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सड़क समाचार पत्रिका(जनता की आवाज़) एक हिंदी समाचार वेबसाइट और मीडिया प्लेटफ़ॉर्म है जो भारतीय राजनीति, सरकारी नीतियों, सामाजिक मुद्दों और समसामयिक मामलों से संबंधित समाचार और जानकारी प्रदान करने पर केंद्रित है। मंच का उद्देश्य आम लोगों की आवाज़ को बढ़ाना और उनकी चिंताओं और विचारों पर ध्यान आकर्षित करना है।

30/12/2025

हिंदुराष्ट्र

दिसंबर 30, 2025 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूजक्या  सोनाली बीवी जैसे भारतीय नागरिकों को बलपूर्वक बांग्लादेश भेजने से मोदी- योगी के सपनों का हिंदुराष्ट्र बन जाएगा ?

-तुहिन


उत्तर प्रदेश के नोएडा में पश्चिम बंगाल से आए कई प्रवासी मजदूर लंबे समय से रहते आए थे।उनमें पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले से आई सोनाली बीबी और स्वीटी बीबी को बांग्ला भाषा में बात करते हुए सुनकर उत्तर प्रदेश की पुलिस ने उन्हें बांग्लादेशी भगाओ अभियान के तहत धर लिया।गर्भवती सोनाली ,उसके पति दानिश और उसके आठ साल के बेटे के साथ साथ स्वीटी बीबी और उनके दोनों नाबालिग बच्चों को केंद्र सरकार ने बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स BSF के हवाले कर दिया।BSF ने इन लोगों के लाख विरोध के बावजूद उन्हें पश्चिम बंगाल - बांग्लादेश सीमा से पुश बैक कर बांग्लादेश भेज दिया।इसी तरह बहुत सारे भारतीय नागरिकों को बांग्लादेश जबरन ढकेला गया है और धकेला जा रहा है।लेकिन मोदी सरकार को मुश्किल तब हुई जब बांग्लादेश की अदालत ने इन्हें भारतीय नागरिक मानकर जेल में डाल दिया।इधर पश्चिम बंगाल में भी इस मुद्दे पर काफी हल्ला गुल्ला हुआ।सोनाली बीबी के पिता भोदू शेख द्वारा सोनाली ,उसके बेटे और पति को भारत वापस बुलाने की अपील पर कोलकाता हाईकोर्ट ने सकारात्मक राय देते हुए कहा कि सोनाली भारतीय नागरिक हैं और गर्भवती हैं ,उन्हें अविलंब भारत वापस लाने के लिए केंद्र सरकार व्यवस्था करे।लेकिन मोदी सरकार ने अपने फैसले को सही मानकर सोनाली को बांग्लादेशी कहा और उन्हें वापस भारत लाने से इनकार कर दिया।तब कोलकाता हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार पर अदालत अवमानना का मुकदमा दर्ज करते हुए उसे फिर से सोनाली को बांग्लादेश से वापस लाने का आदेश दिया।तब भी मोदी सरकार ने इसे अपनी प्रतिष्ठा का सवाल मानते हुए कुछ नहीं किया।तब मामला सुप्रीम कोर्ट में गया।सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि गर्भवती और  सोनाली बीबी को बांग्लादेश की जेल से बाहर निकाल कर भारत लाया जाय और उनका समुचित इलाज करवाया जाए।सोनाली के एक रिश्तेदार,बांग्लादेश में जाकर सोनाली बीबी और स्वीटी बीबी के लिए जमानत की कोशिश किए।मानवीय आधार पर बांग्लादेश की अदालत ने सोनाली बीबी को जमानत दी।लेकिन उनके पति दानिश ,स्वीटी बीबी और उनके दो नाबालिग बच्चे अभी भी बांग्लादेश से निकलने में सक्षम नहीं हो पाए हैं।सोनाली बीबी और उनके आठ साल के बच्चे के वापस आने पर  पश्चिम बंगाल सरकार ने उनका समुचित इलाज करवाया है।सोनाली बीरभूम में अपने परिवार  से मिलकर बहुत खुश हैं लेकिन वो अपने पति दानिश और स्वीटी बीबी के बांग्लादेश में फंसे होने के कारण चिंतित भी है। इधर बीरभूम में हुए SIR में सोनाली बीबी के पिता भोदू शेख का नाम 2003 के वोटर लिस्ट में होने के कारण  SIR के नई सूची में सोनाली का नाम अद्यतन भी हुआ है।

हिंदुराष्ट्र के नए मॉडल उत्तर प्रदेश के मुखिया नए हिन्दू हृदय सम्राट योगी आदित्यनाथ ने इस बार असम को मात देने का ठान लिया है। CAA /NRC के समय असम में अवैध प्रवासी,घुसपैठिए या परिचयविहीन विदेशी इत्यादि टैग लगाकर गिरफ्तारी,डिटेंशन कैंप में सिर्फ संदेह के आधार पर लोगों को बड़े पैमाने पर कैद करना,प्रताड़ित करना और यातनाएं देने से शुरू कर लोगों को आत्महत्याएं करने पर मजबूर करना,यह सब कुछ हुआ है ।अब योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश भी उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है।इसका सबूत है उत्तर प्रदेश शासन द्वारा राज्य के सारे कलेक्टरों को भेजा गया हालिया आदेश - जिसमें कहा गया है कि उन्हें अपने जिले में घुसपैठिए,अवैध प्रवासी और विदेशियों को चिन्हित करना  और उनके लिए राज्य के प्रत्येक जिले में अस्थाई डिटेंशन सेंटर तैयार करना होगा।जहां चिन्हित किए गए अवैध प्रवासी/ विदेशियों को भेजा जाएगा।जहां से उनको फिर केंद्र सरकार के निर्देशानुसार यथास्थान भेजा जाएगा।
फिलहाल यूपी के विभिन्न जिलों में जैसे कि बहराइच,वाराणसी,गाजियाबाद,मिर्जापुर,अलीगढ़ आदि जिलों में पुलिस डायन शिकार करने की तरह बांग्लादेशी या रोहिंग्या घुसपैठिया ढूंढने में लगी है।इस अभियान में यूपी पुलिस ,मुसलमानों का खासकर पश्चिम बंगाल से आए बांग्लाभाषी मुसलमानों का शिकार कर रही है।फिलहाल गोदी मीडिया के पास सिवाय उत्तर प्रदेश में बांग्लादेशी और रोहिंग्या को ढूंढने के और इस बिना पर नफ़रत और विभाजन पैदा करने के और कोई काम नहीं है। टी वी ऑन करते ही गोदी मीडिया का नफ़रती हैडलाइन सामने आ जाता है जैसे कि " योगी की चोट,घुसपैठियों में कोहराम" या  " बुलडोजर बाबा की दहशत,बांग्लादेशी घुसपैठियों पर कहर " आदि।इसी अंतहीन नफ़रत ने केरल में मजदूरी की तलाश में गए छत्तीसगढ़ के दलित समुदाय के मजदूर रामनारायण बघेल की जान ले ली।जिन्हें भगवा गिरोह ने पलक्कड़ जिले में बांग्लादेशी के संदेह में इतना पीटा की उनकी जान चली गई।पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि उन्होंने इतनी बेरहमी से किसी को मारते नहीं देखा,उनके जिस्म का हर हिस्सा टूटा हुआ था।और तो और केरल जैसे तथाकथित प्रगतिशील राज्य में जब भगवा गुंडे ,रामनारायण से भारतीय होने का प्रमाण मांगते हुए मार रहे थे तो वह बांग्ला में नहीं बल्कि हिंदी मिश्रित छत्तीसगढ़ी में बोल रहा था।फिर भी संघी गुंडों ने उन्हें मार डाला।ठीक इसी तरह महाराष्ट्र , ओडिशा सहित कई राज्यों में पश्चिम बंगाल के प्रवासी मजदूर जो कि मुसलमान थे  नफ़रत की आंधी में भगवा गिरोह द्वारा मार डाले गए हैं।

