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30/12/2025

हिंदुराष्ट्र

दिसंबर 30, 2025 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूजक्या  सोनाली बीवी जैसे भारतीय नागरिकों को बलपूर्वक बांग्लादेश भेजने से मोदी- योगी के सपनों का हिंदुराष्ट्र बन जाएगा ?

-तुहिन


उत्तर प्रदेश के नोएडा में पश्चिम बंगाल से आए कई प्रवासी मजदूर लंबे समय से रहते आए थे।उनमें पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले से आई सोनाली बीबी और स्वीटी बीबी को बांग्ला भाषा में बात करते हुए सुनकर उत्तर प्रदेश की पुलिस ने उन्हें बांग्लादेशी भगाओ अभियान के तहत धर लिया।गर्भवती सोनाली ,उसके पति दानिश और उसके आठ साल के बेटे के साथ साथ स्वीटी बीबी और उनके दोनों नाबालिग बच्चों को केंद्र सरकार ने बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स BSF के हवाले कर दिया।BSF ने इन लोगों के लाख विरोध के बावजूद उन्हें पश्चिम बंगाल - बांग्लादेश सीमा से पुश बैक कर बांग्लादेश भेज दिया।इसी तरह बहुत सारे भारतीय नागरिकों को बांग्लादेश जबरन ढकेला गया है और धकेला जा रहा है।लेकिन मोदी सरकार को मुश्किल तब हुई जब बांग्लादेश की अदालत ने इन्हें भारतीय नागरिक मानकर जेल में डाल दिया।इधर पश्चिम बंगाल में भी इस मुद्दे पर काफी हल्ला गुल्ला हुआ।सोनाली बीबी के पिता भोदू शेख द्वारा सोनाली ,उसके बेटे और पति को भारत वापस बुलाने की अपील पर कोलकाता हाईकोर्ट ने सकारात्मक राय देते हुए कहा कि सोनाली भारतीय नागरिक हैं और गर्भवती हैं ,उन्हें अविलंब भारत वापस लाने के लिए केंद्र सरकार व्यवस्था करे।लेकिन मोदी सरकार ने अपने फैसले को सही मानकर सोनाली को बांग्लादेशी कहा और उन्हें वापस भारत लाने से इनकार कर दिया।तब कोलकाता हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार पर अदालत अवमानना का मुकदमा दर्ज करते हुए उसे फिर से सोनाली को बांग्लादेश से वापस लाने का आदेश दिया।तब भी मोदी सरकार ने इसे अपनी प्रतिष्ठा का सवाल मानते हुए कुछ नहीं किया।तब मामला सुप्रीम कोर्ट में गया।सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि गर्भवती और  सोनाली बीबी को बांग्लादेश की जेल से बाहर निकाल कर भारत लाया जाय और उनका समुचित इलाज करवाया जाए।सोनाली के एक रिश्तेदार,बांग्लादेश में जाकर सोनाली बीबी और स्वीटी बीबी के लिए जमानत की कोशिश किए।मानवीय आधार पर बांग्लादेश की अदालत ने सोनाली बीबी को जमानत दी।लेकिन उनके पति दानिश ,स्वीटी बीबी और उनके दो नाबालिग बच्चे अभी भी बांग्लादेश से निकलने में सक्षम नहीं हो पाए हैं।सोनाली बीबी और उनके आठ साल के बच्चे के वापस आने पर  पश्चिम बंगाल सरकार ने उनका समुचित इलाज करवाया है।सोनाली बीरभूम में अपने परिवार  से मिलकर बहुत खुश हैं लेकिन वो अपने पति दानिश और स्वीटी बीबी के बांग्लादेश में फंसे होने के कारण चिंतित भी है। इधर बीरभूम में हुए SIR में सोनाली बीबी के पिता भोदू शेख का नाम 2003 के वोटर लिस्ट में होने के कारण  SIR के नई सूची में सोनाली का नाम अद्यतन भी हुआ है।

हिंदुराष्ट्र के नए मॉडल उत्तर प्रदेश के मुखिया नए हिन्दू हृदय सम्राट योगी आदित्यनाथ ने इस बार असम को मात देने का ठान लिया है। CAA /NRC के समय असम में अवैध प्रवासी,घुसपैठिए या परिचयविहीन विदेशी इत्यादि टैग लगाकर गिरफ्तारी,डिटेंशन कैंप में सिर्फ संदेह के आधार पर लोगों को बड़े पैमाने पर कैद करना,प्रताड़ित करना और यातनाएं देने से शुरू कर लोगों को आत्महत्याएं करने पर मजबूर करना,यह सब कुछ हुआ है ।अब योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश भी उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है।इसका सबूत है उत्तर प्रदेश शासन द्वारा राज्य के सारे कलेक्टरों को भेजा गया हालिया आदेश - जिसमें कहा गया है कि उन्हें अपने जिले में घुसपैठिए,अवैध प्रवासी और विदेशियों को चिन्हित करना  और उनके लिए राज्य के प्रत्येक जिले में अस्थाई डिटेंशन सेंटर तैयार करना होगा।जहां चिन्हित किए गए अवैध प्रवासी/ विदेशियों को भेजा जाएगा।जहां से उनको फिर केंद्र सरकार के निर्देशानुसार यथास्थान भेजा जाएगा।
फिलहाल यूपी के विभिन्न जिलों में जैसे कि बहराइच,वाराणसी,गाजियाबाद,मिर्जापुर,अलीगढ़ आदि जिलों में पुलिस डायन शिकार करने की तरह बांग्लादेशी या रोहिंग्या घुसपैठिया ढूंढने में लगी है।इस अभियान में यूपी पुलिस ,मुसलमानों का खासकर पश्चिम बंगाल से आए बांग्लाभाषी मुसलमानों का शिकार कर रही है।फिलहाल गोदी मीडिया के पास सिवाय उत्तर प्रदेश में बांग्लादेशी और रोहिंग्या को ढूंढने के और इस बिना पर नफ़रत और विभाजन पैदा करने के और कोई काम नहीं है। टी वी ऑन करते ही गोदी मीडिया का नफ़रती हैडलाइन सामने आ जाता है जैसे कि " योगी की चोट,घुसपैठियों में कोहराम" या  " बुलडोजर बाबा की दहशत,बांग्लादेशी घुसपैठियों पर कहर " आदि।इसी अंतहीन नफ़रत ने केरल में मजदूरी की तलाश में गए छत्तीसगढ़ के दलित समुदाय के मजदूर रामनारायण बघेल की जान ले ली।जिन्हें भगवा गिरोह ने पलक्कड़ जिले में बांग्लादेशी के संदेह में इतना पीटा की उनकी जान चली गई।पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि उन्होंने इतनी बेरहमी से किसी को मारते नहीं देखा,उनके जिस्म का हर हिस्सा टूटा हुआ था।और तो और केरल जैसे तथाकथित प्रगतिशील राज्य में जब भगवा गुंडे ,रामनारायण से भारतीय होने का प्रमाण मांगते हुए मार रहे थे तो वह बांग्ला में नहीं बल्कि हिंदी मिश्रित छत्तीसगढ़ी में बोल रहा था।फिर भी संघी गुंडों ने उन्हें मार डाला।ठीक इसी तरह महाराष्ट्र , ओडिशा सहित कई राज्यों में पश्चिम बंगाल के प्रवासी मजदूर जो कि मुसलमान थे  नफ़रत की आंधी में भगवा गिरोह द्वारा मार डाले गए हैं।

