक सोच सही दिशा और विपरीत दिशा के तरफ हमें चलने के लिए प्रेरित करता है। अब हमारे विवेक के ऊपर निर्भर करता है कि हम किसे अपनाते हैं क्या सोचती हैं। देवी देवताओं के हाथ में हथियार को बुराइयों को नष्ट करने की दृष्टिकोण से भी देख सकते हैं। बुराइयों से सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी हम देख सकते हैं। इसे किस दृष्टिकोण से हम देखते हैं वह अपने नजरों एवं सोच के ऊपर निर्भर करता है। दूसरी बात, इतिहास बातें और विज्ञान हमारे विचार और एक खोज है कोई जरूरी नहीं कि वह हर समय में हर व्यक्ति के लिए उपयोगी ही साबित हो इसका विपरीत प्रभाव भी पड़ता है कारण की हमें अपनी क्षमता का सकारात्मक विस्तार देते हुए काल समय और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उसे पर अमल करना चाहिए कोई जरूरी नहीं उपरोक्त प्रयोग को हम अपने जीवन में पूरी तरह से उतार दें, क्योंकि वह उसे समय की बौद्धिक क्षमता वैज्ञानिक क्षमता के आधार पर काल, समय, परिस्थितियों के अनुरूप लिया गया निर्णय है तीसरी बात, हम किसी बौद्धिक क्षमता से ओत-प्रोत   व्यक्ति हो या राजनेता हो मानवीय मूल्यों के संरक्षण संविधान और कानून की उपयोगिता धर्म के प्रति आदर्श को लेकर बात करते हुए अपने विचार रखते हुए मैंने नहीं सुना ना तो समाज के अंदर सुनाई देता है जिसका दुष्परिणाम है कि हमारे देश की आबादी के लगभग  98% लोग अपनी नागरिकता के अधिकार और कर्तव्य से ही विमुख है। संविधान और कानून के विषय में अनभिज्ञ है। सामाजिक और राजनीतिक चिंतन की विषय में अनभिज्ञ है इसके लिए जिम्मेदार कहीं ना कहीं से हम आप हैं क्योंकि हम मात्रा चर्चा करते हैं  जाति और धर्म की क्षेत्रवाद, भाषा की अनियंत्रित महंगाई, भ्रष्टाचार, अन्याय अत्याचार, संविधान और कानून का दुरुपयोग अधिकारों का दुरुपयोग यह हमारा चर्चा का विषय नहीं होता आए हम इस विषय पर गंभीर चर्चा करें और राष्ट्रीय समाजवादी जन क्रांति पार्टी के प्रबल इस विचारधारा को आत्मसात करते हुए हम आगे बढ़ते हैं और एक मजबूत नागरिक के रूप में अपने को स्थापित करते हुए व्यक्ति समाज और देश का नव निर्माण करते हैं। हम हैं समता मूलक समाज के सजग प्रहरी गलत को गलत और सही को सही आधार पर मानवीय मूल्यों का संरक्षण करना हमारा नैतिक कर्तव्य है।

15/12/2025

इंडियन बाबा की प्रॉपर्टी (पुराना रिकॉर्ड)

दिसंबर 15, 2025 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज 
                                                                     पुराने अख़बार की कटिंग से                                                                 वर्तमान समय में बाबा की संपत्ति कानूनी संपत्ति से अधिक है।

प्रोफेसर हृषिकेश भट्टाचार्य द्वारा रचित 'नित्य निठुर द्वन्द्व

दिसंबर 15, 2025 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज         
प्रोफेसर हृषिकेश भट्टाचार्य 

                                                              प्रोफेसर हृषिकेश भट्टाचार्य द्वारा रचित 'नित्य निठुर द्वन्द्व' (भाग-1)'युगसंचार' के पृष्ठ- 66 से यहां उद्धृत —

परन्तु क्या आपके पुत्रों में से कोई सहमत होगा?'

'क्यों नहीं मानेंगे गुरुदेव? कोई पुत्र अपने पिता के प्राण बचाने के लिए आगे क्यों नहीं आएगा?' ययाति यह जानकर प्रसन्न हुए कि बचने का उपाय है।

'परन्तु याद रखना ययाति,' शुक्राचार्य ने कहा, 'जो रक्तदान करता है, वह धीरे-धीरे दुर्बल होता जाएगा। यदि वह रक्तदान करना बंद भी कर दे, तो भी उसे स्वस्थ होने में कम से कम छह महीने लगेंगे। यह जानकर, यदि आपका कोई पुत्र आपको अपनी युवावस्था देना चाहे, तो वह सर्वत्र महान माना जाएगा। मेरे आशीर्वाद से वह राजा और महाराणा बनेगा।'
ययाति का हृदय हर्ष और कृतज्ञता से भर गया। शाप के बदले उसे वरदान मिला। शुक्राचार्य ने उसे अवश्य क्षमा कर दिया होगा। शुक्राचार्य ने खड़े होकर उसे आशीर्वाद देते हुए कहा, 'यदि तुम्हारा कोई पुत्र सहमत हो, तो राजवैद्य को मेरे पास भेजो। मैं उसे रक्त-त्याग और आधान की विधि सिखा दूँगा। फिर भी, तुम्हें बहुत सावधान रहना होगा, यदि किसी पुत्र का रक्त लेते समय तुम्हें कोई शारीरिक कष्ट हो, तो उसे तुरंत बंद कर देना। तुम्हें यह समझ लेना चाहिए कि तुम्हारे रक्त का उस पुत्र के रक्त से कोई संबंध नहीं है।'
ययाति शुक्र की प्रत्येक बात को ध्यान से समझते हुए वहाँ से चले गए। वह देवयानी को अपने साथ ले जाना चाहते थे। परन्तु वह उन्हें कहीं नहीं मिली। जब वे आश्रम के बाहर आए, तो उन्हें देवयानी का रथ भी दिखाई नहीं दिया। उन्होंने समझ लिया कि देवयानी पहले ही जा चुकी है। ययाति का मन अब लगभग मृत्यु के द्वार से लौटकर काफी प्रसन्न था। वह पुरानी बातें भूलकर देवयानी को क्षमा कर देना चाहते थे, परन्तु ऐसा नहीं हुआ। थोड़े आहत मन से ययाति रथ पर सवार हो गए। उन्होंने समझ लिया कि देवयानी को पुराने घावों को भरने में कोई रुचि नहीं है।
महल पहुँचकर ययाति ने यदु और तुर्वसु को अपने महल में बुलाया। थोड़ी देर बाद वे दोनों ययाति के कक्ष में आए, उनके पीछे देवयानी भी आई। देवयानी को देखकर ययाति को आश्चर्य हुआ। देवयानी यहाँ कभी नहीं आती, और उन्होंने उसे पुकारा भी नहीं। पुत्रों ने प्रणाम किया और खड़े हो गए। देवयानी आगे नहीं आई, बल्कि दूर खड़ी रही। ययाति ने उसकी ओर देखा। देवयानी के चेहरे, आँखों और मुद्रा में कैसी कठोरता प्रकट हो रही थी। ऐसा लग रहा था कि युद्ध अवश्यंभावी है। देवयानी ने अपने पुत्रों को सब कुछ बता दिया होगा। क्या शुक्राचार्य की आशंकाएँ सत्य होंगी? उनका मन दुःख से भर गया और फिर आशा से वे पुनः डगमगा उठे। नहीं, ऐसा नहीं हो सकता। यदु और तुर्वसु उनकी अपनी आत्माएँ हैं, वे अपने मरते हुए पिता के अनुरोध को अवश्य ही टाल नहीं सकेंगे। आशा और भय के बीच खड़े होकर उन्होंने दोनों पुत्रों को पास बुलाया।