बिहार के बाद जिन 12 राज्यों में चुनाव आयोग ने SIR लागू किया है उनमें यूपी एक खास राज्य है जहां पूरे देश में सबसे ज्यादा वोटर है।SIR का असल मकसद फर्जी वोटरों को चिन्हित करना नहीं है बल्कि  प्रवासी मजदूरों/ नागरिकों   को चिन्हित कर,उनका मताधिकार और नागरिक अधिकार छीन कर देशनिकाला करने के लिए अविलंब डिटेंशन सेंटर में भेजना है,यह उत्तर प्रदेश शासन के क्रियाकलापों से एकदम स्पष्ट है।राज्य के मुख्यमंत्री ने इसके लिए कानून व्यवस्था की रक्षा,सांप्रदायिक सौहाद्र और सर्वोपरि" राष्ट्रीय सुरक्षा "की दुहाई दी है।अभी 12 राज्यों में SIR के जो नवीन आंकड़े आए हैं उनके अनुसार उत्तर प्रदेश में जहां कुल वोटर 15.4 करोड़  हैं।SIR की प्रक्रिया में पूरे देश में सबसे ज्यादा 2.89 करोड़ वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से कट गए हैं।
योगी आदित्यनाथ और उनके प्रशासनिक अधिकारियों को जरूर यह मालूम होगा कि रोहिंग्या शरणार्थियों को संयुक्त राष्ट्र संघ ने बहुत उत्पीड़ित समुदाय की सूची  में रखा है और इनकी रक्षा के लिए सभी देशों की सरकारों को विशेष कदम उठाने को कहा है।वैसे भी रोहिंग्या शरणार्थियों की संख्या हमारे देश में बहुत कम है,बांग्लादेश में ज्यादा है।जब तक शेख हसीना के नेतृत्व में आवामी लीग ,बांग्लादेश की सत्ता पर काबिज़ थी,तब तक फासिस्ट संघ परिवार को बांग्लादेशी  घुसपैठियों की चिंता नहीं थी।क्योंकि मोदी सरकार के साथ शेख हसीना सरकार के मधुर रिश्ते थे।लेकिन अब परिस्थितियां बदल गई हैं।हसीना के बांग्लादेश की सत्ता से बेदखल होना और भारत सरकार द्वारा उन्हें राजनयिक शरण देने के बाद से ही संघ परिवार और अंधभक्त,देश में व्याप्त सारी समस्याओं के लिए घुसपैठिए खासकर बांग्लादेशी या रोहिंग्या मुसलमानों को प्रचारित करते हैं।और उत्तर प्रदेश,छत्तीसगढ़,मध्यप्रदेश,ओडिशा,उत्तराखंड,राजस्थान,महाराष्ट्र,दिल्ली,बिहार,असम आदि डबल इंजन सरकारों के राज्यों में ये सारी कवायद इस्लामोफोबिया के तहत याने मुसलमानों के प्रति नफ़रत और उन्हें अलगाव में डालने के लिए है।उत्तर प्रदेश में राज्य सरकार के हालिया निर्देश के तहत 17 नगर निगमों से कहा गया है कि वहां सफाई कर्मचारियों के साथ मिलकर काम कर रहे बांग्लादेशी और रोहिंग्या लोगों को चिन्हित कर उनकी सूची पुलिस को सौंपना है।अभी योगी सरकार ने 25 दिसंबर को क्रिसमस की छुट्टी को ही खत्म कर दिया।

उत्तर प्रदेश  में जहां नफ़रत और विभाजन का ये तांडव चल रहा है वो राज्य सरकारी आंकड़ों के अनुसार मानव विकास सूचकांक में बहुत नीचे है।राज्य में बेरोजगारी और गरीबी चरम पर है।राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार राज्य में दलितों/ उत्पीड़ितों, महिलाओं और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार सबसे ज्यादा है।गरीबों, मेहनतकशों,अल्पसंख्यकों के आशियानों को बुलडोजर से तोड़ना,सवर्ण दबंगों की गुंडई को चरमोत्कर्ष पर पहुंचना और झूठे मुठभेड़ में  उत्पीड़ितों और अल्पसंख्यकों को मारकर राज्य को  अपराध मुक्त घोषित करना उत्तर प्रदेश सरकार की सर्वोत्तम उपलब्धि है।लेकिन ये सब प्रतिदिन बुलडोजर बाबा की चरण वंदना करने वाले कॉरपोरेट घरानों के टुकड़ों पर पलने वाले गोदी मीडिया के टुच्चे पत्रकारों को दिखता नहीं है।

असम में डिटेंशन सेंटर तैयार करने के पीछे राज्य सरकार का तर्क यह था कि यह उत्तर पूर्व में सीमा की सुरक्षा के लिए जरूरी है।लेकिन उत्तर प्रदेश की सीमा तो सिर्फ एक ही विदेशी देश नेपाल से लगी है।तो उत्तर प्रदेश शासन को किस देश से खतरा है ?वैसे तो नेपाल से  संबंध भारत सरकार के ठीक हैं और उत्तर प्रदेश में नेपाली नागरिकों को अभी तक भगवा गुंडे या राज्य सरकार परेशान भी नहीं कर रही है।तो उत्तर प्रदेश में बांग्लाभाषी मेहनतकश जनता के खिलाफ यह नफरती मुहिम क्यों?

वैसे तो सभी भाजपा शासित राज्यों में मुसलमानों और हालिया ईसाइयों के खिलाफ नफरती हिंसक मुहिम उनके हिंदुराष्ट्र परियोजना के लिए लाजिमी है।पिछले 23 दिसंबर को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आधी रात को हज यात्रा पूर्ण कर चुके मुस्लिम समाज के 120 वरिष्ठ नागरिकों जिनमें महिलाएं भी शामिल थी को रायपुर पुलिस ने घर से बलपूर्वक उठाया और अपमानजनक तरीके से दिन भर उनको हिरासत में रखकर पूछताछ की।जिसके खिलाफ रायपुर के मुस्लिम समाज ने विरोध प्रदर्शन भी किया।इसी तर्ज़ पर हर भाजपा शासित राज्यों में घुसपैठियों खासकर बांग्लाभाषीयों को ढूंढा जा रहा है,बेलगाम गिरफ्तारियां हो रही हैं और उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है।असल में SIR के नाम पर घुसपैठियों को कुचल देने का जो हिंसक मुहिम है उसका एक बड़ा मकसद बंगाल को फतह करना है।दुनिया के सबसे बड़े और सबसे पुराने फासीवादी संगठन  RSS के सरसंघ चालक मोहन भागवत ने इसी उद्देश्य से संघ के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष में सार्वजनिक गीता पाठ सहित बंगाल में कई सम्मेलन आयोजित किया ।उनके अनुसार  भारत में निवास कर रहा हर व्यक्ति हिन्दू है और हिंदुराष्ट्र की घोषणा करने की क्या जरूरत है।भारत एक हिंदुराष्ट्र है।हिटलर को परम पूज्य मानने वाले सर संघ चालक मोहन भागवत ने तो कहा है कि इस बार बंगाल में परिवर्तन होगा और हिंदुराष्ट्र की पक्षधर सरकार बनेगी ।इसीलिए संघ परिवार का राजनैतिक अंग भाजपा कमर कस के बांग्लाभाषी मेहनतकश जनता को निशाना बना रही है।इस मामले में भाजपा के मुख्यमंत्रियों में आपस में घोर प्रतिद्वंदिता है कि इस्लामोफोबिया के तहत कौन सबसे ज्यादा हिंसक मुहिम चला सकता है।प्रतियोगिता में  हेमंत विश्व शर्मा ,देवेंद्र  फडणवीस,पुष्कर धामी,भजन लाल शर्मा  हैं तो डॉक्टर मोहन यादव भी डटे हैं। विष्णुदेव साय खुद को  शुद्ध सनातनी साबित करने में लगे हैं तो रेखा गुप्ता को तो  हेट स्पीच में महारत हासिल है।और तो और योगी आदित्यनाथ तो हिन्दू हृदय सम्राट के रेस में  मोदीजी के ठीक पीछे  दौड़ रहे हैं। इसीलिए बंगाल चुनाव के बाद भी फासिस्ट संघ परिवार का प्रमुख हथियार नफ़रत,डर और विभाजन बेरोकटोक जारी रहेगा , उत्तर प्रदेश या अगले किसी राज्य के चुनाव के मद्देनजर।

27/12/2025

अरावली बचाओ! हिमालय बचाओ!

दिसंबर 27, 2025 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज                                                                        

अरावली बचाओ! हिमालय बचाओ! ग्रेट निकोबार बचाओ! हसदेव अरण्य बचाओ!

प्रकृति और हमारी जल-जंगल-ज़मीन को बचाने के लिए कोई प्लान-बी नहीं है. हमारे पास एक ही दुनियां है. दिल्ली की दमघोंटू हवा से लेकर छत्तीसगढ़ और ग्रेट निकोबार के उजड़ते जंगलों तक, और हिमालय में लगातार सामने आती आपदाओं तक— हम अपने भविष्य और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के खिलाफ़ मोदी सरकार की विनाशकारी नीतियों के गवाह हैं.