बिहार के बाद जिन 12 राज्यों में चुनाव आयोग ने SIR लागू किया है उनमें यूपी एक खास राज्य है जहां पूरे देश में सबसे ज्यादा वोटर है।SIR का असल मकसद फर्जी वोटरों को चिन्हित करना नहीं है बल्कि  प्रवासी मजदूरों/ नागरिकों   को चिन्हित कर,उनका मताधिकार और नागरिक अधिकार छीन कर देशनिकाला करने के लिए अविलंब डिटेंशन सेंटर में भेजना है,यह उत्तर प्रदेश शासन के क्रियाकलापों से एकदम स्पष्ट है।राज्य के मुख्यमंत्री ने इसके लिए कानून व्यवस्था की रक्षा,सांप्रदायिक सौहाद्र और सर्वोपरि" राष्ट्रीय सुरक्षा "की दुहाई दी है।अभी 12 राज्यों में SIR के जो नवीन आंकड़े आए हैं उनके अनुसार उत्तर प्रदेश में जहां कुल वोटर 15.4 करोड़  हैं।SIR की प्रक्रिया में पूरे देश में सबसे ज्यादा 2.89 करोड़ वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से कट गए हैं।
योगी आदित्यनाथ और उनके प्रशासनिक अधिकारियों को जरूर यह मालूम होगा कि रोहिंग्या शरणार्थियों को संयुक्त राष्ट्र संघ ने बहुत उत्पीड़ित समुदाय की सूची  में रखा है और इनकी रक्षा के लिए सभी देशों की सरकारों को विशेष कदम उठाने को कहा है।वैसे भी रोहिंग्या शरणार्थियों की संख्या हमारे देश में बहुत कम है,बांग्लादेश में ज्यादा है।जब तक शेख हसीना के नेतृत्व में आवामी लीग ,बांग्लादेश की सत्ता पर काबिज़ थी,तब तक फासिस्ट संघ परिवार को बांग्लादेशी  घुसपैठियों की चिंता नहीं थी।क्योंकि मोदी सरकार के साथ शेख हसीना सरकार के मधुर रिश्ते थे।लेकिन अब परिस्थितियां बदल गई हैं।हसीना के बांग्लादेश की सत्ता से बेदखल होना और भारत सरकार द्वारा उन्हें राजनयिक शरण देने के बाद से ही संघ परिवार और अंधभक्त,देश में व्याप्त सारी समस्याओं के लिए घुसपैठिए खासकर बांग्लादेशी या रोहिंग्या मुसलमानों को प्रचारित करते हैं।और उत्तर प्रदेश,छत्तीसगढ़,मध्यप्रदेश,ओडिशा,उत्तराखंड,राजस्थान,महाराष्ट्र,दिल्ली,बिहार,असम आदि डबल इंजन सरकारों के राज्यों में ये सारी कवायद इस्लामोफोबिया के तहत याने मुसलमानों के प्रति नफ़रत और उन्हें अलगाव में डालने के लिए है।उत्तर प्रदेश में राज्य सरकार के हालिया निर्देश के तहत 17 नगर निगमों से कहा गया है कि वहां सफाई कर्मचारियों के साथ मिलकर काम कर रहे बांग्लादेशी और रोहिंग्या लोगों को चिन्हित कर उनकी सूची पुलिस को सौंपना है।अभी योगी सरकार ने 25 दिसंबर को क्रिसमस की छुट्टी को ही खत्म कर दिया।

उत्तर प्रदेश  में जहां नफ़रत और विभाजन का ये तांडव चल रहा है वो राज्य सरकारी आंकड़ों के अनुसार मानव विकास सूचकांक में बहुत नीचे है।राज्य में बेरोजगारी और गरीबी चरम पर है।राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार राज्य में दलितों/ उत्पीड़ितों, महिलाओं और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार सबसे ज्यादा है।गरीबों, मेहनतकशों,अल्पसंख्यकों के आशियानों को बुलडोजर से तोड़ना,सवर्ण दबंगों की गुंडई को चरमोत्कर्ष पर पहुंचना और झूठे मुठभेड़ में  उत्पीड़ितों और अल्पसंख्यकों को मारकर राज्य को  अपराध मुक्त घोषित करना उत्तर प्रदेश सरकार की सर्वोत्तम उपलब्धि है।लेकिन ये सब प्रतिदिन बुलडोजर बाबा की चरण वंदना करने वाले कॉरपोरेट घरानों के टुकड़ों पर पलने वाले गोदी मीडिया के टुच्चे पत्रकारों को दिखता नहीं है।

असम में डिटेंशन सेंटर तैयार करने के पीछे राज्य सरकार का तर्क यह था कि यह उत्तर पूर्व में सीमा की सुरक्षा के लिए जरूरी है।लेकिन उत्तर प्रदेश की सीमा तो सिर्फ एक ही विदेशी देश नेपाल से लगी है।तो उत्तर प्रदेश शासन को किस देश से खतरा है ?वैसे तो नेपाल से  संबंध भारत सरकार के ठीक हैं और उत्तर प्रदेश में नेपाली नागरिकों को अभी तक भगवा गुंडे या राज्य सरकार परेशान भी नहीं कर रही है।तो उत्तर प्रदेश में बांग्लाभाषी मेहनतकश जनता के खिलाफ यह नफरती मुहिम क्यों?