'मुझे लगता है कि तुमने अपनी माँ से सब कुछ सुन लिया है। मृत्यु मेरे सिर पर आ खड़ी हुई है। अब तुम ही हो जो इसे रोक सकते हो। मैं तुमसे कुछ समय की भीख माँग रहा हूँ। प्रकृति के स्वाभाविक क्रम में एक दिन मेरी मृत्यु अवश्य होगी।' लेकिन मैं अकाल मृत्यु नहीं चाहता, मुझे अभी बहुत काम करना है। अगर मैं अपनी पूजा-अर्चना नहीं कर पाया, तो मृत्यु के बाद भी मुझे शांति नहीं मिलेगी।
(नियमित रूप से पढ़ते रहें)

03/08/2025

अगस्त 03, 2025 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यू**

ब्रह्मण व ब्रह्मणबाद के पांच खुंटे पुरखो ने तो हिला दिया है और बहुजन उखाड़ने में लगे हैं*
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आप लोग भी पढ़िए क्या हैं हिंदू धर्म के 5 खूंटे जिनसे ब्राह्मणों ने सभी sc, st & obc को बांध रखा है

*(1) पहला खूॅटा:- ब्राह्मण:-*
हिन्दू धर्म में ब्राह्मण जन्मजात श्रेष्ठ है चाहे चरित्र से वह कितना भी खराब क्यों न हो, हिन्दू धर्म में उसके बिना कोई भी मांगलिक कार्य हो ही नहीं सकता। किसी का विवाह करना हो तो दिन या तारीख बताएगा ब्राह्मण, किसी को नया घर बनाना हो तो भूमिपूजन करायेगा ब्राह्मण, किसी के घर बच्चा पैदा हो तो नाम- राशि बतायेगा ब्राह्मण, किसी की मृत्यु हो जाय तो क्रियाकर्म करायेगा ब्राह्मण, भोज खायेगा ब्राह्मण, बिना ब्राह्मण से पूछे हिन्दू हिलने की स्थिति में नहीं है। इतनी कड़ी मानसिक गुलामी में जी रहे हिन्दू से विवेक की कोई बात करने पर वह सुनने को भी तैयार नहीं होता।
OBC/SC/ST के आरक्षण का विरोध करता है ब्राह्मण, OBC/SC/ST की शिक्षा, रोजगार, सम्मान का विरोध करता है ब्राह्मण!! इतना होने के बावजूद भी वह OBC/SC/ST का प्रिय और अनिवार्य बना हुआ है। क्यों? घोर आश्चर्य!! या ये कहें कि दुनिया का आठवां अजूबा!! जो हिन्दू ब्राह्मण रूपी खूॅटा से बॅधा हुआ है।

*(2) दूसरा खूॅटा: ब्राह्मण शास्त्र:-*
यह जहरीले साॅप की तरह हिन्दू समाज के लिए जानलेवा है। मनुस्मृति जहरीली पुस्तक है। वेद, पुराण, रामायण आदि में भेद-भाव, ऊॅच-नीच, छूत-अछूत का वर्णन किया गया है। मनुष्य का जन्म:-
ब्रह्मा के मुख से ब्राह्मण, भुजा से क्षत्रिय, जंघा से वैश्य, पैर से शूद्र की उत्पत्ति बताकर शोषण-दमन की व्यवस्था शास्त्रों में की गयी है, हिन्दू-शास्त्रों मे स्त्री को गिरवी रखा जा सकता है, बेचा जा सकता है, उधार भी दिया जा सकता है। हिन्दू समाज इन शास्त्रों से संचालित होता रहा है।

*(3) तीसरा खूॅटा: हिन्दू धर्म के पर्व/त्योहार:-*
हिन्दू धर्म के पर्व/त्योंहार आर्यों द्वारा इस देश के SC/ST/OBC (मूलनिवासियों) की गयी निर्मम हत्या पर मनाया गया जश्न है। आर्यों ने जब भी और जहाॅ भी मूलनिवासियों पर विजय हासिल की, विजय की खुशी में यज्ञ किया, यही पर्व कहा गया, पर्व ब्राह्मणों की विजय और त्योहार मूलनिवासियों के हार की पहचान है। त्योहार का मतलब होता है, तुम्हारी हार यानी मूलनिवासियों की हार।
इस देश के मूलवासी अनभिज्ञता की वजह से पर्व-त्योहार मनाते हैं। न तो किसी को अपने इतिहास का ज्ञान है और न ही अपमान का बोध। सबके सब ब्राह्मणवाद के खूॅटे से बॅधे हैं। अपना मान-सम्मान और इतिहास सब कुछ खो दिया है। अपने ही अपमान और विनाश का उत्सव मनाते हैं और शत्रुओं को सम्मान और धन देते हैं। यह चिन्तन का विषय है।
होली- होलिका की हत्या और बलात्कार का त्योहार दशहरा- दीपावली- रावण वध का त्योहार।
नवरात्र- महिषासुर वध का त्योहार।
किसी धर्म में त्योहार पर शराब पीना और जुआ खेलना वर्जित है। पर हिन्दू धर्म में होली में शराब और दीपावली पर जुआ खेलना धर्म है। हिन्दू समाज इस खूॅटे से पुरी तरह बॅधा हुआ है।

*(4) चौथा खूॅटा- देवी देवता:-*
हिन्दू धर्म में तैंतीस करोड़ देवी-देवता बताये गये हैं। पाप-पुण्य, जन्म-मरण, स्वर्ग-नरक, पुनर्जन्म, अगले जन्म का भय बताकर काल्पनिक देवी-देवताओं की पूजा-आराधना का विधान किया गया है। मन्दिर-मूर्ति, पूजा, दान-दक्षिणा देना अनिवार्य बताया गया है। हिन्दू समाज इस खूॅटे से बॅधा हुआ है और चमत्कार, पाखण्ड, अंधविश्वास, अंधश्रद्धा से जकड़ा हुआ है।

*(5) पाॅचवां खूॅटा : तीर्थस्थान:-*

ब्राह्मणों ने देश के चारों ओर तीर्थस्थान के हजारों खूॅटे गाड़ रखे हैं। इन तीर्थस्थानों के खूॅटे से टकराकर मरना पुण्य और स्वर्ग प्राप्ति का सोपान बताया गया है। इस धारणा पर भरोसा कर सभी ब्राह्मणों के मानसिक गुलाम OBC/SC/ST के लोग बिना बुलाये तीर्थस्थानों पर पहुँच जाते है जहाँ इनका तीर्थ स्थलों के मालिक (ब्राह्मण) आस्था की आड़ में हर प्रकार का शोषण करते हैं।

    *समाधान*:- ब्राह्मणवाद के इन खूॅटो को उखाड़ने के लिए समस्त शूद्र(OBC/SC/ST) की जातियों को एकजुट होकर चिन्तन-मनन और विचार-विमर्श करना होगा। किसी भी मांगलिक कार्य में ब्राह्मण को न बुलाने से, ब्राह्मण शास्त्रों को न पढ़ने से, न मानने से, हिन्दू (ब्राह्मण) त्योहारों को न मनाने से, काल्पनिक हिन्दू देवी-देवताओं को न मानने, न पूजने से, तीर्थस्थानों में न जाने, दान-दक्षिणा न देने से ब्राह्मणवाद के सभी खूॅटे उखड़ सकते हैं।

ब्राह्मणवाद से समाज मुक्त हो सकता है और मानववाद विकसित हो सकता है। इस पर OBC/SC/ST समाज की सभी जातियों को चिन्तन-मनन करने की आवश्यकता है। तो आइए विदेशी आर्य ब्राह्मणों को दान, मान और मतदान न देकर ब्राह्मणवाद से मुक्ति और मानववाद को विकसित करने का सकल्प लें।