एक तरफ़ मोदी सरकार झूठ पर झूठ बोल रही है, और दूसरी तरफ़ उसके कारपोरेट मित्र —सरकार की तथाकथित ‘ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस’ नीति के पूरे संरक्षण में— हमारी साँसों की हवा, पीने का पानी, जंगल, पहाड़ और प्रकृति को बेरहमी से तबाह कर रहे हैं. जब पूरी दुनिया जलवायु संकट और उसके गरीब-कमज़ोर लोगों पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंतित है, तब यह सरकार बेशर्मी से पर्यावरण विनाश के रास्ते पर आगे बढ़ रही है.

अरावली

मोदी सरकार ने दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला, अरावली, की परिभाषा को मनमाने और छलपूर्ण तरीके से बदल दिया है ताकि इन्हें खनन के लिए खोल दिया जा सके. अब वे इस विनाश को ‘टिकाऊ खनन’ के नाम पर जनता को बेचने की कोशिश कर रहे हैं. इस नई परिभाषा के बाद अरावली का नब्बे फ़ीसदी से ज़्यादा हिस्सा खनन माफ़िया के ख़तरे में आ गया है.

24/12/2025

सकारात्मक और नकारात्मक सोच(Radhey shyam yadav)

दिसंबर 24, 2025 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज 
mr. radhey shyam yadav(bhagat singh vichar manch)
सकारात्मक और नकारात्मक सोच सही दिशा और विपरीत दिशा के तरफ हमें चलने के लिए प्रेरित करता है। अब हमारे विवेक के ऊपर निर्भर करता है कि हम किसे अपनाते हैं क्या सोचती हैं। देवी देवताओं के हाथ में हथियार को बुराइयों को नष्ट करने की दृष्टिकोण से भी देख सकते हैं। बुराइयों से सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी हम देख सकते हैं। इसे किस दृष्टिकोण से हम देखते हैं वह अपने नजरों एवं सोच के ऊपर निर्भर करता है। दूसरी बात, इतिहास बातें और विज्ञान हमारे विचार और एक खोज है कोई जरूरी नहीं कि वह हर समय में हर व्यक्ति के लिए उपयोगी ही साबित हो इसका विपरीत प्रभाव भी पड़ता है कारण की हमें अपनी क्षमता का सकारात्मक विस्तार देते हुए काल समय और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उसे पर अमल करना चाहिए कोई जरूरी नहीं उपरोक्त प्रयोग को हम अपने जीवन में पूरी तरह से उतार दें, क्योंकि वह उसे समय की बौद्धिक क्षमता वैज्ञानिक क्षमता के आधार पर काल, समय, परिस्थितियों के अनुरूप लिया गया निर्णय है तीसरी बात, हम किसी बौद्धिक क्षमता से ओत-प्रोत   व्यक्ति हो या राजनेता हो मानवीय मूल्यों के संरक्षण संविधान और कानून की उपयोगिता धर्म के प्रति आदर्श को लेकर बात करते हुए अपने विचार रखते हुए मैंने नहीं सुना ना तो समाज के अंदर सुनाई देता है जिसका दुष्परिणाम है कि हमारे देश की आबादी के लगभग  98% लोग अपनी नागरिकता के अधिकार और कर्तव्य से ही विमुख है। संविधान और कानून के विषय में अनभिज्ञ है। सामाजिक और राजनीतिक चिंतन की विषय में अनभिज्ञ है इसके लिए जिम्मेदार कहीं ना कहीं से हम आप हैं क्योंकि हम मात्रा चर्चा करते हैं  जाति और धर्म की क्षेत्रवाद, भाषा की अनियंत्रित महंगाई, भ्रष्टाचार, अन्याय अत्याचार, संविधान और कानून का दुरुपयोग अधिकारों का दुरुपयोग यह हमारा चर्चा का विषय नहीं होता आए हम इस विषय पर गंभीर चर्चा करें और राष्ट्रीय समाजवादी जन क्रांति पार्टी के प्रबल इस विचारधारा को आत्मसात करते हुए हम आगे बढ़ते हैं और एक मजबूत नागरिक के रूप में अपने को स्थापित करते हुए व्यक्ति समाज और देश का नव निर्माण करते हैं। हम हैं समता मूलक समाज के सजग प्रहरी गलत को गलत और सही को सही आधार पर मानवीय मूल्यों का संरक्षण करना हमारा नैतिक कर्तव्य है।

20/12/2025

क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच कसम

दिसंबर 20, 2025 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज 
क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच कसम

बांग्लादेश में प्रगतिशील सांस्कृतिक कर्मियों ,मीडिया और अल्पसंख्यकों पर किए जा रहे दमन की तीव्र निंदा की क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच ने *

एक वक्तव्य में 

बांग्लादेश में प्रगतिशील सांस्कृतिक कर्मियों ,मीडिया और अल्पसंख्यकों पर किए जा रहे दमन की तीव्र निंदा की क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच ने *

एक वक्तव्य में क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच कसम ने कहा कि हम गहरी चिंता के साथ यह देख रहे हैं कि हमारे पड़ोसी देश बांग्लादेश में 1961 से निरंतर सांस्कृतिक गतिविधियाँ संचालित करने वाली प्रतिष्ठित संस्था "छायानट" ,प्रगतिशील सांस्कृतिक दल "उडीची", समाचार पत्र" प्रथम आलो"और " डेली स्टार" पर हाल ही में युनुस प्रशासन के प्रशय से धार्मिक कट्टरपंथियों द्वारा किया गया बर्बर हमला अत्यंत निंदनीय और अभूतपूर्व है।

बांग्लादेश की तरह हमारे देश में भी संघी मनुवादी हिंदुत्ववादी फासीवादी ताकतों के बेलगाम हमलों के ज़रिये अन्य भाषा व संस्कृतियों की उपेक्षा कर जबरिया हिंदी हिन्दू हिन्दुस्तान के विचार को थोपकर,एक देश एक चुनाव,विपक्ष मुक्त भारत , इतिहास और संस्कृति का विकृतिकरण व सांप्रदायीकरण तथा नई शिक्षा नीति के जरिए शिक्षा का निजीकरण व भगवाकरण किया जा रहा है।भगवा फासिस्ट कॉरपोरेट गठबंधन द्वारा हमारी बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक विरासत पर आघात किया जा रहा है। साथ ही साथ अडानी अंबानी सरीखे महाभ्रष्ट कॉरपोरेट घराने और उनकी लठैत फासिस्ट संघ परिवार,केंद्र में और भाजपा शासित राज्यों में दमनकारी नीतियों के माध्यम से जनता को कुचलते हुए सांझी शहादत साझी विरासत वाली हमारी सांस्कृतिक सामाजिक परंपरा को नष्ट करने का प्रयास कर रही हैं।

इसी तरह पड़ोसी देश बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार की तानाशाही के खिलाफ जन आक्रोश का सहारा ले कर मोहम्मद युनुस के नेतृत्व में अमरीकी साम्राज्यवाद के दलाल सांप्रदायिक फासिस्ट ताकतों ने सत्ता पर कब्जा जमाया है। योजनाबद्ध रूप से बांग्लादेश को ,लोकतंत्र,मुक्ति युद्ध की विरासत और धर्मनिरपेक्षता के मूल्यों को खत्म कर कट्टर इस्लामिक देश बनाया जा रहा है।पिछले एक साल से कभी बाउल-फकीरों पर हिंसक हमले, ऑपरेशन डेविल हंट के तहत हजारों प्रगतिशील वामपंथी धर्मनिरपेक्ष कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारियाँ, हत्याएं,पीरों की मजारों को तोड़ना, मंदिरों, बुद्धविहार और गिरजाघरों पर हमले, और अब ‘छायानट’ जैसी प्रसिद्ध संस्था पर आक्रमण हुआ है-जो बाचिक परंपरा, नज़रुल संगीत और रवींद्र संगीत की व्यापक सांस्कृतिक धारा का प्रतिनिधित्व करती है—साम्प्रदायिक कट्टरपंथ की भयावहता को उजागर करता है।
छायानट संस्था 1970–71 से भी पहले से अपनी सांस्कृतिक गतिविधियाँ संचालित करती आ रही है और बांग्लादेश के मुक्ति युद्ध के दौरान इसकी ऐतिहासिक भूमिका रही हपूरी दुनिया में साम्राज्यवाद और उसके सहयोगी, विभिन्न देशों की ठोस परिस्थिति के अनुसार धार्मिक कट्टरपंथ को उभारकर नव फासीवादी जिन्न पैदा कर रहे हैं जो शासक कॉरपोरेट घरानों के एक प्रमुख हथियार के रूप में इस्तेमाल किए जा रहे हैं। एशिया , अफ्रीका और दक्षिण अमरीका सहित विश्व के अनेक क्षेत्रों में लोकतंत्र को वस्तुतः ध्वस्त किया जा रहा है। केवल विपक्षी राजनीतिक दल ही नहीं, बल्कि आम सांस्कृतिक संगठन भी फासीवादी दमन से अछूते नहीं हैं।बांग्लादेश जो कि दक्षिण पूर्व एशिया में साम्प्रदायिक कट्टरपंथी तानाशाही विरोधी "शाहबाग आंदोलन" जैसे वामपंथी प्रगतिशील,लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष आंदोलन और परंपराओं का गढ़ रहा है को साम्राज्यवादी पूंजीवादी ताकतें,भारत की तरह एक फासिस्ट साम्प्रदायिक बांग्लादेश बनाने पर तुली है ।