वैसे तो सभी भाजपा शासित राज्यों में मुसलमानों और हालिया ईसाइयों के खिलाफ नफरती हिंसक मुहिम उनके हिंदुराष्ट्र परियोजना के लिए लाजिमी है।पिछले 23 दिसंबर को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आधी रात को हज यात्रा पूर्ण कर चुके मुस्लिम समाज के 120 वरिष्ठ नागरिकों जिनमें महिलाएं भी शामिल थी को रायपुर पुलिस ने घर से बलपूर्वक उठाया और अपमानजनक तरीके से दिन भर उनको हिरासत में रखकर पूछताछ की।जिसके खिलाफ रायपुर के मुस्लिम समाज ने विरोध प्रदर्शन भी किया।इसी तर्ज़ पर हर भाजपा शासित राज्यों में घुसपैठियों खासकर बांग्लाभाषीयों को ढूंढा जा रहा है,बेलगाम गिरफ्तारियां हो रही हैं और उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है।असल में SIR के नाम पर घुसपैठियों को कुचल देने का जो हिंसक मुहिम है उसका एक बड़ा मकसद बंगाल को फतह करना है।दुनिया के सबसे बड़े और सबसे पुराने फासीवादी संगठन  RSS के सरसंघ चालक मोहन भागवत ने इसी उद्देश्य से संघ के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष में सार्वजनिक गीता पाठ सहित बंगाल में कई सम्मेलन आयोजित किया ।उनके अनुसार  भारत में निवास कर रहा हर व्यक्ति हिन्दू है और हिंदुराष्ट्र की घोषणा करने की क्या जरूरत है।भारत एक हिंदुराष्ट्र है।हिटलर को परम पूज्य मानने वाले सर संघ चालक मोहन भागवत ने तो कहा है कि इस बार बंगाल में परिवर्तन होगा और हिंदुराष्ट्र की पक्षधर सरकार बनेगी ।इसीलिए संघ परिवार का राजनैतिक अंग भाजपा कमर कस के बांग्लाभाषी मेहनतकश जनता को निशाना बना रही है।इस मामले में भाजपा के मुख्यमंत्रियों में आपस में घोर प्रतिद्वंदिता है कि इस्लामोफोबिया के तहत कौन सबसे ज्यादा हिंसक मुहिम चला सकता है।प्रतियोगिता में  हेमंत विश्व शर्मा ,देवेंद्र  फडणवीस,पुष्कर धामी,भजन लाल शर्मा  हैं तो डॉक्टर मोहन यादव भी डटे हैं। विष्णुदेव साय खुद को  शुद्ध सनातनी साबित करने में लगे हैं तो रेखा गुप्ता को तो  हेट स्पीच में महारत हासिल है।और तो और योगी आदित्यनाथ तो हिन्दू हृदय सम्राट के रेस में  मोदीजी के ठीक पीछे  दौड़ रहे हैं। इसीलिए बंगाल चुनाव के बाद भी फासिस्ट संघ परिवार का प्रमुख हथियार नफ़रत,डर और विभाजन बेरोकटोक जारी रहेगा , उत्तर प्रदेश या अगले किसी राज्य के चुनाव के मद्देनजर।

24/12/2025

सकारात्मक और नकारात्मक सोच(Radhey shyam yadav)

दिसंबर 24, 2025 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज 
mr. radhey shyam yadav(bhagat singh vichar manch)
सकारात्मक और नकारात्मक सोच सही दिशा और विपरीत दिशा के तरफ हमें चलने के लिए प्रेरित करता है। अब हमारे विवेक के ऊपर निर्भर करता है कि हम किसे अपनाते हैं क्या सोचती हैं। देवी देवताओं के हाथ में हथियार को बुराइयों को नष्ट करने की दृष्टिकोण से भी देख सकते हैं। बुराइयों से सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी हम देख सकते हैं। इसे किस दृष्टिकोण से हम देखते हैं वह अपने नजरों एवं सोच के ऊपर निर्भर करता है। दूसरी बात, इतिहास बातें और विज्ञान हमारे विचार और एक खोज है कोई जरूरी नहीं कि वह हर समय में हर व्यक्ति के लिए उपयोगी ही साबित हो इसका विपरीत प्रभाव भी पड़ता है कारण की हमें अपनी क्षमता का सकारात्मक विस्तार देते हुए काल समय और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उसे पर अमल करना चाहिए कोई जरूरी नहीं उपरोक्त प्रयोग को हम अपने जीवन में पूरी तरह से उतार दें, क्योंकि वह उसे समय की बौद्धिक क्षमता वैज्ञानिक क्षमता के आधार पर काल, समय, परिस्थितियों के अनुरूप लिया गया निर्णय है तीसरी बात, हम किसी बौद्धिक क्षमता से ओत-प्रोत   व्यक्ति हो या राजनेता हो मानवीय मूल्यों के संरक्षण संविधान और कानून की उपयोगिता धर्म के प्रति आदर्श को लेकर बात करते हुए अपने विचार रखते हुए मैंने नहीं सुना ना तो समाज के अंदर सुनाई देता है जिसका दुष्परिणाम है कि हमारे देश की आबादी के लगभग  98% लोग अपनी नागरिकता के अधिकार और कर्तव्य से ही विमुख है। संविधान और कानून के विषय में अनभिज्ञ है। सामाजिक और राजनीतिक चिंतन की विषय में अनभिज्ञ है इसके लिए जिम्मेदार कहीं ना कहीं से हम आप हैं क्योंकि हम मात्रा चर्चा करते हैं  जाति और धर्म की क्षेत्रवाद, भाषा की अनियंत्रित महंगाई, भ्रष्टाचार, अन्याय अत्याचार, संविधान और कानून का दुरुपयोग अधिकारों का दुरुपयोग यह हमारा चर्चा का विषय नहीं होता आए हम इस विषय पर गंभीर चर्चा करें और राष्ट्रीय समाजवादी जन क्रांति पार्टी के प्रबल इस विचारधारा को आत्मसात करते हुए हम आगे बढ़ते हैं और एक मजबूत नागरिक के रूप में अपने को स्थापित करते हुए व्यक्ति समाज और देश का नव निर्माण करते हैं। हम हैं समता मूलक समाज के सजग प्रहरी गलत को गलत और सही को सही आधार पर मानवीय मूल्यों का संरक्षण करना हमारा नैतिक कर्तव्य है।