*एक बार अपने दिमाग से, शांत बैठकर जरूर सोचें। पोस्ट पसंद आये तो ज्यादा से ज्यादा शेयर जरूर करें।* 

*मानववादी साहित्य एवं सत्यम पुस्तक केन्द्र के विक्रेता स्वर्गीय नारदमुनि लोहार जी गया बिहार आप सभी को*. Radheyshyam azad from varanasi 

 

31/12/2024

भारत में तालिबानी शासन की शुरुआत

दिसंबर 31, 2024 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज **हिंदूवादी संगठनों की शिकायत पर प्रभारी प्रधानाचार्य का निलंबन’* ।

 *तालिबानी शासन का आगाज...* 

हिंदू फासीवादियों द्वारा उत्तराखंड को हिंदुत्व की नई प्रयोगशाला बनाने के कुत्सित प्रयास लगातार जारी हैं। ताजा घटना नैनीताल जिले के रामनगर की है जहां एक राजकीय इंटर कालेज के प्रभारी प्रधानाचार्य तिलक जोशी को हिंदूवादी संगठनों के इस आरोप पर निलंबित कर दिया गया कि उन्होंने मुस्लिम छात्रों को जुमे की नमाज हेतु आधे दिन का अवकाश दिया था। जबकि प्रभारी प्रधानाचार्य एवं कालेज के अन्य शिक्षकों ने हिंदूवादी संगठनों के इस आरोप को सिरे से खारिज किया है, उलटे उन्होंने उप जिलाधिकारी को शिकायत देकर हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं पर कालेज में आकर उत्पात मचाने और शिक्षकों के साथ अभद्रता करने पर उनकी गिरफ्तारी की मांग की है।

रामनगर का पी एम श्री राजकीय इंटर कालेज मुस्लिम बहुल खताड़ी क्षेत्र में स्थित है और इसमें एक बड़ी संख्या मुस्लिम छात्रों की है। यहां कुछ मुस्लिम छात्र जुमे की नमाज के वक्त स्वतः ही अपनी कक्षा छोड़कर अथवा आधे दिन का अवकाश कर नमाज पढ़ने चले जाते हैं। बस, इसी बात को हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने मुद्दा बनाकर कालेज में उत्पात मचाया, शिक्षकों से अभद्रता की और प्रभारी प्रधानाचार्य पर यह झूठा आरोप मढ़ दिया कि उन्होंने 20 दिसम्बर को मुस्लिम छात्रों को जुमे की नमाज हेतु आधे दिन का अवकाश दिया था।

और हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं की शिकायत को अपने लिये आदेश मानते हुये उच्च अधिकारियों द्वारा प्रभारी प्रधानाचार्य को बिना किसी जांच पड़ताल के तुरंत निलंबित भी कर दिया गया। जबकि प्रभारी प्रधानाचार्य और अन्य शिक्षकों की शिकायत पर हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं पर अभी तक भी कोई कार्यवाही नहीं हुई है।

अधिकारियों का यह व्यवहार दिखा रहा है कि वे किसके निर्देश पर काम कर रहे हैं? एक समुदाय विशेष के विरुद्ध प्रशासनिक मशीनरी का यह इस्तेमाल पूरे देश की तरह उत्तराखंड में भी खुलकर हो रहा है। हिंदू फासीवादी ताकतें, जिनका असल में हिंदू धर्म से कोई सरोकार नहीं है, इस पहाड़ी राज्य की फिजाओं में जहर घोल रही हैं।

इस पूरे घटनाक्रम पर विभिन्न शिक्षक संगठनों ने तत्काल ही उप जिलाधिकारी कार्यालय पर जुलूस प्रदर्शन कर प्रभारी प्रधानाचार्य के निलंबन और हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं का प्रतिरोध कर जिस एकता का प्रदर्शन किया उसे अधिकाधिक व्यापक और मजबूत बनाकर ही हिंदू फासीवादी ताकतों के घृणित मंसूबों को धराशाई किया जा सकता है।

13/12/2024

दिसंबर 13, 2024 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज.   नेपाल की क्रांतिकारी कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय एकता महाधिवेशन को सीपीआई (एमएल) रेड स्टार की ओर से शुभकामनाएं
सीपीआई एमएल लाल सितारा 



साथियों,

कॉमरेड तुहिन और मेरी ओर से व्यक्तिगत रूप से, और हमारी पार्टी सीपीआई (एम-एल) रेड स्टार की ओर से, हम रिवोल्यूशनरी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (आरसीपीएन) की यूनिटी कांग्रेस की सफलता की कामना करते हैं। इस ऐतिहासिक कांग्रेस में हमें आमंत्रित करने के लिए हम आपके आभारी हैं।

कॉमरेड, आज आपका महाधिवेशन( कांग्रेस) ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया पर फासीवाद और युद्ध का खतरा मंडरा रहा है। अमेरिकी राजनीति का फासीवादी चेहरा डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी खोई ताकत हासिल कर ली है और दूसरी बार सत्ता में वापसी की है. यह घटना साबित करती है कि पूरी दुनिया में फासीवाद के लिए उपजाऊ जमीन है। जब तक साम्राज्यवादी और पूंजीवादी अर्थव्यवस्था का भीषण संकट बना रहेगा और इसका समाधान नहीं ढूंढा जायेगा, तब तक फासीवाद का ख़तरा बना रहेगा। डोनाल्ड ट्रंप की जीत ने दिखा दिया है कि फासीवाद को सिर्फ सत्ता से हटाकर नहीं रोका जा सकता. यदि फासीवादी राजनीति, अर्थशास्त्र, सामाजिक नीति और दर्शन का कोई वैकल्पिक आख्यान नहीं बनाया जा सकता, यदि फासीवाद की जन्मस्थली पूंजीवाद के संकट का वास्तविक समाधान प्रस्तुत नहीं किया जा सकता, तो फासीवादी ताकत को सिर्फ चुनाव में हराकर फासीवाद-विरोधी जीत हासिल नहीं की जा सकती। पराजित फासीवाद बिना किसी वैकल्पिक सामाजिक-आर्थिक मार्ग और वैकल्पिक राजनीतिक कार्यक्रम के, उदारवादियों से खोई हुई शक्ति को दोगुनी ताकत और जोश के साथ वापस पाने में सक्षम है। आप देखेंगे कि पिछली शताब्दी के चालीसवें दशक में, एक ओर, उदार पूंजीपति वर्ग फासीवाद के विरुद्ध कींसवादी विकल्प प्रस्तुत करने में सक्षम था, जिसके बल पर वह अगले तीन दशक तक "पूंजीवाद के स्वर्ण युग" का निर्माण करने में सक्षम था। दूसरी ओर, कम्युनिस्टों के पास सोवियत विकल्प था। ऐसा विकल्प कि तीस के दशक की महामंदी में विश्व पूंजीवाद को नष्ट करने वाला संकट भी उसे खरोंच नहीं सका। आज पूंजीपति वर्ग के पास कोई विकल्प नहीं है। कम्युनिस्टों के पास एक भी नहीं है. हालाँकि समाजवाद के प्रथम विश्व अभियान को प्रारंभिक सफलता तो मिली, लेकिन वर्तमान में यह पूरे विश्व में संकट का सामना कर रहा है। विकल्पों की यह कमी ही फासीवाद को जीवित रहने और बढ़ने में मदद कर रही है। हमें इस पर ध्यान देना चाहिए.