हम क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच की ओर से बांग्लादेश की जनता के साथ एकजुट होकर फासीवादी और कट्टरपंथी हमलों के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद करते हैं और बांग्लादेश में सांस्कृतिक कर्मियों,मीडिया,अल्पसंख्यकों,प्रगतिशील ताकतों और गरीब मेहनतकश जनता पर किए जा रहे साम्प्रदायिक दमन की कठोर भर्त्सना करते हैं।

तुहिन, असीम गिरि
(अखिल भारतीय संयोजक गण)
क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच RCF

 कसम ने कहा कि हम गहरी चिंता के साथ यह देख रहे हैं कि हमारे पड़ोसी देश बांग्लादेश में 1961 से निरंतर सांस्कृतिक गतिविधियाँ संचालित करने वाली प्रतिष्ठित संस्था "छायानट" ,प्रगतिशील सांस्कृतिक दल "उडीची", समाचार पत्र" प्रथम आलो"और " डेली स्टार" पर हाल ही में युनुस प्रशासन के प्रशय से धार्मिक कट्टरपंथियों द्वारा किया गया बर्बर हमला अत्यंत निंदनीय और अभूतपूर्व है।

बांग्लादेश की तरह हमारे देश में भी संघी मनुवादी हिंदुत्ववादी फासीवादी ताकतों के बेलगाम हमलों के ज़रिये अन्य भाषा व संस्कृतियों की उपेक्षा कर जबरिया हिंदी हिन्दू हिन्दुस्तान के विचार को थोपकर,एक देश एक चुनाव,विपक्ष मुक्त भारत , इतिहास और संस्कृति का विकृतिकरण व सांप्रदायीकरण तथा नई शिक्षा नीति के जरिए शिक्षा का निजीकरण व भगवाकरण किया जा रहा है।भगवा फासिस्ट कॉरपोरेट गठबंधन द्वारा हमारी बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक विरासत पर आघात किया जा रहा है। साथ ही साथ अडानी अंबानी सरीखे महाभ्रष्ट कॉरपोरेट घराने और उनकी लठैत फासिस्ट संघ परिवार,केंद्र में और भाजपा शासित राज्यों में दमनकारी नीतियों के माध्यम से जनता को कुचलते हुए सांझी शहादत साझी विरासत वाली हमारी सांस्कृतिक सामाजिक परंपरा को नष्ट करने का प्रयास कर रही हैं।

इसी तरह पड़ोसी देश बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार की तानाशाही के खिलाफ जन आक्रोश का सहारा ले कर मोहम्मद युनुस के नेतृत्व में अमरीकी साम्राज्यवाद के दलाल सांप्रदायिक फासिस्ट ताकतों ने सत्ता पर कब्जा जमाया है। योजनाबद्ध रूप से बांग्लादेश को ,लोकतंत्र,मुक्ति युद्ध की विरासत और धर्मनिरपेक्षता के मूल्यों को खत्म कर कट्टर इस्लामिक देश बनाया जा रहा है।पिछले एक साल से कभी बाउल-फकीरों पर हिंसक हमले, ऑपरेशन डेविल हंट के तहत हजारों प्रगतिशील वामपंथी धर्मनिरपेक्ष कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारियाँ, हत्याएं,पीरों की मजारों को तोड़ना, मंदिरों, बुद्धविहार और गिरजाघरों पर हमले, और अब ‘छायानट’ जैसी प्रसिद्ध संस्था पर आक्रमण हुआ है-जो बाचिक परंपरा, नज़रुल संगीत और रवींद्र संगीत की व्यापक सांस्कृतिक धारा का प्रतिनिधित्व करती है—साम्प्रदायिक कट्टरपंथ की भयावहता को उजागर करता है।
छायानट संस्था 1970–71 से भी पहले से अपनी सांस्कृतिक गतिविधियाँ संचालित करती आ रही है और बांग्लादेश के मुक्ति युद्ध के दौरान इसकी ऐतिहासिक भूमिका रही हपूरी दुनिया में साम्राज्यवाद और उसके सहयोगी, विभिन्न देशों की ठोस परिस्थिति के अनुसार धार्मिक कट्टरपंथ को उभारकर नव फासीवादी जिन्न पैदा कर रहे हैं जो शासक कॉरपोरेट घरानों के एक प्रमुख हथियार के रूप में इस्तेमाल किए जा रहे हैं। एशिया , अफ्रीका और दक्षिण अमरीका सहित विश्व के अनेक क्षेत्रों में लोकतंत्र को वस्तुतः ध्वस्त किया जा रहा है। केवल विपक्षी राजनीतिक दल ही नहीं, बल्कि आम सांस्कृतिक संगठन भी फासीवादी दमन से अछूते नहीं हैं।बांग्लादेश जो कि दक्षिण पूर्व एशिया में साम्प्रदायिक कट्टरपंथी तानाशाही विरोधी "शाहबाग आंदोलन" जैसे वामपंथी प्रगतिशील,लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष आंदोलन और परंपराओं का गढ़ रहा है को साम्राज्यवादी पूंजीवादी ताकतें,भारत की तरह एक फासिस्ट साम्प्रदायिक बांग्लादेश बनाने पर तुली है ।

हम क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच की ओर से बांग्लादेश की जनता के साथ एकजुट होकर फासीवादी और कट्टरपंथी हमलों के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद करते हैं और बांग्लादेश में सांस्कृतिक कर्मियों,मीडिया,अल्पसंख्यकों,प्रगतिशील ताकतों और गरीब मेहनतकश जनता पर किए जा रहे साम्प्रदायिक दमन की कठोर भर्त्सना करते हैं।

तुहिन, असीम गिरि
(अखिल भारतीय संयोजक गण)
क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच RCF

15/12/2025

इंडियन बाबा की प्रॉपर्टी (पुराना रिकॉर्ड)

दिसंबर 15, 2025 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज 
                                                                     पुराने अख़बार की कटिंग से                                                                 वर्तमान समय में बाबा की संपत्ति कानूनी संपत्ति से अधिक है।

प्रोफेसर हृषिकेश भट्टाचार्य द्वारा रचित 'नित्य निठुर द्वन्द्व

दिसंबर 15, 2025 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज         
प्रोफेसर हृषिकेश भट्टाचार्य 

                                                              प्रोफेसर हृषिकेश भट्टाचार्य द्वारा रचित 'नित्य निठुर द्वन्द्व' (भाग-1)'युगसंचार' के पृष्ठ- 66 से यहां उद्धृत —

परन्तु क्या आपके पुत्रों में से कोई सहमत होगा?'