03/08/2025

अगस्त 03, 2025 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यू**

ब्रह्मण व ब्रह्मणबाद के पांच खुंटे पुरखो ने तो हिला दिया है और बहुजन उखाड़ने में लगे हैं*
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आप लोग भी पढ़िए क्या हैं हिंदू धर्म के 5 खूंटे जिनसे ब्राह्मणों ने सभी sc, st & obc को बांध रखा है

*(1) पहला खूॅटा:- ब्राह्मण:-*
हिन्दू धर्म में ब्राह्मण जन्मजात श्रेष्ठ है चाहे चरित्र से वह कितना भी खराब क्यों न हो, हिन्दू धर्म में उसके बिना कोई भी मांगलिक कार्य हो ही नहीं सकता। किसी का विवाह करना हो तो दिन या तारीख बताएगा ब्राह्मण, किसी को नया घर बनाना हो तो भूमिपूजन करायेगा ब्राह्मण, किसी के घर बच्चा पैदा हो तो नाम- राशि बतायेगा ब्राह्मण, किसी की मृत्यु हो जाय तो क्रियाकर्म करायेगा ब्राह्मण, भोज खायेगा ब्राह्मण, बिना ब्राह्मण से पूछे हिन्दू हिलने की स्थिति में नहीं है। इतनी कड़ी मानसिक गुलामी में जी रहे हिन्दू से विवेक की कोई बात करने पर वह सुनने को भी तैयार नहीं होता।
OBC/SC/ST के आरक्षण का विरोध करता है ब्राह्मण, OBC/SC/ST की शिक्षा, रोजगार, सम्मान का विरोध करता है ब्राह्मण!! इतना होने के बावजूद भी वह OBC/SC/ST का प्रिय और अनिवार्य बना हुआ है। क्यों? घोर आश्चर्य!! या ये कहें कि दुनिया का आठवां अजूबा!! जो हिन्दू ब्राह्मण रूपी खूॅटा से बॅधा हुआ है।

*(2) दूसरा खूॅटा: ब्राह्मण शास्त्र:-*
यह जहरीले साॅप की तरह हिन्दू समाज के लिए जानलेवा है। मनुस्मृति जहरीली पुस्तक है। वेद, पुराण, रामायण आदि में भेद-भाव, ऊॅच-नीच, छूत-अछूत का वर्णन किया गया है। मनुष्य का जन्म:-
ब्रह्मा के मुख से ब्राह्मण, भुजा से क्षत्रिय, जंघा से वैश्य, पैर से शूद्र की उत्पत्ति बताकर शोषण-दमन की व्यवस्था शास्त्रों में की गयी है, हिन्दू-शास्त्रों मे स्त्री को गिरवी रखा जा सकता है, बेचा जा सकता है, उधार भी दिया जा सकता है। हिन्दू समाज इन शास्त्रों से संचालित होता रहा है।

*(3) तीसरा खूॅटा: हिन्दू धर्म के पर्व/त्योहार:-*
हिन्दू धर्म के पर्व/त्योंहार आर्यों द्वारा इस देश के SC/ST/OBC (मूलनिवासियों) की गयी निर्मम हत्या पर मनाया गया जश्न है। आर्यों ने जब भी और जहाॅ भी मूलनिवासियों पर विजय हासिल की, विजय की खुशी में यज्ञ किया, यही पर्व कहा गया, पर्व ब्राह्मणों की विजय और त्योहार मूलनिवासियों के हार की पहचान है। त्योहार का मतलब होता है, तुम्हारी हार यानी मूलनिवासियों की हार।
इस देश के मूलवासी अनभिज्ञता की वजह से पर्व-त्योहार मनाते हैं। न तो किसी को अपने इतिहास का ज्ञान है और न ही अपमान का बोध। सबके सब ब्राह्मणवाद के खूॅटे से बॅधे हैं। अपना मान-सम्मान और इतिहास सब कुछ खो दिया है। अपने ही अपमान और विनाश का उत्सव मनाते हैं और शत्रुओं को सम्मान और धन देते हैं। यह चिन्तन का विषय है।
होली- होलिका की हत्या और बलात्कार का त्योहार दशहरा- दीपावली- रावण वध का त्योहार।
नवरात्र- महिषासुर वध का त्योहार।
किसी धर्म में त्योहार पर शराब पीना और जुआ खेलना वर्जित है। पर हिन्दू धर्म में होली में शराब और दीपावली पर जुआ खेलना धर्म है। हिन्दू समाज इस खूॅटे से पुरी तरह बॅधा हुआ है।

*(4) चौथा खूॅटा- देवी देवता:-*
हिन्दू धर्म में तैंतीस करोड़ देवी-देवता बताये गये हैं। पाप-पुण्य, जन्म-मरण, स्वर्ग-नरक, पुनर्जन्म, अगले जन्म का भय बताकर काल्पनिक देवी-देवताओं की पूजा-आराधना का विधान किया गया है। मन्दिर-मूर्ति, पूजा, दान-दक्षिणा देना अनिवार्य बताया गया है। हिन्दू समाज इस खूॅटे से बॅधा हुआ है और चमत्कार, पाखण्ड, अंधविश्वास, अंधश्रद्धा से जकड़ा हुआ है।

*(5) पाॅचवां खूॅटा : तीर्थस्थान:-*

ब्राह्मणों ने देश के चारों ओर तीर्थस्थान के हजारों खूॅटे गाड़ रखे हैं। इन तीर्थस्थानों के खूॅटे से टकराकर मरना पुण्य और स्वर्ग प्राप्ति का सोपान बताया गया है। इस धारणा पर भरोसा कर सभी ब्राह्मणों के मानसिक गुलाम OBC/SC/ST के लोग बिना बुलाये तीर्थस्थानों पर पहुँच जाते है जहाँ इनका तीर्थ स्थलों के मालिक (ब्राह्मण) आस्था की आड़ में हर प्रकार का शोषण करते हैं।