साथियों, भारत में भी फासीवादी RSS/भाजपा की शक्ति का स्रोत इन विकल्पों का अभाव ही है। मोदी सरकार तीसरी बार सत्ता में लौट आई है. बावजूद इसके कि यह सरकार भारत के मजदूरों, किसानों, गरीबों और मेहनतकशों का लगातार शोषण और उत्पीड़न कर रही है, लोगों को धर्म के आधार पर बांट रही है, दलितों, आदिवासियों, धार्मिक अल्पसंख्यकों और महिलाओं पर दोयम दर्जे का नागरिक जीवन थोप रही है। फासिस्ट मोदी सरकार,अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में भी नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश समेत अपने पड़ोसियों पर आक्रामक विस्तारवादी आधिपत्य जमा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कॉरपोरेट उद्योगपति अडानी के बीच सांठगांठ इस हद तक पहुंच गई है कि इन दिनों इसे 'मोदानी' कहा जा रहा है. यह मोदानी न केवल भारत में हर जगह नदियों, जंगलों और जमीनों पर कब्जा कर रहा है, बल्कि दक्षिण एशिया के सभी देशों की सरकारों को अपने पाले में लाकर वहां के बंदरगाहों, हवाई अड्डों और जमीनों/ प्राकृतिक संसाधनों पर भी कब्जा कर रहा है। यह सार्वजनिक जीवन को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है। इसके खिलाफ साम्यवादी ताकतों, जनवादी ताकतों और दक्षिण एशिया के सभी देशों की जनता को एकजुट होकर प्रतिरोध करने की जरूरत है। साथियों, चूंकि भारत का शासक वर्ग साम्राज्यवादी पूंजी का जागीरदार और जागरूक भागीदार है, चीन के खिलाफ संघर्ष में अमेरिकी साम्राज्यवाद का रणनीतिक कनिष्ठ भागीदार है, इसलिए दक्षिण एशिया की जनता और अंतरराष्ट्रीय साम्राज्यवादी शक्तियों के बीच संघर्ष का यह एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसीलिए भारतीय विस्तारवाद के विरुद्ध एकजुट संघर्ष समय की पुकार है।। इसके अलावा, इस क्षेत्र में अमेरिका के नेतृत्व वाले गुट और चीन और रूस सहित सभी साम्राज्यवादी शक्तियों के खिलाफ हमें संघर्ष जारी रखना है। इस परिप्रेक्ष्य में, अंतर्राष्ट्रीय वामपंथियों की विफलता की पृष्ठभूमि में, फिलिस्तीन में मार्क्सवादी-लेनिनवादी ताकतों द्वारा ज़ायोनी आतंकी इज़राइल के खिलाफ हमास सहित अन्य सभी प्रतिरोध ताकतों के साथ शुरू किया गया एकजुट प्रतिरोध संघर्ष हमारे सामने एक उल्लेखनीय मॉडल है। 

साथियों, आप एक नया नेपाल, एक स्वतंत्र, संप्रभु, लोकतांत्रिक और समृद्ध नेपाल बनाने के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। हम, भारत के क्रांतिकारी कम्युनिस्ट और भारत के लोकतांत्रिक लोग, आपके पक्ष में हैं। इस संघर्ष में आपकी जीत निश्चित है.

साथियों, नेपाल एक महान देश है। यह देश महान गौतम बुद्ध का जन्मस्थान है। आज, ब्राह्मणवादियों ने गौतम बुद्ध को विकृत कर दिया है और बुद्ध द्वारा शुरू किए गए सामाजिक-राजनीतिक आंदोलन को एक धार्मिक आंदोलन में बदल दिया है, जिससे बुद्ध की क्रांतिकारी भावना खत्म हो गई है। लेकिन गौतम बुद्ध केवल शांति, करुणा और मैत्री के ही दूत नहीं थे, वे हर दृष्टि से क्रांति के दूत थे। उन्होंने सबसे पहले जाति व्यवस्था का विरोध कर समानता का उपदेश देकर समतामूलक समाज बनाने का संदेश दिया। हमारा दृढ़ विश्वास है कि नेपाल की जनता महान है और नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी सफल होगी।

हम आपकी एकता महाधिवेशन की सफलता की तहेदिल से कामना करते हैं।

साम्राज्यवाद, जियोनवाद(यहूदीवाद), फासीवाद, हिंदुत्व फासीवाद को उखाड़ फेंके ।

दुनिया के सर्वहारा और उत्पीड़ित जनता एक हो जाओ!

क्रांतिकारी अभिवादन के साथ,

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) रेड स्टार

केंद्रीय समिति

25/11/2024

राम अवध विवाह के बारे में सोच रहे हैं

नवंबर 25, 2024 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज.         मैरिज लॉन में बिबाह 
राम अवध किसान नेता


ब्याह शादी में बहुत बड़ा चेंज हुआ है। नई नई रस्में बढ़ती जा रहे हैं। 
एक नया फैशन चल पड़ा है जड़ों के दिनों में शादियों का किसी शहर या बाजार में मैरिज लॉन में विवाह करने का। 
कृषि प्रधान गांव रहे हैं। जाड़े के दिनों में खेती-बाड़ी के काम घनी भूत हुआ करते हैं। खेती से ही जीविका है आमदनी है लोगों की। 
इसलिए गांव के लोग गर्मियों के दिन में विवाह करते थे। 
जाड़े के दिन में नहीं करते थे। 
शहर बाजार के व्यापारी सर्दियों के मौसम में विवाह करते थे इसलिए कि उनका धंधा पानी मंदा चलता था खाली रहते थे तो सोचते थे कि शादी वाला काम निपटाने का फुर्सत का वक्त है। वह लोग सही सोच रहे थे। 
अब उनकी नकल बिना अकल का प्रयोग किये गांव के लोग कर रहे हैं। 
कोई तर्क देता है की राम जी का विवाह अगहन में हुआ था। इस पर विचार करना चाहिए कि वह कौन सा जमाना था। क्या राम की खेती बाड़ी करते थे किसान थे। वह तो राजकुमार थे किस नहीं थे। उनकी नकल करना इस विषय पर बेवकूफी के सिवा कुछ भी नहीं है। 
एक पाश्चात्य विचारधारा भी देश के अंदर गहरी पैठ बना चुकी है। शोर शराबा डीजे अश्लील गीत नग्न देह प्रदर्शन। औरतों को तो लगता है कि कपड़ों की महंगाई ने ही नंगा किया है सर्दी की परवाह नहीं है लेकिन पोशाक शरीर को ढकने वाली नहीं है अगर शरीर ढक लिया तो पिछड़ी औरत दिखेगी इसलिए नंगा होना जरूरी है। सर्दी से मर जाना कबूल है लेकिन कपड़ा वह नहीं चाहिए जो शरीर को ढक ले। 
व्यापारियों की नकल में कुछ नौकरी पैसा वाले लोग मैरिज लान में शादी करना शुरू किये। फिर देखा देखी खेती करने वाले लोग भी जाड़े के दिनों में विवाह करना शुरू किये। फिर देखा देखी बढ़ने लगी। 
अभी भी देखने में ऐसा आया है की खास तौर से कायस्थ भूमिहार और क्षत्रिय ब्राह्मण की शादियां मैरिज लान में अधिकतर हो रही है। इनके अलावा दूसरे लोग भी लान में जा रहे हैं लेकिन कमतर।
जाड़े की रात में मोटरसाइकिल से निमंत्रण पर शहर जाना कितना कष्टकारी है कितना खर्चीला है इस पर विचार अवश्य करना चाहिए या फिर जिन्हें लान में करना है उन्हें यह करना चाहिए कि गांव के लोगों को निमंत्रण ही ना दें। 
दिन भर आदमी खेत खलिहान और सिवान में दौड़ा फिर रात में मोटरसाइकिल से ठिठुरते हुए निमंत्रण पर जाये कितना उल्टा लगता है। 
आज भी आप देखिए तो गांव का मजदूर वर्ग या गरीब किसान वर्ग इस तरह का उत्पात वाला काम नहीं करता चाहे ज्यादा में चाहे थोड़ा में ही वह अपने गांव में विवाह करता है। 
यही असली भारत है। यही असली किसान है। जो शहर में जा रहा है वह किसान हो सकता है लेकिन दिमाग से शहरी या व्यापारी या विदेशी सभ्यता को गले लग रहा होता है। 