'क्यों नहीं मानेंगे गुरुदेव? कोई पुत्र अपने पिता के प्राण बचाने के लिए आगे क्यों नहीं आएगा?' ययाति यह जानकर प्रसन्न हुए कि बचने का उपाय है।

'परन्तु याद रखना ययाति,' शुक्राचार्य ने कहा, 'जो रक्तदान करता है, वह धीरे-धीरे दुर्बल होता जाएगा। यदि वह रक्तदान करना बंद भी कर दे, तो भी उसे स्वस्थ होने में कम से कम छह महीने लगेंगे। यह जानकर, यदि आपका कोई पुत्र आपको अपनी युवावस्था देना चाहे, तो वह सर्वत्र महान माना जाएगा। मेरे आशीर्वाद से वह राजा और महाराणा बनेगा।'
ययाति का हृदय हर्ष और कृतज्ञता से भर गया। शाप के बदले उसे वरदान मिला। शुक्राचार्य ने उसे अवश्य क्षमा कर दिया होगा। शुक्राचार्य ने खड़े होकर उसे आशीर्वाद देते हुए कहा, 'यदि तुम्हारा कोई पुत्र सहमत हो, तो राजवैद्य को मेरे पास भेजो। मैं उसे रक्त-त्याग और आधान की विधि सिखा दूँगा। फिर भी, तुम्हें बहुत सावधान रहना होगा, यदि किसी पुत्र का रक्त लेते समय तुम्हें कोई शारीरिक कष्ट हो, तो उसे तुरंत बंद कर देना। तुम्हें यह समझ लेना चाहिए कि तुम्हारे रक्त का उस पुत्र के रक्त से कोई संबंध नहीं है।'
ययाति शुक्र की प्रत्येक बात को ध्यान से समझते हुए वहाँ से चले गए। वह देवयानी को अपने साथ ले जाना चाहते थे। परन्तु वह उन्हें कहीं नहीं मिली। जब वे आश्रम के बाहर आए, तो उन्हें देवयानी का रथ भी दिखाई नहीं दिया। उन्होंने समझ लिया कि देवयानी पहले ही जा चुकी है। ययाति का मन अब लगभग मृत्यु के द्वार से लौटकर काफी प्रसन्न था। वह पुरानी बातें भूलकर देवयानी को क्षमा कर देना चाहते थे, परन्तु ऐसा नहीं हुआ। थोड़े आहत मन से ययाति रथ पर सवार हो गए। उन्होंने समझ लिया कि देवयानी को पुराने घावों को भरने में कोई रुचि नहीं है।
महल पहुँचकर ययाति ने यदु और तुर्वसु को अपने महल में बुलाया। थोड़ी देर बाद वे दोनों ययाति के कक्ष में आए, उनके पीछे देवयानी भी आई। देवयानी को देखकर ययाति को आश्चर्य हुआ। देवयानी यहाँ कभी नहीं आती, और उन्होंने उसे पुकारा भी नहीं। पुत्रों ने प्रणाम किया और खड़े हो गए। देवयानी आगे नहीं आई, बल्कि दूर खड़ी रही। ययाति ने उसकी ओर देखा। देवयानी के चेहरे, आँखों और मुद्रा में कैसी कठोरता प्रकट हो रही थी। ऐसा लग रहा था कि युद्ध अवश्यंभावी है। देवयानी ने अपने पुत्रों को सब कुछ बता दिया होगा। क्या शुक्राचार्य की आशंकाएँ सत्य होंगी? उनका मन दुःख से भर गया और फिर आशा से वे पुनः डगमगा उठे। नहीं, ऐसा नहीं हो सकता। यदु और तुर्वसु उनकी अपनी आत्माएँ हैं, वे अपने मरते हुए पिता के अनुरोध को अवश्य ही टाल नहीं सकेंगे। आशा और भय के बीच खड़े होकर उन्होंने दोनों पुत्रों को पास बुलाया।

'मुझे लगता है कि तुमने अपनी माँ से सब कुछ सुन लिया है। मृत्यु मेरे सिर पर आ खड़ी हुई है। अब तुम ही हो जो इसे रोक सकते हो। मैं तुमसे कुछ समय की भीख माँग रहा हूँ। प्रकृति के स्वाभाविक क्रम में एक दिन मेरी मृत्यु अवश्य होगी।' लेकिन मैं अकाल मृत्यु नहीं चाहता, मुझे अभी बहुत काम करना है। अगर मैं अपनी पूजा-अर्चना नहीं कर पाया, तो मृत्यु के बाद भी मुझे शांति नहीं मिलेगी।
(नियमित रूप से पढ़ते रहें)

आप गुलाम होने वाले है

दिसंबर 15, 2025 0

सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज मोदी मीडिया अब बिहार मे उन जगहो को चून रही है जहाँ भाजपा का बहुल्य है और जगह जगह सो कर के पूरे देश को बताना चाह रही है की जो बिहार मे चुनाव हुआ है वह सब सही है राहुल गान्धी अखलेश तेजस्वी जो कह रहे है वह गलत है
हम देश के लोगों से पूछता हूँ
जब चुनाव आयोग बताता है की 7 42 ०० ०० ० कुल मतदाता है
मतदान हो गया 7 4 5 o 00 0 0 हुआ
अब आप बतायें यह 300000 मतदाता कहा से आगये
अब आप बतायें जब कुल 65% मतदान हुआ है तब 35% कहा चले गये 
अब आप बताएं कुल मतदाता मे से 35%
अर्थात लगभग दो करोड जनता बोट देने नही गयी फीर भी उसका वोट EVM बताता है वोट पड़गया इसके अलावा 3 लाख वोट और बड गये आप बतायें यह कैसे होगया यह कौन सा मोदी मैजिक है -
अब आप सचेत हो नही तो आप गुलाम होने वाले है जादा बोलो गे तो जेल जाऔ गे - अब चूप रहो नही तो मोदी का मैजिक आ जायेगा - नेता डर रहा है नेता मे दम नही है विरोध करने का
क्या होगा देश का - - -
डा राधे श्याम यादव समाज वैज्ञानिक वाराणसी

03/08/2025

अगस्त 03, 2025 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यू**

ब्रह्मण व ब्रह्मणबाद के पांच खुंटे पुरखो ने तो हिला दिया है और बहुजन उखाड़ने में लगे हैं*
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आप लोग भी पढ़िए क्या हैं हिंदू धर्म के 5 खूंटे जिनसे ब्राह्मणों ने सभी sc, st & obc को बांध रखा है

*(1) पहला खूॅटा:- ब्राह्मण:-*
हिन्दू धर्म में ब्राह्मण जन्मजात श्रेष्ठ है चाहे चरित्र से वह कितना भी खराब क्यों न हो, हिन्दू धर्म में उसके बिना कोई भी मांगलिक कार्य हो ही नहीं सकता। किसी का विवाह करना हो तो दिन या तारीख बताएगा ब्राह्मण, किसी को नया घर बनाना हो तो भूमिपूजन करायेगा ब्राह्मण, किसी के घर बच्चा पैदा हो तो नाम- राशि बतायेगा ब्राह्मण, किसी की मृत्यु हो जाय तो क्रियाकर्म करायेगा ब्राह्मण, भोज खायेगा ब्राह्मण, बिना ब्राह्मण से पूछे हिन्दू हिलने की स्थिति में नहीं है। इतनी कड़ी मानसिक गुलामी में जी रहे हिन्दू से विवेक की कोई बात करने पर वह सुनने को भी तैयार नहीं होता।
OBC/SC/ST के आरक्षण का विरोध करता है ब्राह्मण, OBC/SC/ST की शिक्षा, रोजगार, सम्मान का विरोध करता है ब्राह्मण!! इतना होने के बावजूद भी वह OBC/SC/ST का प्रिय और अनिवार्य बना हुआ है। क्यों? घोर आश्चर्य!! या ये कहें कि दुनिया का आठवां अजूबा!! जो हिन्दू ब्राह्मण रूपी खूॅटा से बॅधा हुआ है।

*(2) दूसरा खूॅटा: ब्राह्मण शास्त्र:-*
यह जहरीले साॅप की तरह हिन्दू समाज के लिए जानलेवा है। मनुस्मृति जहरीली पुस्तक है। वेद, पुराण, रामायण आदि में भेद-भाव, ऊॅच-नीच, छूत-अछूत का वर्णन किया गया है। मनुष्य का जन्म:-
ब्रह्मा के मुख से ब्राह्मण, भुजा से क्षत्रिय, जंघा से वैश्य, पैर से शूद्र की उत्पत्ति बताकर शोषण-दमन की व्यवस्था शास्त्रों में की गयी है, हिन्दू-शास्त्रों मे स्त्री को गिरवी रखा जा सकता है, बेचा जा सकता है, उधार भी दिया जा सकता है। हिन्दू समाज इन शास्त्रों से संचालित होता रहा है।