    *समाधान*:- ब्राह्मणवाद के इन खूॅटो को उखाड़ने के लिए समस्त शूद्र(OBC/SC/ST) की जातियों को एकजुट होकर चिन्तन-मनन और विचार-विमर्श करना होगा। किसी भी मांगलिक कार्य में ब्राह्मण को न बुलाने से, ब्राह्मण शास्त्रों को न पढ़ने से, न मानने से, हिन्दू (ब्राह्मण) त्योहारों को न मनाने से, काल्पनिक हिन्दू देवी-देवताओं को न मानने, न पूजने से, तीर्थस्थानों में न जाने, दान-दक्षिणा न देने से ब्राह्मणवाद के सभी खूॅटे उखड़ सकते हैं।

ब्राह्मणवाद से समाज मुक्त हो सकता है और मानववाद विकसित हो सकता है। इस पर OBC/SC/ST समाज की सभी जातियों को चिन्तन-मनन करने की आवश्यकता है। तो आइए विदेशी आर्य ब्राह्मणों को दान, मान और मतदान न देकर ब्राह्मणवाद से मुक्ति और मानववाद को विकसित करने का सकल्प लें।

*एक बार अपने दिमाग से, शांत बैठकर जरूर सोचें। पोस्ट पसंद आये तो ज्यादा से ज्यादा शेयर जरूर करें।* 

*मानववादी साहित्य एवं सत्यम पुस्तक केन्द्र के विक्रेता स्वर्गीय नारदमुनि लोहार जी गया बिहार आप सभी को*. Radheyshyam azad from varanasi 

 

22/05/2025

मई 22, 2025 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज. 

 जो सरकार निकमी है
वह सरकार बदलनी है
साथियो
जरासा सोचों - निजि करण क्या है सरकारी व्यवस्था सही कार्य नही कर पाती है तो उसे व्यापारिक लाभ के लिए जनता का शोषण करने के लिए शोषण कर्त्ता को दे दिया जाता है यह शोषण करता हमारे व्यापारी उद्योग पति है जो जनता का शोषण करते है अपने लाभ के लिए 
आज जो सरकार है वह सभी सरकारी व्यवस्था को निजि व्यापारियों को दे कर जनता का शोषण करती है
सावधान हो जाओ
आज सुरक्षा व्यवस्था भी निजि व्यापारियों को दिया जा रहा है
सरकार भी निजि करण की तरफ चल रही है बड़े बड़े व्यापारी अपने पैसे के बल पर बडी बडी पार्टी चला रहे है और सरकार बना कर जनता का शोषण कर रहे हैं अब आप सोचों देश का विकाश कैसे हो जनता का शोषण बन्द हो -
सरकार जो भी टैक्स लगती है वह सब जनता कोही देना पड़ता है व्यापारी पर जो GST लगती है वह सब व्यापारी जनता से लेती है और कुछ सरकार को देती है कुछ अपने पास रख लेती है इस सभी कारणों का कारण
सरकार की निकमापन है 
जो सरकार निकम्मी है
वह सरकार बदलनीहै -
आप सोचों
निजि करण क्या है जय श्री राधे राधे
डा राधे श्याम यादव समाज वैज्ञानिक वाराणसी

12/01/2025

भारत अपनी चुनाव प्रणाली में लोकतंत्र से दूर हो जाएगा

जनवरी 12, 2025 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज.        ' *एक* *राष्ट्र* *एक* *चुनाव* ': *फासीवादी* *एकात्मक* *शासन* *की* *ओर* *निरंकुश* *कदम* सीपीआई (एमएल) रेड स्टार

 
एक साथ चुनाव कराने के मुद्दे की जांच के लिए सितंबर 2023 में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति (एचएलसी) ने 14 मार्च 2024 को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। मोदी कैबिनेट ने 12 दिसंबर 2024 को एचएलसी के सुझावों को मंजूरी दे दी। सरकार ने संसद के चालू शीतकालीन सत्र में लोकसभा और विधानसभाओं के एक साथ चुनाव के लिए मसौदा कानून पेश करने का फैसला किया है। चूंकि स्थानीय निकायों के एक साथ चुनाव के लिए राज्य विधानसभाओं के अनुमोदन के लिए एक अलग संवैधानिक संशोधन की आवश्यकता है, इसलिए इसे अलग से लिया जाएगा।
 
1950 में भारत को एक गणतंत्र के रूप में औपचारिक रूप से अपनाने के बाद, 1952, 1957, 1962 और 1967 के दौरान लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ हुए। हालाँकि, कई मौकों पर लोकसभा और विधानसभाओं के समय से पहले भंग होने के कारण, उनके चुनाव अलग-अलग समय पर शुरू हुए। तब से इस ठोस हकीकत को समझते हुए राजनीतिक मुख्यधारा में लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने पर कोई गंभीर चर्चा नहीं हुई है। और शासक वर्ग की राजनीति के चौतरफा क्षय और पतन के बावजूद, 1960 के दशक के बाद की अवधि में कई क्षेत्रीय और राज्य-स्तरीय पार्टियों का उदय हुआ, जो अक्सर क्षेत्रीय और राज्य-स्तर दोनों पर राज्यों के विशिष्ट मुद्दों की आकांक्षा रखते थे।
 