गांव में शादी नहीं करने के पीछे भी लोग बहुत तर्क देते हैं लेकिन उनके सभी तर्क निराधार होते हैं। 
क्षेत्र और जवार के लोग आपको आपके गांव से आपके परिवार से आपके समाज से जुड़े हुए हैं कई पीढियां से जुड़े हुए हैं किसी मैरिज लान से नहीं जुड़े हैं किसी शहर से नहीं जुड़े हैं किसी बड़े के चमकदार लकदक डेकोरेशन से शहर से नहीं जुड़े हैं। आपकी मिट्टी से आपके घर से आपके बाप दादे से लोग जुड़े हैं किसी शहर से किसी लान से नहीं। 
बंद कीजिए ऐसा उत्पात 
व्यापारियों की नकल में अपने मूल से मत कटिये।
यह विचार गांव को खेती को जवार के परस्पर को संबंध को मिटाने वाला है आत्मघाती है। 
किसी को बुरा लगे तो मैं क्षमा चाहता हूं यह मेरा विचार है आपके विचार भिन्न हो सकते हैं इस पर मुझे कोई शिकवा शिकायत नहीं है। लेकिन मेरे मन में जो खौल रहा था सोचा कि आपसे शेयर करुं।
राम अवध सिंह 
63 065 48 397 
गांव खिलची शहाबगंज चंदौली 
🙏🙏

15/11/2024

कामरेड लाभ सिंह पंजाब कॉमेटी (सीपीआई) एमएल

नवंबर 15, 2024 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज           प्रेस वक्तव्य 

*22* - *24* *नवंबर* *को* *बरनाला* *पंजाब* *में* *आयोजित* *भाकपा* ( *माले* ) *रेड* *स्टार* *के* *अखिल* *भारतीय* *प्लेनम* *को तहेदिल से* *सफल बनाएं * ** 

 *साम्राज्यवाद* , *संघी* *मनुवादी* *फासीवादी* *कॉरपोरेट* *राज* *के* *खिलाफ* *संघर्ष* *को* *तेज* *करें* !

बरनाला पंजाब, 14 नवंबर 2024 । भाकपा (माले) रेड स्टार का अखिल भारतीय प्लेनम ( विशेष सम्मेलन) आगामी 22 से 24 नवंबर को तर्कशील भवन( अमर शहीद बेअंत सिंह मुम हॉल), तर्कशील चौक( इंकलाबी जन गायक संत राम उदासी नगर) बरनाला में आयोजित हो रही है ।
इस अखिल भारतीय प्लेनम में भारत के 15 राज्यों से चुनिंदा 120 कम्युनिस्ट क्रांतिकारी शिरकत करेंगे।22 नवंबर को अखिल भारतीय विशेष सम्मेलन की शुरुआत दिन के 11 बजे रैली और आमसभा से होगी। अखिल भारतीय प्लेनम के एक दिन पहले 21 नवंबर को दिन के 1 बजे " जाति उन्मूलन आंदोलन और डॉक्टर अम्बेडकर के प्रति कम्युनिस्ट नजरिया" विषय पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया है।


उपरोक्त जानकारी देते हुए पार्टी के राज्य सचिव कॉमरेड लाभ सिंह ने कहा कि भाकपा (माले ) रेड स्टार का शिद्दत से मानना है कि मौजूदा हालात में भारत में अमीरी और गरीबी के बीच असमानता और भी गहरा गई है। क्योंकि अति-अमीर धन कुबेर अरबपतियों की संख्या और उनके पास मौजूद राष्ट्रीय संपत्ति का हिस्सा 1947 की तुलना में भयावह अनुपात तक पहुंच गया है। आज भारत 'वैश्विक गरीबी का गढ़' बन चुका है।भारत, बेरोजगारी की बंजर भूमि और दुनिया के सबसे भ्रष्ट देशों में से एक बन गया है। इस देश में मेहनतकश और गरीब आम जनता का अतिशोषण और प्रकृति की अबाधित कॉर्पोरेट लूट की कोई सीमा नहीं है। भारत के श्रम कानून, कराधान, औद्योगिक और कृषि नीतियों और पर्यावरण नियमों को इस तरह से तैयार किया गया है ताकि साम्राज्यवादी और भारतीय प्रतिक्रियावादी कॉर्पोरेट पूंजी, दोनों को बेशुमार सुविधा मिल सके।भारत का कॉरपोरेट भगवा मनुवादी/ ब्राम्हणवादी फासीवादी राज तो साम्राज्यवाद का कनिष्ठ भागीदार( जूनियर पार्टनर) है।आज की तारीख में दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे पुराने फासिस्ट संगठन आरएसएस जिसका राजनैतिक उपकरण भाजपा है,की बुलडोजर नीतियों के तले 80 फीसदी आम जनता जिनमें गरीब मेहनतकश जिनमें अधिकांश असंगठित मजदूर हैं,,किसान वर्ग,दलित/ उत्पीड़ित,आदिवासी , महिला,युवा एवम विद्यार्थी समुदाय और अल्पसंख्यक विशेषकर मुसलमान कराह रहे हैं,बर्बाद हो चुके हैं।मोदी सरकार की विनाशकारी आर्थिक नीतियों से तबाह होने वाली आम जनता का ध्यान उनके जवलंत मुद्दों से हटाने के लिए फासिस्ट संघ परिवार पूरे देश में दलितों, पिछड़ों,आदिवासियों,महिलाओं और अल्पसंख्यक विशेषकर मुसलमान जनता के खिलाफ नफ़रत और विभाजन का जहर फैला रही है ।
रेड स्टार सीपीआई एमएल पंजाब 


इस ठोस वास्तविकता को उचित परिप्रेक्ष्य में ध्यान में रखते हुए, सीपीआई (एमएल) रेड स्टार की केंद्रीय समिति ने 22 से 24 नवंबर 2024 तक पंजाब के बरनाला में पार्टी के अखिल भारतीय प्लेनम को आयोजित करने का निर्णय किया है।पार्टी ,इस प्लेनम के जरिए साम्राज्यवाद विरोधी लड़ाई को आगे बढ़ाने, संघी मनुवादी कॉरपोरेट फासीवाद को उखाड़ फेंकने और देश की सच्ची आजादी की लड़ाई को तेज करने के लिए फैसले लेगी। बरनाला के अखिल भारतीय प्लेनम में पारित नीतियों की रोशनी में पार्टी, मेहनतकश वर्ग और सभी उत्पीड़ितों( दलितों, पिछड़ों ,आदिवासियों,महिलाओं समेत अल्पसंख्यकों ) के हितों को सबसे आगे रखते हुए समान विचारधारा वाले इंकलाबी संगठनों के साथ कंधे से कन्धा मिलाकर जनता की जनवादी क्रांति को सफल बनाने का प्रयास करेगी और आगे समाजवाद की स्थापना की लड़ाई को तेज करेगी। पार्टी इस संबंध में पंजाब के महान क्रांतिकारी विरासत को ध्यान में रखते हुए राज्य के तमाम प्रगतिशील-जनवादी ताकतों और नेक इरादे वाले लोगों से भाकपा (माले) रेड स्टार के अखिल भारतीय प्लेनम को सफल बनाने के लिए तहेदिल से सहयोग करने और एकजुटता की अपील करती है।
कार्यक्रम- भाकपा (माले) रेड स्टार का अखिल भारतीय प्लेनम 
दिनांक- 22-24 नवंबर 2024
स्थान- तर्कशील भवन,तर्कशील चौक,बरनाला, पंजाब 