*(3) तीसरा खूॅटा: हिन्दू धर्म के पर्व/त्योहार:-*
हिन्दू धर्म के पर्व/त्योंहार आर्यों द्वारा इस देश के SC/ST/OBC (मूलनिवासियों) की गयी निर्मम हत्या पर मनाया गया जश्न है। आर्यों ने जब भी और जहाॅ भी मूलनिवासियों पर विजय हासिल की, विजय की खुशी में यज्ञ किया, यही पर्व कहा गया, पर्व ब्राह्मणों की विजय और त्योहार मूलनिवासियों के हार की पहचान है। त्योहार का मतलब होता है, तुम्हारी हार यानी मूलनिवासियों की हार।
इस देश के मूलवासी अनभिज्ञता की वजह से पर्व-त्योहार मनाते हैं। न तो किसी को अपने इतिहास का ज्ञान है और न ही अपमान का बोध। सबके सब ब्राह्मणवाद के खूॅटे से बॅधे हैं। अपना मान-सम्मान और इतिहास सब कुछ खो दिया है। अपने ही अपमान और विनाश का उत्सव मनाते हैं और शत्रुओं को सम्मान और धन देते हैं। यह चिन्तन का विषय है।
होली- होलिका की हत्या और बलात्कार का त्योहार दशहरा- दीपावली- रावण वध का त्योहार।
नवरात्र- महिषासुर वध का त्योहार।
किसी धर्म में त्योहार पर शराब पीना और जुआ खेलना वर्जित है। पर हिन्दू धर्म में होली में शराब और दीपावली पर जुआ खेलना धर्म है। हिन्दू समाज इस खूॅटे से पुरी तरह बॅधा हुआ है।

*(4) चौथा खूॅटा- देवी देवता:-*
हिन्दू धर्म में तैंतीस करोड़ देवी-देवता बताये गये हैं। पाप-पुण्य, जन्म-मरण, स्वर्ग-नरक, पुनर्जन्म, अगले जन्म का भय बताकर काल्पनिक देवी-देवताओं की पूजा-आराधना का विधान किया गया है। मन्दिर-मूर्ति, पूजा, दान-दक्षिणा देना अनिवार्य बताया गया है। हिन्दू समाज इस खूॅटे से बॅधा हुआ है और चमत्कार, पाखण्ड, अंधविश्वास, अंधश्रद्धा से जकड़ा हुआ है।

*(5) पाॅचवां खूॅटा : तीर्थस्थान:-*

ब्राह्मणों ने देश के चारों ओर तीर्थस्थान के हजारों खूॅटे गाड़ रखे हैं। इन तीर्थस्थानों के खूॅटे से टकराकर मरना पुण्य और स्वर्ग प्राप्ति का सोपान बताया गया है। इस धारणा पर भरोसा कर सभी ब्राह्मणों के मानसिक गुलाम OBC/SC/ST के लोग बिना बुलाये तीर्थस्थानों पर पहुँच जाते है जहाँ इनका तीर्थ स्थलों के मालिक (ब्राह्मण) आस्था की आड़ में हर प्रकार का शोषण करते हैं।

    *समाधान*:- ब्राह्मणवाद के इन खूॅटो को उखाड़ने के लिए समस्त शूद्र(OBC/SC/ST) की जातियों को एकजुट होकर चिन्तन-मनन और विचार-विमर्श करना होगा। किसी भी मांगलिक कार्य में ब्राह्मण को न बुलाने से, ब्राह्मण शास्त्रों को न पढ़ने से, न मानने से, हिन्दू (ब्राह्मण) त्योहारों को न मनाने से, काल्पनिक हिन्दू देवी-देवताओं को न मानने, न पूजने से, तीर्थस्थानों में न जाने, दान-दक्षिणा न देने से ब्राह्मणवाद के सभी खूॅटे उखड़ सकते हैं।

ब्राह्मणवाद से समाज मुक्त हो सकता है और मानववाद विकसित हो सकता है। इस पर OBC/SC/ST समाज की सभी जातियों को चिन्तन-मनन करने की आवश्यकता है। तो आइए विदेशी आर्य ब्राह्मणों को दान, मान और मतदान न देकर ब्राह्मणवाद से मुक्ति और मानववाद को विकसित करने का सकल्प लें।

*एक बार अपने दिमाग से, शांत बैठकर जरूर सोचें। पोस्ट पसंद आये तो ज्यादा से ज्यादा शेयर जरूर करें।* 

*मानववादी साहित्य एवं सत्यम पुस्तक केन्द्र के विक्रेता स्वर्गीय नारदमुनि लोहार जी गया बिहार आप सभी को*. Radheyshyam azad from varanasi 

 

22/05/2025

मई 22, 2025 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज.  *महत्वपूर्ण संदेश*




प्रिय यादव बंधुओं,

जय श्री कृष्णा

भारत सरकार ने एनपीआर (राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर) शुरू करने की घोषणा की है, जिसमें भारतीय नागरिकों की जानकारी इकट्ठा की जाएगी। इस अवसर पर, हमें अपनी जाति के कॉलम में "अहीर (यादव)" ही लिखना है।

*निवेदन:*

- सभी यादव बंधुओं से अनुरोध है कि वे एनपीआर में अपनी जाति के कॉलम में सिर्फ "अहीर (यादव)" लिखें।
- यदुवंशी, नंदवंशी, ग्वालवंशी, या कोई उपनाम आदि न लिखें, सिर्फ अहीर (यादव) लिखें।
- इस संदेश को सभी यादव बंधुओं तक पहुंचाना हमारी सामाजिक जिम्मेदारी है।

*उद्देश्य:*

इस पहल का उद्देश्य अपने यादव समाज के जनसंख्या के आंकड़े सरकार तक पहुंचाना है, ताकि देश में यादवों की संख्या का पता चल सके। 

*आग्रह:*

इस संदेश को सभी यादव बंधुओं तक पहुंचाने में सहयोग करें और अपनी जिम्मेदारी निभाएं। आइए, हम सभी मिलकर अपने समाज के हित में काम करें। 
 यह जिम्मेदारी हमारी अपनी है हमारी आने वाली पीढ़ी को इसका लाभ अवश्य मिलेगा 
जय माधव जय यादव
अखिल भारतवर्षीय यादव महासभा 🙏🙏🙏🙏🙏
मई 22, 2025 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज. 

 जो सरकार निकमी है
वह सरकार बदलनी है
साथियो
जरासा सोचों - निजि करण क्या है सरकारी व्यवस्था सही कार्य नही कर पाती है तो उसे व्यापारिक लाभ के लिए जनता का शोषण करने के लिए शोषण कर्त्ता को दे दिया जाता है यह शोषण करता हमारे व्यापारी उद्योग पति है जो जनता का शोषण करते है अपने लाभ के लिए 
आज जो सरकार है वह सभी सरकारी व्यवस्था को निजि व्यापारियों को दे कर जनता का शोषण करती है
सावधान हो जाओ
आज सुरक्षा व्यवस्था भी निजि व्यापारियों को दिया जा रहा है
सरकार भी निजि करण की तरफ चल रही है बड़े बड़े व्यापारी अपने पैसे के बल पर बडी बडी पार्टी चला रहे है और सरकार बना कर जनता का शोषण कर रहे हैं अब आप सोचों देश का विकाश कैसे हो जनता का शोषण बन्द हो -
सरकार जो भी टैक्स लगती है वह सब जनता कोही देना पड़ता है व्यापारी पर जो GST लगती है वह सब व्यापारी जनता से लेती है और कुछ सरकार को देती है कुछ अपने पास रख लेती है इस सभी कारणों का कारण
सरकार की निकमापन है 
जो सरकार निकम्मी है
वह सरकार बदलनीहै -
आप सोचों
निजि करण क्या है जय श्री राधे राधे
डा राधे श्याम यादव समाज वैज्ञानिक वाराणसी

19/01/2025

जनमंच 2025 की ओर से सभी को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।

जनवरी 19, 2025 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज.        *नववर्ष मुबारक! नयी तैयारियों व नयीं उम्मीदों, नयी एकता, व नये संघर्षों के साथ!*

सरीफ द्वारा लिखित लेख 


शासकवर्ग द्वारा के बढ़ते हमलों (महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार…) नफरती आँधियों, लड़खड़ाती आर्थिक स्थिति, व मुँहबायी महामारी के ख़तरों की घड़ी में भी छोटी-छोटी उम्मीद और उपलब्धियों को सहेजते हुए एक बेहतर भविष्य के लिए लगातार संघर्ष में लगे रहने के साथ आप सभी आभासी दुनिया के मित्रोँ आपको और आपके परिवार वालों को नववर्ष की हार्दिक बधाई! आज इस साल का पहला दिन है, आगे क्या चुनौतियां होंगी उन्हें देखा जायेगा, मगर पिछले साल आपके खिलाफ मंहगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, सूदखोरी, जमाखोरी, कालाबाजारी… के रूप में कितने हमले हुए और लगातार ये हमले जारी हैं, कैसे आपने झेला, कितनी दुश्वारियां/परेशानियां हों रहीं हैं, उनको जरूर याद रखियेगा। ये अनुभव काम आयेंगे। अब नये वर्ष पर एक बेहतर दुनिया बनाने के लिए आप खुद से वादा करिये। 