हालाँकि, आपातकाल के बाद की नवउदारवादी स्थिति में आरएसएस और उसके कई सहयोगियों के तेजी से विकास की शुरुआत राम जन्मभूमि आंदोलन से हुई, जिसकी परिणति 1992 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस के रूप में हुई, जिसने देश में राजनीतिक आख्यान को बदल दिया। आरएसएस के अखिल भारतीय बहुसंख्यकवादी एकरूपीकरण अभियान को अपने राजनैतिक उपकरण भाजपा के साथ, बाजपेयी शासन के उत्थान के साथ बढ़ावा मिला। इसकी सबसे प्रतिगामी नवउदारवादी अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था, पहले वैट और फिर जीएसटी की शुरुआत, जिसने कराधान पर राज्यों के संघीय अधिकारों को छीन लिया, ने इस एकात्मक कदम के लिए आर्थिक आधार तैयार किया। इससे अभिन्न रूप से जुड़ा हुआ और एक साथ चुनाव के सबसे प्रबल समर्थक रहे आडवाणी जैसे नेताओं की कड़ी मेहनत से समर्थित, वाजपेयी शासन के तहत विधि आयोग, एकात्मक एजेंडे को दृढ़ता से आत्मसात करते हुए,1999 में ही लोकसभा और विधानसभा में एक साथ चुनाव के अपने प्रस्ताव के साथ आगे आया था। 
 
2014 में मोदी सरकार के आने के साथ, एक साथ चुनाव के विचार को एक प्रबल समर्थन मिला जब नीति आयोग, जिसने अगस्त 2014 में छह दशक से अधिक पुराने योजना आयोग की जगह ले ली। इसके लिए, 2017 में मोदी की अध्यक्षता में नीति आयोग ने एक वर्किंग पेपर प्रकाशित किया।जिसमें एक तरफा एक साथ चुनाव के कई लाभों पर प्रकाश डाला गया है जैसे कि चुनाव खर्च में कमी, मतदाता मतदान में वृद्धि, बेहतर प्रशासन, सार्वजनिक जीवन में व्यवधान कम होना, चुनाव की कम आवृत्ति और संबंधित लागत, आदि। इस पेपर ने चालाकी से हानिकारक परिणामों पर चुप्पी साध ली, जैसे कि केंद्र में सत्तारूढ़ दल के फायदे, संघवाद को कमजोर करना और उपमहाद्वीपीय भारत की विविधता को खतरा, आदि।
 
एक साथ चुनावों के लिए संघीय-विरोधी शोर को मोदी.2 के बाद से और अधिक बढ़ावा मिला है, और स्पष्ट रूप से, हालांकि भाजपा के पास मोदी.3 के तहत संसद में बहुमत का आंकड़ा नहीं है, अखिल भारतीय एकात्मक अभियान बिना किसी रुकावट के तेज हो रहा है। सितंबर 2023 में कोविन्द समिति की नियुक्ति, मार्च 2024 में रिपोर्ट प्रस्तुत करना, दिसंबर 2024 में कैबिनेट की मंजूरी और संसद के शीतकालीन सत्र में इसकी शुरूआत, ये सब आरएसएस के उग्र हिंदूराष्ट्र आक्रमण से अविभाज्य रूप से जुड़े हैं . यदि इसका विरोध नहीं किया गया और इसे पराजित नहीं किया गया, तो यह देश और इसकी उपमहाद्वीपीय अनुपात की कई विविधताओं के लिए विनाशकारी होगा। और, 'एक राष्ट्र एक चुनाव' एजेंडा राष्ट्रीय मुद्दों की आड़ में राज्य के मुद्दों को खत्म कर देगा।
 
इस समय लोकसभा और विधानसभाओं के एक साथ चुनाव, विभिन्न भाषाई और जातीय समुदायों के सामने आने वाले विशिष्ट मुद्दों को दरकिनार करके और उन पर हावी होकर, अखिल भारतीय पार्टियों, विशेष रूप से केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी को लाभ पहुंचाएंगे, और राज्य-स्तरीय राजनीतिक ताकतों की प्रासंगिकता और प्रभाव को कम कर देंगे। यदि इसे लागू किया गया तो यह भारतीय राज्य के संघीय ढांचे के लिए हानिकारक होगा। दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश भारत में चुनावों में ईवीएम की उपलब्धता से जुड़े तार्किक मुद्दों पर अभी चर्चा होनी बाकी है। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, एक साथ चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग को ईवीएम की संख्या दोगुनी से ज्यादा करनी होगी, जिसके सफल होने पर कम से कम तीन साल का समय लगेगा। चूँकि EVM के भारतीय निर्माताओं के पास उत्पादन बढ़ाने के बाद भी मशीनों के उत्पादन को दोगुना करने की क्षमता नहीं है, विदेशी कंपनियाँ इस अंतर को भरने के लिए प्रवेश कर सकती हैं, विशेष रूप से चिप्स और अन्य महत्वपूर्ण सामग्रियों की खरीद के संबंध में, जिसके जरिए चुनाव कराने में अप्रत्याशित परिणाम हो सकते हैं।
 
सटीक रूप से, मुख्य मुद्दे पर आते हुए, 'एक राष्ट्र एक चुनाव' का विचार एक भाषा, एक संस्कृति, एक पुलिस इत्यादि जैसे समान कदमों के अनुरूप एकात्मक और संघवाद-विरोधी एजेंडे को देश पर जबरन थोपना है। यह बहुभाषी, बहु-सांस्कृतिक, बहु-जातीय और संघीय भारत के खिलाफ एक क्रूर, फासीवादी अभियान है। हम सभी लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष और फासीवाद-विरोधी ताकतों और तमाम जनता से अपील करते हैं कि वे एकजुट होकर इस फासीवादी कदम को चुनौती देने और हराने के लिए आगे आएं।

पी जे जेम्स
महासचिव 
सीपीआई (एमएल) रेड स्टार

नई दिल्ली
15.12.2024

13/12/2024

दिसंबर 13, 2024 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज.   नेपाल की क्रांतिकारी कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय एकता महाधिवेशन को सीपीआई (एमएल) रेड स्टार की ओर से शुभकामनाएं
सीपीआई एमएल लाल सितारा 



साथियों,

कॉमरेड तुहिन और मेरी ओर से व्यक्तिगत रूप से, और हमारी पार्टी सीपीआई (एम-एल) रेड स्टार की ओर से, हम रिवोल्यूशनरी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (आरसीपीएन) की यूनिटी कांग्रेस की सफलता की कामना करते हैं। इस ऐतिहासिक कांग्रेस में हमें आमंत्रित करने के लिए हम आपके आभारी हैं।