"आरएसएस मनुवादी कॉरपोरेट फासीवाद को उखाड़ फेंके"
" भगवा संघ परिवार, जिओनवादी आतंकवादी इजरायल और साम्राज्यवादी गठबंधन मुर्दाबाद"
"जाति उन्मूलन आंदोलन और लैंगिक समानता का आंदोलन,वर्ग संघर्ष का अटूट हिस्सा है" 
"सही क्रांतिकारी जन दिशा के आधार पर जनता के जनवाद और समाजवाद की ओर कूच करो" इस बारे में अधिक जानकारी के लिए यहां जाएं

कॉमरेड लाभ सिंह
पंजाब राज्य कमिटी सचिव 
एवम
प्लेनम स्वागत समिति संयोजक
सीपीआई (एमएल) रेड स्टार

28/10/2024

कॉमरेड अन्जू ने आरोप लगाया है कि बुलंदशहर कांड साबित करता है कि भगवा फासीवादी योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में भगवा बलात्कारियों से महिलाएं सुरक्षित नहीं है

अक्टूबर 28, 2024 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज
बुलंदशहर कांड साबित करता है कि भगवा फासीवादी योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में भगवा बलात्कारियों से महिलाएं  बिल्कुल सुरक्षित नहीं है -  कॉमरेड अंजू


चित्रकूट नर्स गैंगरेप की घटना की अखिल भारतीय क्रांतिकारी महिला संगठन ने घोर निन्दा की

लखनऊ । अखिल भारतीय क्रांतिकारी महिला संगठन की केन्द्रीय समिति सदस्य एवं उत्तर प्रदेश राज्य संयोजक  कॉमरेड अन्जू ने आरोप लगाया है कि बुलंदशहर कांड साबित करता है कि भगवा फासीवादी योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार में भगवा बलात्कारियों से महिलाएं सुरक्षित नहीं है। उन्होंने कहा कि बुलंदशहर में 23अक्टूबर को राधा स्वामी सत्संग ब्यास आश्रम में 13 साल की दो बच्चियों के साथ रेप का मामला सामने आया है। दोनों पीड़ित बच्चियों की मेडिकल जांच 24अक्टूबर को बुलंदशहर के सरकारी अस्पताल हुई। मेडिकल जांच एवं रिपोर्ट के अनुसार एक पीड़ित बच्ची 6 महीने की प्रेगनेंट हैं। स्थानीय भाजपा विधायक और नेताओं के दबाव में पुलिस एफआईआर दर्ज करने में हिलाहवाला करती रही,12 घंटे विलम्ब से पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। आरोपी सेवादार मोहनलाल राजपूत भाजपा विधायक के दामाद का काफी करीबी व्यक्ति हैं। कानूनन गर्भवती बच्ची का गर्भपात भी सम्भव नहीं।मनुवादी/ ब्राम्हणवादी हिंदुत्व के झंडाबरदार बलात्कारियों ने बच्ची की जिन्दगी को नरक बना दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि मठों, मन्दिरो में साधु संतों के रूप में  कई भगवा मनुवादी अपराधी, बलात्कारी बैठे हुए हैं।उन्होंने चित्रकूट नर्स गैंगरेप की घटना को अमानवीय कृत्य करार देते हुए घोर निन्दा की और दोषियों को फौरन गिरफ्तार करने और कठोर सजा देने की मांग की। उन्होंने  कहा की  राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के ताजा आंकड़े बताते हैं कि महिला अपराध के मामले में उत्तर प्रदेश शर्मनाक ढंग से अव्वल नंबर पर है। उत्तर प्रदेश की लगभग प्रत्येक जिले में महिलाओं के साथ बलात्कार, हत्या, अपहरण की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं ।और इन घटनाओं में पीड़ित महिलाओं और उनके परिवारों को न्याय नहीं मिल रहा है। आमतौर  पर पुलिस थानों  में महिला हिंसा  की घटनाओं में  एफआईआर  तक दर्ज न की जा रही  है बल्कि कई घटनाओं में तो पुलिस का रवैया पीड़िता( अगर वह गरीब मेहनतकश हो,दलित/ उत्पीड़ित या अल्पसंख्यक समुदाय की हो तो उसकी खैर नहीं ) के प्रति  असंवेदनशील रहता है। मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ महिला सशक्तिकरण की कितनी ही बातें कर लें लेकिन महिलाओं के साथ अपराध की घटनाएं यह बता रही हैं की यूपी में महिलाएं बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं हैं। 
भारत के संविधान की शपथ लेकर मुख्यमंत्री बने योगी आदित्यनाथ यूपी में बुल्डोजर से न्याय( या अन्याय ) करने के लिए जाने जाते हैं , ठोक दो की राजनीति में विश्वास करते  हैं, लेकिन आज तक मुख्यमंत्री यौन उत्पीड़न के आरोपी यूपी से सांसद बृज भूषण शरण सिंह के खिलाफ लिए कोई बयान तक नहीं दे सके। उन्होंने कहा की भाजपा के आईं टी सेल से जुड़े आईआईटी बीएचयू के बलात्कारियों को जब हाल में रिहा किया गया उनका स्वागत भी संघीयों ने  किया।  तब भी मुख्यमंत्री की खामोशी यह दर्शाती हैदर्ज़ा की  सांसद, मंत्री और रसूखदार लोग अगर यौन शोषण, बलात्कार के आरोपी होंगे  तो उन्हें योगी सरकार का  संरक्षण मिलेगा और बुल्डोजर एवं ठोक  दो  की राजनीति आम  जनता के लिए के लिए ही  होगी।
कॉमरेड अंजू ने कहा की महिला सुरक्षा और सम्मान के लिए सरकार को चाहिए की गांव से लेकर शहरों तक में  कार्यस्थल पर यौन हिंसा के खिलाफ शिकायत कमेटी का गठन करे ताकि महिलाओं के अधिकारों को सुनिश्चित किया जा सके।
उन्होंने ने कहा कि योगी राज में महिलाएं अपने ऊपर हर प्रकार की हिंसा झेल रही हैं। सरकार  के स्मार्ट परियोजनाओं के कारण गरीब महिलाओं और उनके परिवारों को शोषण और दमन झेलना पड़ रहा है; यहां तक की पीने के साफ पानी के लिए भी महिलाओं को  आज भी कई किलोमीटर दूर  पैदल चलना पड़ता है। बढ़ती महंगाई से गरीब महिलाएं प्राइवेट लोन लेने के लिए मजबूर कर दी जा रही हैं और  कर्ज न चुकाने पर  उनका परिवार आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो रहा है। महिलाओं के लिए स्थाई रोजगार देने के लिए सरकार के पास कोई योजना नहीं हैं जिससे  कि वह अपनी जिंदगी को सम्मानजनक तरीके से जी सके।
उन्होंने  सवाल उठाया कि जन जन तक स्वास्थ्य सुविधाओं को पहुंचाने वाली आशा बहनों  से दिन रात मेहनत तो सरकार  करवा रही है लेकिन योगी सरकार उन्हें  राज्य कर्मचारी का दर्जा देने से क्यों पीछे हट रही हैं?
उन्होंने कहा की  की योगी सरकार की  उत्तर प्रदेश में नफ़रत और बुल्डोजर की राजनीति ने आग लगा दी है। बहराइच में एक युवक की हत्या और भीड़ द्वारा  अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ आगजनी और निर्दोष महिलाओं और बच्चों का पलायन, इसका ताजा उदाहरण है। उन्होंने कहा  बुल्डोजर से कभी न्याय नहीं हो सकता है इसलिए  भारतीय संविधान को सही इच्छाशक्ति से  अमल में लाने की और उसके सही क्रियान्वयन से हाशिए पर रहने वालों और पीड़ितों को न्याय दिलाने की जरूरत है।