इस नये वर्ष में हम कुछ नया होने की कोशिश करें, वर्गीय पक्षधरता और उच्च मानवीय उसूलों के प्रति प्रतिबद्धता की अभिव्यक्ति के लिए लोगों के अन्दर वर्गीय चेतना के साथ अपने आस-पास के लोगों के सुख-दुख में साझीदार बनें, स्वार्थ से अगर थोड़ा ऊपर उठ सकें, लोगों को सीढ़ी की तरह इस्तेमाल कर फेंकना बन्द कर दें, मजहब, नस्ल, भाषा, रंग, लिंग, जाति, धर्म, स्वार्थ और अमीर-गरीब की बुनियाद पर रिश्ते बनाने के बजाय इंसानी बुनियादों पर बनाएं, अपने से कमजोर का शोषण बन्द करें, हर तरह के अन्याय, शोषण, उत्पीड़न और दमन के खिलाफ संघर्ष कर आवाज उठाए। नए वर्ष में स्वंय से प्रण लेकर तय करें कि खुद को उस नफरत से पाक करेंगे और मानव द्वारा मानव के शोषण के विचार को पनपने नहीं देंगे जो शासक वर्ग ने अपने हितों के लिए हमारे दिलों में बोया है और ऐसे समाजवादी समाज का निर्माण करें जहां मानव द्वारा मानव का शोषण, व एक देश द्वारा दूसरे देश का शोषण ना हो, जंहा मानव द्वारा निर्मित समाज की कोई सीमा ना हो, जंहा रंग, लिंग, भाषा, छेत्र, जाति, धर्म… का भेद ना हो, जहां किसी भी तरह के ऊंच-नीच का भेद ना हो, जहां कोई धार्मिक द्वेष ना हो। जंहा धर्म, भोजन व जीवनसाथी चुनने की आजादी हो, जंहा अमीरी-गरीबी की खाई ना हो, जंहा प्रत्येक नागरिक को सस्ती अथवा मुफ्त गुणवत्तापरक शिक्षा, चिकित्सा, भोजन और हर एक व्यक्ति के पास रोजगार उपलब्ध हों यानी उसकी योग्यतानुसार काम और काम के अनुसार दाम आसानी से सुलभ हो। 

इस वर्गीये और निजी सम्पति के समाज में झूठ, लूट, फरेब, सूदखोरी, मक्कारी, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, महंगाई, कालाबाजारी, जमाखोरी जैसी ढेर सारी अनेक समस्याएं सब वैसे के वैसे ही होते हैं, मुहब्बत, परस्पर सहयोग, और लूट की दुनिया से धर्मान्धिता, जलन, नफरत, अपने से कमजोर वाले का शोषण से जीने लायक कुछ हासिल करने की कोशिशें भी वही रहती हैं कि सब कुछ हमारा हो जाए! जितना है उतना कम है। थोड़ा और थोड़ा और… के निजी सम्पति के चाहत में ये सारी समस्याएं जन्म लेती हैं। इन समस्याओं के खात्मे के लिये नये वर्ष में संकल्प के साथ नव वर्ष मुबारक! 

शासकवर्ग द्वारा लगातार बढ़ते हुवे हमले से सबक लेते हुए शासक वर्ग के खिलाफ संघर्ष में लगे रहने की जिद के साथ! नया साल समाज में हर तरह के अन्याय, शोषण, उत्पीड़न और दमन के ख़िलाफ़ संघर्ष को अधिक तीखा और तेज करने करने के साथ! समाजीकरण के सपने को जन-जन तक पहुँचाने के साथ! वैज्ञानिक सोच, वर्गीय पक्षधरता और उच्च मानवीय उसूलों के प्रति प्रतिबद्धता की अभिव्यक्ति के लिए लगातार ख़तरों का सामना करते रहने के साथ, पुरानी भूलों, कमजोरियों और कमियों से लगातार सबक लेते हुए अगर आप ऐसा कुछ भी, थोड़ा भी करने का इरादा रखते हैं तो निश्चित ही यह वर्ष आपके लिये और आपके आने वाली पीढ़ियों के लिये सुख/समृधि लेकर आयेगा। इसी उम्मीद के साथ आईये हम सब मिलकर हमारी इस दुनिया को थोड़ा खूबसूरत बनाते हैं।

इस नव वर्ष पर इस हठी संकल्प के साथ पूंजीवादी व्यवस्था के ख़िलाफ़ हमें लम्बा और कठिन संघर्ष जारी रखना होगा। हमें मिलकर लड़ना होगा, इतिहास का कर्ज उतारने के लिए और भविष्य के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए। हम लड़ेंगे ताकि आने वाली पीढ़ियांँ सिर उठाकर जी सकें और उन्हें यह शर्मिन्दगी न झेलनी पड़ेंगी कि हमने कुछ नहीं किया। 

जनमंच समूह की तरफ से पुनः आप सभी आभासी दुनिया के साथियों को नववर्ष की हार्दिक कामनाएं इस उम्मीद के साथ भगत सिंह के सपनों को एक साथ मिलकर पूरा करेंगे।

*जनमंच*

12/01/2025

भारत अपनी चुनाव प्रणाली में लोकतंत्र से दूर हो जाएगा

जनवरी 12, 2025 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज.        ' *एक* *राष्ट्र* *एक* *चुनाव* ': *फासीवादी* *एकात्मक* *शासन* *की* *ओर* *निरंकुश* *कदम* सीपीआई (एमएल) रेड स्टार

 
एक साथ चुनाव कराने के मुद्दे की जांच के लिए सितंबर 2023 में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति (एचएलसी) ने 14 मार्च 2024 को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। मोदी कैबिनेट ने 12 दिसंबर 2024 को एचएलसी के सुझावों को मंजूरी दे दी। सरकार ने संसद के चालू शीतकालीन सत्र में लोकसभा और विधानसभाओं के एक साथ चुनाव के लिए मसौदा कानून पेश करने का फैसला किया है। चूंकि स्थानीय निकायों के एक साथ चुनाव के लिए राज्य विधानसभाओं के अनुमोदन के लिए एक अलग संवैधानिक संशोधन की आवश्यकता है, इसलिए इसे अलग से लिया जाएगा।
 
1950 में भारत को एक गणतंत्र के रूप में औपचारिक रूप से अपनाने के बाद, 1952, 1957, 1962 और 1967 के दौरान लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ हुए। हालाँकि, कई मौकों पर लोकसभा और विधानसभाओं के समय से पहले भंग होने के कारण, उनके चुनाव अलग-अलग समय पर शुरू हुए। तब से इस ठोस हकीकत को समझते हुए राजनीतिक मुख्यधारा में लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने पर कोई गंभीर चर्चा नहीं हुई है। और शासक वर्ग की राजनीति के चौतरफा क्षय और पतन के बावजूद, 1960 के दशक के बाद की अवधि में कई क्षेत्रीय और राज्य-स्तरीय पार्टियों का उदय हुआ, जो अक्सर क्षेत्रीय और राज्य-स्तर दोनों पर राज्यों के विशिष्ट मुद्दों की आकांक्षा रखते थे।
 
हालाँकि, आपातकाल के बाद की नवउदारवादी स्थिति में आरएसएस और उसके कई सहयोगियों के तेजी से विकास की शुरुआत राम जन्मभूमि आंदोलन से हुई, जिसकी परिणति 1992 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस के रूप में हुई, जिसने देश में राजनीतिक आख्यान को बदल दिया। आरएसएस के अखिल भारतीय बहुसंख्यकवादी एकरूपीकरण अभियान को अपने राजनैतिक उपकरण भाजपा के साथ, बाजपेयी शासन के उत्थान के साथ बढ़ावा मिला। इसकी सबसे प्रतिगामी नवउदारवादी अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था, पहले वैट और फिर जीएसटी की शुरुआत, जिसने कराधान पर राज्यों के संघीय अधिकारों को छीन लिया, ने इस एकात्मक कदम के लिए आर्थिक आधार तैयार किया। इससे अभिन्न रूप से जुड़ा हुआ और एक साथ चुनाव के सबसे प्रबल समर्थक रहे आडवाणी जैसे नेताओं की कड़ी मेहनत से समर्थित, वाजपेयी शासन के तहत विधि आयोग, एकात्मक एजेंडे को दृढ़ता से आत्मसात करते हुए,1999 में ही लोकसभा और विधानसभा में एक साथ चुनाव के अपने प्रस्ताव के साथ आगे आया था। 
 