कॉमरेड, आज आपका महाधिवेशन( कांग्रेस) ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया पर फासीवाद और युद्ध का खतरा मंडरा रहा है। अमेरिकी राजनीति का फासीवादी चेहरा डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी खोई ताकत हासिल कर ली है और दूसरी बार सत्ता में वापसी की है. यह घटना साबित करती है कि पूरी दुनिया में फासीवाद के लिए उपजाऊ जमीन है। जब तक साम्राज्यवादी और पूंजीवादी अर्थव्यवस्था का भीषण संकट बना रहेगा और इसका समाधान नहीं ढूंढा जायेगा, तब तक फासीवाद का ख़तरा बना रहेगा। डोनाल्ड ट्रंप की जीत ने दिखा दिया है कि फासीवाद को सिर्फ सत्ता से हटाकर नहीं रोका जा सकता. यदि फासीवादी राजनीति, अर्थशास्त्र, सामाजिक नीति और दर्शन का कोई वैकल्पिक आख्यान नहीं बनाया जा सकता, यदि फासीवाद की जन्मस्थली पूंजीवाद के संकट का वास्तविक समाधान प्रस्तुत नहीं किया जा सकता, तो फासीवादी ताकत को सिर्फ चुनाव में हराकर फासीवाद-विरोधी जीत हासिल नहीं की जा सकती। पराजित फासीवाद बिना किसी वैकल्पिक सामाजिक-आर्थिक मार्ग और वैकल्पिक राजनीतिक कार्यक्रम के, उदारवादियों से खोई हुई शक्ति को दोगुनी ताकत और जोश के साथ वापस पाने में सक्षम है। आप देखेंगे कि पिछली शताब्दी के चालीसवें दशक में, एक ओर, उदार पूंजीपति वर्ग फासीवाद के विरुद्ध कींसवादी विकल्प प्रस्तुत करने में सक्षम था, जिसके बल पर वह अगले तीन दशक तक "पूंजीवाद के स्वर्ण युग" का निर्माण करने में सक्षम था। दूसरी ओर, कम्युनिस्टों के पास सोवियत विकल्प था। ऐसा विकल्प कि तीस के दशक की महामंदी में विश्व पूंजीवाद को नष्ट करने वाला संकट भी उसे खरोंच नहीं सका। आज पूंजीपति वर्ग के पास कोई विकल्प नहीं है। कम्युनिस्टों के पास एक भी नहीं है. हालाँकि समाजवाद के प्रथम विश्व अभियान को प्रारंभिक सफलता तो मिली, लेकिन वर्तमान में यह पूरे विश्व में संकट का सामना कर रहा है। विकल्पों की यह कमी ही फासीवाद को जीवित रहने और बढ़ने में मदद कर रही है। हमें इस पर ध्यान देना चाहिए.

साथियों, भारत में भी फासीवादी RSS/भाजपा की शक्ति का स्रोत इन विकल्पों का अभाव ही है। मोदी सरकार तीसरी बार सत्ता में लौट आई है. बावजूद इसके कि यह सरकार भारत के मजदूरों, किसानों, गरीबों और मेहनतकशों का लगातार शोषण और उत्पीड़न कर रही है, लोगों को धर्म के आधार पर बांट रही है, दलितों, आदिवासियों, धार्मिक अल्पसंख्यकों और महिलाओं पर दोयम दर्जे का नागरिक जीवन थोप रही है। फासिस्ट मोदी सरकार,अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में भी नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश समेत अपने पड़ोसियों पर आक्रामक विस्तारवादी आधिपत्य जमा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कॉरपोरेट उद्योगपति अडानी के बीच सांठगांठ इस हद तक पहुंच गई है कि इन दिनों इसे 'मोदानी' कहा जा रहा है. यह मोदानी न केवल भारत में हर जगह नदियों, जंगलों और जमीनों पर कब्जा कर रहा है, बल्कि दक्षिण एशिया के सभी देशों की सरकारों को अपने पाले में लाकर वहां के बंदरगाहों, हवाई अड्डों और जमीनों/ प्राकृतिक संसाधनों पर भी कब्जा कर रहा है। यह सार्वजनिक जीवन को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है। इसके खिलाफ साम्यवादी ताकतों, जनवादी ताकतों और दक्षिण एशिया के सभी देशों की जनता को एकजुट होकर प्रतिरोध करने की जरूरत है। साथियों, चूंकि भारत का शासक वर्ग साम्राज्यवादी पूंजी का जागीरदार और जागरूक भागीदार है, चीन के खिलाफ संघर्ष में अमेरिकी साम्राज्यवाद का रणनीतिक कनिष्ठ भागीदार है, इसलिए दक्षिण एशिया की जनता और अंतरराष्ट्रीय साम्राज्यवादी शक्तियों के बीच संघर्ष का यह एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसीलिए भारतीय विस्तारवाद के विरुद्ध एकजुट संघर्ष समय की पुकार है।। इसके अलावा, इस क्षेत्र में अमेरिका के नेतृत्व वाले गुट और चीन और रूस सहित सभी साम्राज्यवादी शक्तियों के खिलाफ हमें संघर्ष जारी रखना है। इस परिप्रेक्ष्य में, अंतर्राष्ट्रीय वामपंथियों की विफलता की पृष्ठभूमि में, फिलिस्तीन में मार्क्सवादी-लेनिनवादी ताकतों द्वारा ज़ायोनी आतंकी इज़राइल के खिलाफ हमास सहित अन्य सभी प्रतिरोध ताकतों के साथ शुरू किया गया एकजुट प्रतिरोध संघर्ष हमारे सामने एक उल्लेखनीय मॉडल है। 

साथियों, आप एक नया नेपाल, एक स्वतंत्र, संप्रभु, लोकतांत्रिक और समृद्ध नेपाल बनाने के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। हम, भारत के क्रांतिकारी कम्युनिस्ट और भारत के लोकतांत्रिक लोग, आपके पक्ष में हैं। इस संघर्ष में आपकी जीत निश्चित है.