                    कॉमरेड अन्जू
संयोजक अखिल भारतीय क्रांतिकारी महिला संगठन उत्तर प्रदेश
दिनांक 26/10/2024

24/10/2024

दुनिया भर में राम सेतु का सच

अक्टूबर 24, 2024 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज.         
राजनीतिक कार्यकर्ता श्री आर.डी.सिंह

रामसेतू 18 लाख वर्ष पूर्व "tectonic plates" के घर्शन
द्वारा उत्पन्न हुआ, जो समुद्र तल तक गड़ा हुआ है |
जबकि मानव जाति के जन्मे हुए अभी 1लाख वर्ष भी
नही हुए, करोङो वर्षो पूर्व के डायनासौर्स (Dianasaurs) के अवशेष भी मिलगये मगर वानर सेना
का कोई अता पता नही | इस प्रकार के सेतू जापान-
कोरिया के बीच मे भी है, और इससे कई गुना बड़ा सेतु
तुर्की द्वीप मे भी है |
राम सेतु (Adams bridge) इसे अधिक पुराना होने के कारन आदम पुल भी कहाँ जाता है । राम सेतु (Adams
bridge) पर नासा ने रिसर्च कर बताया कि यह पुल
प्रकृति निर्मित है, मानव निर्मित नही । यह समुद्र में
पाये जाने वाले मूँगा (CORAL) में पाये जाने वाले
केल्शियम कार्बोनेट के छोड़े जाने से निर्मित
श्रंखला है । जिसकी लंबाई 30Km. है । नासा ने इसके सैम्पल लेकर रेडियो कार्बन परिक्षण से बताया कि
यहसेतु 17.5 लाख वर्ष पुराना है । मूंगा (Coral) समुद्र के
कम गहरे पानी में जमा होकर श्रंखला बनाते है । विश्व
में मूँगा से निर्मित ऐसी 10 श्रृंखलाएँ है इनमे से सबसे
बड़ी ऑस्ट्रेलिया के समुद्र तट पर है । इसकी लंबाई
रामसेतु से भी कई गुणा अधिक 2500 Km है । विश्व की इन सभी दश मूँगा श्रंखलाओ को सेटेलाईट के
द्वारा देखा जा चूका है । नासा के रिसर्च अनुसार
रामसेतु जब 17.5 लाख वर्ष पुराना है, तो इसे राम
निर्मित कैसे कहाँ जा सकता है । जबकि मानव ने
खेती करना/कपडे पहनना 8000 हजार वर्ष ईसा पूर्व
सीखा है । मानव ने लोहा (Iron) की खोज 1500 ईसा पूर्व की है । मानव ने लिखना 1300 ईसा पूर्व
सीखा है । फिर #राम नाम लिखकर दुनियाँ के
पहले पशु सीविल इंजनियर भालू नल-निल ने इसे कैसे
बना डाला?

21/10/2024

एक नजर में बिहार की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर महापुरुषों की दुनिया में है

अक्टूबर 21, 2024 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज.         *🔹True Facts about BIHAR🔹*
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*BIHAR* एक इकलौता राज्य जिसके
नाम से हमारे देश का
नाम बनता है .....
B- भारत , bharat 
I - इंडिया , india
H - हिन्दुतान , hindutan
A -आर्यावर्त , aryabrat
R - रिवा , riva , ये इंडिया का बहुत पुराना नाम है

Bihar ka capital ke naam se India ki sabhi misail ka naam hai.
P - Prithvi
A - Agni
T - Trisul
N - Naag
A - Aakash

जो बिहारी बाबू है !
वह इस मैसेज को फैला
दिजिए

कम से कम अपमान करने
वाले को पता चल जाए की
हम किसका अपमान कर रहे है
हम बिहार को झुकने नही देंगे चाहे कोई कितना भी
प्रयास कर ले

जय बिहार जय बिहार

*बिहार* - जिसने देश को पहला राष्ट्रपति दिया !

*बिहार* - जहाँ सबसे पहले महाजनपद बना अर्थात विश्व का पहला लोकतंत्र !

*बिहार* - जहाँ भगवान राम की पत्नी सीता का जन्म हुआ !

*बिहार* - जहाँ महाभारत के दानवीर कर्ण का जन्म हुआ !

*बिहार* - जहाँ भगवान् महावीर का जन्म हुआ, बुद्ध और महावीर को ज्ञान मिला !

*बिहार* - जहाँ सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह जी का जन्म हुआ !

*बिहार* - जहाँ के राजा चन्द्रगुप्त मौर्य से लड़ने की हिम्मत सिकंदर को भी नही हुई !

*बिहार*- जहाँ का लिट्टी चोखा पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय लिट्टी चोखा के नाम से प्रसिद्ध है !

*बिहार* - जहाँ के राजा महान अशोक ने अरब तक हिंदुस्तान का पताका फहराया और उसका स्तम्भ आज देश का राष्ट्रीय चिन्ह है !

*बिहार* - जो गांधी जी का पहला प्रेरणादायक स्रोत बना जिसने आज़ादी की आधारशिला रखी (चंपारण) !

*बिहार* - जहाँ राजा जरासंध, पाणिनि (जिसने संस्कृत व्याकरण लिखा), आर्यभट्ट जिन्होंने शून्य, दशमलव और सूर्य सिद्धांत दिया, चाणक्य (महान अर्थशास्त्री), रहीम, कबीर का जन्म हुआ !

*बिहार* - जहाँ के नंदवंश से लड़ने की हिम्मत सिकंदर की भी नही हुई और बिना लड़े विश्वविजेता डर कर भाग गया !

*बिहार* - जहाँ के 80 साल के बूढ़े ने 1857 के क्रांति में दो बार अंग्रेजों को हराया, अंग्रेजो के दांत खट्टे कर दिए (बाबु वीर कुंवर सिंह) !

*बिहार* - जहाँ के गोनू झा के किस्से पुरे हिंदुस्तान में प्रसिद्ध है !

*बिहार* - जहाँ सम्पूर्ण क्रांति के जनक महान जय प्रकाश नारायण का जन्म हुआ !

*बिहार* - जहाँ जन नायक कर्पूरी ठाकुर जी का जन्म हुआ !

*बिहार* - जहाँ भिखारी ठाकुर (विदेशिया) का जन्म हुआ !

*बिहार* - जहाँ शारदा सिन्हा जैसी महान भोजपुरी गायिका का जन्म हुआ !

*बिहार* - जहाँ स्वामी सहजानंद सरस्वती, राम शरण शर्मा, राज कमल झा, विद्यापति, रामधारी सिंह दिनकर, रामवृक्ष बेनीपुरी, फणीश्वर नाथ रेणु , देवकी नंदन खत्री, इन्द्रदीप सिन्हा, राम करण शर्मा, महामहोपाध्याय पंडित राम अवतार शर्मा, नलिन विलोचन शर्मा, गंगानाथ झा, ताबिश खैर, कलानाथ मिश्र, आचार्य रामलोचन सरन, गोपाल सिंह नेपाली, बिनोद बिहारी वर्मा, आचार्य रामेश्वर झा, राघव शरण शर्मा, नागार्जुन आचार्य जानकी बल्लभ शाश्त्री जैसे महान लेखको का जन्म हुआ !

*बिहार* - जहाँ बिस्स्मिल्लाह खान का जन्म हुआ !

*बिहार* - जहाँ दशरथ मांझी जैसा Mountain Man का जन्म हुआ !

*बिहार* - जहाँ एक साधारण शिक्षक SUPER 30 जैसा निःशुल्क कोचिंग बिना किसी सहायता के चलाकर गरीब बच्चों को IIT में दाखिला दिलाता है !