2014 में मोदी सरकार के आने के साथ, एक साथ चुनाव के विचार को एक प्रबल समर्थन मिला जब नीति आयोग, जिसने अगस्त 2014 में छह दशक से अधिक पुराने योजना आयोग की जगह ले ली। इसके लिए, 2017 में मोदी की अध्यक्षता में नीति आयोग ने एक वर्किंग पेपर प्रकाशित किया।जिसमें एक तरफा एक साथ चुनाव के कई लाभों पर प्रकाश डाला गया है जैसे कि चुनाव खर्च में कमी, मतदाता मतदान में वृद्धि, बेहतर प्रशासन, सार्वजनिक जीवन में व्यवधान कम होना, चुनाव की कम आवृत्ति और संबंधित लागत, आदि। इस पेपर ने चालाकी से हानिकारक परिणामों पर चुप्पी साध ली, जैसे कि केंद्र में सत्तारूढ़ दल के फायदे, संघवाद को कमजोर करना और उपमहाद्वीपीय भारत की विविधता को खतरा, आदि।
 
एक साथ चुनावों के लिए संघीय-विरोधी शोर को मोदी.2 के बाद से और अधिक बढ़ावा मिला है, और स्पष्ट रूप से, हालांकि भाजपा के पास मोदी.3 के तहत संसद में बहुमत का आंकड़ा नहीं है, अखिल भारतीय एकात्मक अभियान बिना किसी रुकावट के तेज हो रहा है। सितंबर 2023 में कोविन्द समिति की नियुक्ति, मार्च 2024 में रिपोर्ट प्रस्तुत करना, दिसंबर 2024 में कैबिनेट की मंजूरी और संसद के शीतकालीन सत्र में इसकी शुरूआत, ये सब आरएसएस के उग्र हिंदूराष्ट्र आक्रमण से अविभाज्य रूप से जुड़े हैं . यदि इसका विरोध नहीं किया गया और इसे पराजित नहीं किया गया, तो यह देश और इसकी उपमहाद्वीपीय अनुपात की कई विविधताओं के लिए विनाशकारी होगा। और, 'एक राष्ट्र एक चुनाव' एजेंडा राष्ट्रीय मुद्दों की आड़ में राज्य के मुद्दों को खत्म कर देगा।
 
इस समय लोकसभा और विधानसभाओं के एक साथ चुनाव, विभिन्न भाषाई और जातीय समुदायों के सामने आने वाले विशिष्ट मुद्दों को दरकिनार करके और उन पर हावी होकर, अखिल भारतीय पार्टियों, विशेष रूप से केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी को लाभ पहुंचाएंगे, और राज्य-स्तरीय राजनीतिक ताकतों की प्रासंगिकता और प्रभाव को कम कर देंगे। यदि इसे लागू किया गया तो यह भारतीय राज्य के संघीय ढांचे के लिए हानिकारक होगा। दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश भारत में चुनावों में ईवीएम की उपलब्धता से जुड़े तार्किक मुद्दों पर अभी चर्चा होनी बाकी है। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, एक साथ चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग को ईवीएम की संख्या दोगुनी से ज्यादा करनी होगी, जिसके सफल होने पर कम से कम तीन साल का समय लगेगा। चूँकि EVM के भारतीय निर्माताओं के पास उत्पादन बढ़ाने के बाद भी मशीनों के उत्पादन को दोगुना करने की क्षमता नहीं है, विदेशी कंपनियाँ इस अंतर को भरने के लिए प्रवेश कर सकती हैं, विशेष रूप से चिप्स और अन्य महत्वपूर्ण सामग्रियों की खरीद के संबंध में, जिसके जरिए चुनाव कराने में अप्रत्याशित परिणाम हो सकते हैं।
 
सटीक रूप से, मुख्य मुद्दे पर आते हुए, 'एक राष्ट्र एक चुनाव' का विचार एक भाषा, एक संस्कृति, एक पुलिस इत्यादि जैसे समान कदमों के अनुरूप एकात्मक और संघवाद-विरोधी एजेंडे को देश पर जबरन थोपना है। यह बहुभाषी, बहु-सांस्कृतिक, बहु-जातीय और संघीय भारत के खिलाफ एक क्रूर, फासीवादी अभियान है। हम सभी लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष और फासीवाद-विरोधी ताकतों और तमाम जनता से अपील करते हैं कि वे एकजुट होकर इस फासीवादी कदम को चुनौती देने और हराने के लिए आगे आएं।

पी जे जेम्स
महासचिव 
सीपीआई (एमएल) रेड स्टार

नई दिल्ली
15.12.2024

31/12/2024

भारत में तालिबानी शासन की शुरुआत

दिसंबर 31, 2024 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज **हिंदूवादी संगठनों की शिकायत पर प्रभारी प्रधानाचार्य का निलंबन’* ।

 *तालिबानी शासन का आगाज...* 

हिंदू फासीवादियों द्वारा उत्तराखंड को हिंदुत्व की नई प्रयोगशाला बनाने के कुत्सित प्रयास लगातार जारी हैं। ताजा घटना नैनीताल जिले के रामनगर की है जहां एक राजकीय इंटर कालेज के प्रभारी प्रधानाचार्य तिलक जोशी को हिंदूवादी संगठनों के इस आरोप पर निलंबित कर दिया गया कि उन्होंने मुस्लिम छात्रों को जुमे की नमाज हेतु आधे दिन का अवकाश दिया था। जबकि प्रभारी प्रधानाचार्य एवं कालेज के अन्य शिक्षकों ने हिंदूवादी संगठनों के इस आरोप को सिरे से खारिज किया है, उलटे उन्होंने उप जिलाधिकारी को शिकायत देकर हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं पर कालेज में आकर उत्पात मचाने और शिक्षकों के साथ अभद्रता करने पर उनकी गिरफ्तारी की मांग की है।

रामनगर का पी एम श्री राजकीय इंटर कालेज मुस्लिम बहुल खताड़ी क्षेत्र में स्थित है और इसमें एक बड़ी संख्या मुस्लिम छात्रों की है। यहां कुछ मुस्लिम छात्र जुमे की नमाज के वक्त स्वतः ही अपनी कक्षा छोड़कर अथवा आधे दिन का अवकाश कर नमाज पढ़ने चले जाते हैं। बस, इसी बात को हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने मुद्दा बनाकर कालेज में उत्पात मचाया, शिक्षकों से अभद्रता की और प्रभारी प्रधानाचार्य पर यह झूठा आरोप मढ़ दिया कि उन्होंने 20 दिसम्बर को मुस्लिम छात्रों को जुमे की नमाज हेतु आधे दिन का अवकाश दिया था।

और हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं की शिकायत को अपने लिये आदेश मानते हुये उच्च अधिकारियों द्वारा प्रभारी प्रधानाचार्य को बिना किसी जांच पड़ताल के तुरंत निलंबित भी कर दिया गया। जबकि प्रभारी प्रधानाचार्य और अन्य शिक्षकों की शिकायत पर हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं पर अभी तक भी कोई कार्यवाही नहीं हुई है।

अधिकारियों का यह व्यवहार दिखा रहा है कि वे किसके निर्देश पर काम कर रहे हैं? एक समुदाय विशेष के विरुद्ध प्रशासनिक मशीनरी का यह इस्तेमाल पूरे देश की तरह उत्तराखंड में भी खुलकर हो रहा है। हिंदू फासीवादी ताकतें, जिनका असल में हिंदू धर्म से कोई सरोकार नहीं है, इस पहाड़ी राज्य की फिजाओं में जहर घोल रही हैं।

इस पूरे घटनाक्रम पर विभिन्न शिक्षक संगठनों ने तत्काल ही उप जिलाधिकारी कार्यालय पर जुलूस प्रदर्शन कर प्रभारी प्रधानाचार्य के निलंबन और हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं का प्रतिरोध कर जिस एकता का प्रदर्शन किया उसे अधिकाधिक व्यापक और मजबूत बनाकर ही हिंदू फासीवादी ताकतों के घृणित मंसूबों को धराशाई किया जा सकता है।