साथियों, नेपाल एक महान देश है। यह देश महान गौतम बुद्ध का जन्मस्थान है। आज, ब्राह्मणवादियों ने गौतम बुद्ध को विकृत कर दिया है और बुद्ध द्वारा शुरू किए गए सामाजिक-राजनीतिक आंदोलन को एक धार्मिक आंदोलन में बदल दिया है, जिससे बुद्ध की क्रांतिकारी भावना खत्म हो गई है। लेकिन गौतम बुद्ध केवल शांति, करुणा और मैत्री के ही दूत नहीं थे, वे हर दृष्टि से क्रांति के दूत थे। उन्होंने सबसे पहले जाति व्यवस्था का विरोध कर समानता का उपदेश देकर समतामूलक समाज बनाने का संदेश दिया। हमारा दृढ़ विश्वास है कि नेपाल की जनता महान है और नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी सफल होगी।

हम आपकी एकता महाधिवेशन की सफलता की तहेदिल से कामना करते हैं।

साम्राज्यवाद, जियोनवाद(यहूदीवाद), फासीवाद, हिंदुत्व फासीवाद को उखाड़ फेंके ।

दुनिया के सर्वहारा और उत्पीड़ित जनता एक हो जाओ!

क्रांतिकारी अभिवादन के साथ,

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) रेड स्टार

केंद्रीय समिति

25/11/2024

राम अवध विवाह के बारे में सोच रहे हैं

नवंबर 25, 2024 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज.         मैरिज लॉन में बिबाह 
राम अवध किसान नेता


ब्याह शादी में बहुत बड़ा चेंज हुआ है। नई नई रस्में बढ़ती जा रहे हैं। 
एक नया फैशन चल पड़ा है जड़ों के दिनों में शादियों का किसी शहर या बाजार में मैरिज लॉन में विवाह करने का। 
कृषि प्रधान गांव रहे हैं। जाड़े के दिनों में खेती-बाड़ी के काम घनी भूत हुआ करते हैं। खेती से ही जीविका है आमदनी है लोगों की। 
इसलिए गांव के लोग गर्मियों के दिन में विवाह करते थे। 
जाड़े के दिन में नहीं करते थे। 
शहर बाजार के व्यापारी सर्दियों के मौसम में विवाह करते थे इसलिए कि उनका धंधा पानी मंदा चलता था खाली रहते थे तो सोचते थे कि शादी वाला काम निपटाने का फुर्सत का वक्त है। वह लोग सही सोच रहे थे। 
अब उनकी नकल बिना अकल का प्रयोग किये गांव के लोग कर रहे हैं। 
कोई तर्क देता है की राम जी का विवाह अगहन में हुआ था। इस पर विचार करना चाहिए कि वह कौन सा जमाना था। क्या राम की खेती बाड़ी करते थे किसान थे। वह तो राजकुमार थे किस नहीं थे। उनकी नकल करना इस विषय पर बेवकूफी के सिवा कुछ भी नहीं है। 
एक पाश्चात्य विचारधारा भी देश के अंदर गहरी पैठ बना चुकी है। शोर शराबा डीजे अश्लील गीत नग्न देह प्रदर्शन। औरतों को तो लगता है कि कपड़ों की महंगाई ने ही नंगा किया है सर्दी की परवाह नहीं है लेकिन पोशाक शरीर को ढकने वाली नहीं है अगर शरीर ढक लिया तो पिछड़ी औरत दिखेगी इसलिए नंगा होना जरूरी है। सर्दी से मर जाना कबूल है लेकिन कपड़ा वह नहीं चाहिए जो शरीर को ढक ले। 
व्यापारियों की नकल में कुछ नौकरी पैसा वाले लोग मैरिज लान में शादी करना शुरू किये। फिर देखा देखी खेती करने वाले लोग भी जाड़े के दिनों में विवाह करना शुरू किये। फिर देखा देखी बढ़ने लगी। 
अभी भी देखने में ऐसा आया है की खास तौर से कायस्थ भूमिहार और क्षत्रिय ब्राह्मण की शादियां मैरिज लान में अधिकतर हो रही है। इनके अलावा दूसरे लोग भी लान में जा रहे हैं लेकिन कमतर।
जाड़े की रात में मोटरसाइकिल से निमंत्रण पर शहर जाना कितना कष्टकारी है कितना खर्चीला है इस पर विचार अवश्य करना चाहिए या फिर जिन्हें लान में करना है उन्हें यह करना चाहिए कि गांव के लोगों को निमंत्रण ही ना दें। 
दिन भर आदमी खेत खलिहान और सिवान में दौड़ा फिर रात में मोटरसाइकिल से ठिठुरते हुए निमंत्रण पर जाये कितना उल्टा लगता है। 
आज भी आप देखिए तो गांव का मजदूर वर्ग या गरीब किसान वर्ग इस तरह का उत्पात वाला काम नहीं करता चाहे ज्यादा में चाहे थोड़ा में ही वह अपने गांव में विवाह करता है। 
यही असली भारत है। यही असली किसान है। जो शहर में जा रहा है वह किसान हो सकता है लेकिन दिमाग से शहरी या व्यापारी या विदेशी सभ्यता को गले लग रहा होता है। 

गांव में शादी नहीं करने के पीछे भी लोग बहुत तर्क देते हैं लेकिन उनके सभी तर्क निराधार होते हैं। 
क्षेत्र और जवार के लोग आपको आपके गांव से आपके परिवार से आपके समाज से जुड़े हुए हैं कई पीढियां से जुड़े हुए हैं किसी मैरिज लान से नहीं जुड़े हैं किसी शहर से नहीं जुड़े हैं किसी बड़े के चमकदार लकदक डेकोरेशन से शहर से नहीं जुड़े हैं। आपकी मिट्टी से आपके घर से आपके बाप दादे से लोग जुड़े हैं किसी शहर से किसी लान से नहीं। 
बंद कीजिए ऐसा उत्पात 
व्यापारियों की नकल में अपने मूल से मत कटिये।
यह विचार गांव को खेती को जवार के परस्पर को संबंध को मिटाने वाला है आत्मघाती है। 
किसी को बुरा लगे तो मैं क्षमा चाहता हूं यह मेरा विचार है आपके विचार भिन्न हो सकते हैं इस पर मुझे कोई शिकवा शिकायत नहीं है। लेकिन मेरे मन में जो खौल रहा था सोचा कि आपसे शेयर करुं।
राम अवध सिंह 
63 065 48 397 
गांव खिलची शहाबगंज चंदौली 
🙏🙏