*बिहार* - जहाँ आज भी दिलो में प्रेम बसता है !

*बिहार* - जहाँ  भी बच्चे अपने माँ - बाप के पैर दबाये बिना नही सोते !

*बिहार* - जहाँ से सबसे ज्यादा बच्चे देश की सबसे कठिन परीक्षा UPSC और IIT पास करते है !

*बिहार* - जहाँ के गाँव में आज भी दादा-दादी अपने बच्चो को कहानियां सुनाते है !

*बिहार* - जहाँ आज भी भूखे रह के अतिथि को खिलाया जाता है !

*बिहार* – जहाँ आज भी सबसे ज्यादा संयुक्त परिवार है !

*बिहार* - जहाँ के बच्चे कोई सुविधा न होते हुए भी देश में सबसे ज्यादा सरकारी नौकरी पाते है !

इसी *बिहार* के रहने वाले हैं ! तो क्यूँ न करे खुद के *बिहारी* होने पर गर्व !

 *बिहार* !!👍🏻👍🏻

आइंस्टीन ड्राइवर की एक कहानी दिलीप कुमार द्वारा खोजा गया

अक्टूबर 21, 2024 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज.         *शुभ*रात्रि*🙏🙏🙏
www.roadwaynews.com


आइंस्टीन के ड्राइवर ने एक बार आइंस्टीन से कहा--"सर, मैंने हर बैठक में आपके द्वारा दिए गए हर भाषण को याद किया है।"

 आइंस्टीन हैरान !!!

उन्होंने कहा- "ठीक है, अगले आयोजक मुझे नहीं जानते।आप मेरे स्थान पर वहां बोलिए और मैं ड्राइवर बनूंगा।

ऐसा ही हुआ, बैठक में अगले दिन ड्राइवर मंच पर चढ़ गया।और भाषण देने लगा...

उपस्थित विद्वानों ने जोर-शोर से तालियां बजाईं।

उस समय एक प्रोफेसर ने ड्राइवर से पूछा - "सर, क्या आप उस सापेक्षता की परिभाषा को फिर से समझा सकते हैं ?"

असली आइंस्टीन ने देखा बड़ा खतरा !!! 

इस बार वाहन चालक पकड़ा जाएगा। लेकिन ड्राइवर का जवाब सुनकर वे हैरान रह गए...

ड्राइवर ने जवाब दिया- "क्या यह आसान बात आपके दिमाग में नहीं आई ? 

मेरे ड्राइवर से पूछिए,---वह आपको समझाएगा।

नोट : "यदि आप बुद्धिमान लोगों के साथ चलते हैं, तो आप भी बुद्धिमान बनेंगे और मूर्खों के साथ ही सदा उठेंगे-बैठेंगे तो आपका मानसिक तथा बुद्धिमता का स्तर और सोच भी उन्हीं की भांति हो जाएगी..!!

अज्ञात

13/10/2024

कामरेड साईं बाबा को लाल सलाम

अक्टूबर 13, 2024 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज.         *कॉमरेड* *साईबाबा* *को* *लाल* *सलाम* !
Red star
रोडवे-न्यूज़ पर नवीनतम समाचार और जानकारी के लिए पढ़ें और देखें 


सीपीआई (एमएल) रेड स्टार दिल्ली विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्रोफेसर जीएन साईबाबा को अपनी क्रांतिकारी श्रद्धांजलि अर्पित करता है।जिन्हें फासीवादी क्रूर कानूनों के तहत एक दशक से अधिक समय तक जेल में रखा गया था और कुछ महीने पहले सबूतों की कमी और अभियोजन पक्ष द्वारा उनके खिलाफ आरोप साबित करने में विफलता के कारण उन्हें बरी कर दिया गया था। हम उनके तमाम परिजनों/  इष्ट मित्रों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करते हैं।नवीनतम समाचारों के लिए यहां क्लिक करें

हालांकि प्रोफेसर साईबाबा की मृत्यु का तात्कालिक कारण ऑपरेशन के बाद की जटिलताओं को माना जा सकता है, लेकिन  व्हीलचेयर पर बैठे साईबाबा को कई वर्षों तक जेल में रखकर उनकी अकाल मृत्यु के लिए मौजूदा फासीवादी सरकार ही जिम्मेदार है। कोई भी व्यक्ति, अमानवीय जेल-स्थितियों में शारीरिक रूप से अक्षम  और व्हीलचेयर पर बैठे  एक व्यक्ति को लंबे समय तक जेल में सड़ाने के नतीजे  को समझ सकता है।
अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के अनुसार, वैचारिक स्थिति को बनाए रखना कोई अपराध नहीं है, और कई अवसरों पर न्यायपालिका ने भी इसे बरकरार रखा है।  और यह पूरी तरह जानते हुए भी, माओवादियों से कथित संबंधों के लिए किसी व्यक्ति को जेल में डालना, खासकर तब जब  उस  व्यक्ति के शरीर का अधिकांश हिस्सा  शारीरिक अक्षमता का शिकार  हो और जब उनका स्वास्थ्य तेजी से बिगड़ रहा हो, मानवाधिकारों का सरासर उल्लंघन है। यह असहमति व्यक्त करने के मूल लोकतांत्रिक अधिकार के साथ-साथ स्वतंत्र अभिव्यक्ति के अधिकार के भी खिलाफ है।

कॉमरेड साईबाबा की असामयिक मृत्यु के पीछे फासीवादी वैधता की कड़ी निंदा करते हुए, हम एक बार फिर उन्हें अपनी क्रांतिकारी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें

फासीवाद मुर्दाबाद!

पी जे जेम्स
महासचिव
सीपीआई (एमएल) रेड स्टार

नई दिल्ली
13.10.2024

02/10/2024

कमिश्नरेट वाराणसी द्वारा ग्राम कचनार की जांच

अक्टूबर 02, 2024 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज.         *राजातालाब क्षेत्र के कचनार गांव के चकरोड पर अवैध क़ब्ज़ा की हुई लोकायुक्त जांच* 
राजातालाब वाराणसी 


*वाराणसी: राजातालाब*अधिक जानकारी के लिए यहां जाएं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के राजातालाब तहसील के कचनार ग्राम के चकरोड आराजी संख्या 705 और 712 सहित जलखाता आराजी संख्या 694 पर अवैध क़ब्ज़ा की शिकायत पर लोकायुक्त से हुई थी। इस पर जांच का निर्देश लोकायुक्त ने दिया था। डीएम ने एसडीएम और एसीपी राजातालाब सहित सरकारी अधिवक्ता को शिकायत की जांच के लिए नामित किया। उसी कड़ी में एसडीएम राजातालाब ने गांव में उक्त सरकारी आराजियात पर अवैध क़ब्ज़ा की शिकायत की जांच करते हुए जरूरी निर्देश दिए।

एसडीएम राजातालाब ने शिकायत कर्ता के शिकायत पर दल बल के साथ मौक़े पर पहुँच की जांच। इसमे चकरोड और जलखाता के अवैध क़ब्ज़ा का जांच किया। इस दौरान शिकायत कर्ता राजकुमार गुप्ता का कहना है कि ग्राम सभा में भूमाफ़ियों द्वारा करोड़ों की सरकारी ज़मीन का गोल माल किया गया है। इसकी शिकायत पहले स्थानीय स्तर पर की, लेकिन सही जांच नहीं की गई। इसके बाद लोकायुक्त जांच की मांग की। इस दौरान एसडीएम ने बताया कि जांच रिपोर्ट गोपनीय होती है। कुछ कमियां मिली हैं। पूरी जांच रिपोर्ट तैयार कर लोकायुक्त को भेजी जाएगी।

धन्यवाद 
द्वारा 
राजकुमार गुप्ता 
वाराणसी