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27/12/2025

अरावली बचाओ! हिमालय बचाओ!

दिसंबर 27, 2025 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज                                                                        

अरावली बचाओ! हिमालय बचाओ! ग्रेट निकोबार बचाओ! हसदेव अरण्य बचाओ!

प्रकृति और हमारी जल-जंगल-ज़मीन को बचाने के लिए कोई प्लान-बी नहीं है. हमारे पास एक ही दुनियां है. दिल्ली की दमघोंटू हवा से लेकर छत्तीसगढ़ और ग्रेट निकोबार के उजड़ते जंगलों तक, और हिमालय में लगातार सामने आती आपदाओं तक— हम अपने भविष्य और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के खिलाफ़ मोदी सरकार की विनाशकारी नीतियों के गवाह हैं.

एक तरफ़ मोदी सरकार झूठ पर झूठ बोल रही है, और दूसरी तरफ़ उसके कारपोरेट मित्र —सरकार की तथाकथित ‘ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस’ नीति के पूरे संरक्षण में— हमारी साँसों की हवा, पीने का पानी, जंगल, पहाड़ और प्रकृति को बेरहमी से तबाह कर रहे हैं. जब पूरी दुनिया जलवायु संकट और उसके गरीब-कमज़ोर लोगों पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंतित है, तब यह सरकार बेशर्मी से पर्यावरण विनाश के रास्ते पर आगे बढ़ रही है.

अरावली

मोदी सरकार ने दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला, अरावली, की परिभाषा को मनमाने और छलपूर्ण तरीके से बदल दिया है ताकि इन्हें खनन के लिए खोल दिया जा सके. अब वे इस विनाश को ‘टिकाऊ खनन’ के नाम पर जनता को बेचने की कोशिश कर रहे हैं. इस नई परिभाषा के बाद अरावली का नब्बे फ़ीसदी से ज़्यादा हिस्सा खनन माफ़िया के ख़तरे में आ गया है.

24/12/2025

सकारात्मक और नकारात्मक सोच(Radhey shyam yadav)

दिसंबर 24, 2025 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज 
mr. radhey shyam yadav(bhagat singh vichar manch)
सकारात्मक और नकारात्मक सोच सही दिशा और विपरीत दिशा के तरफ हमें चलने के लिए प्रेरित करता है। अब हमारे विवेक के ऊपर निर्भर करता है कि हम किसे अपनाते हैं क्या सोचती हैं। देवी देवताओं के हाथ में हथियार को बुराइयों को नष्ट करने की दृष्टिकोण से भी देख सकते हैं। बुराइयों से सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी हम देख सकते हैं। इसे किस दृष्टिकोण से हम देखते हैं वह अपने नजरों एवं सोच के ऊपर निर्भर करता है। दूसरी बात, इतिहास बातें और विज्ञान हमारे विचार और एक खोज है कोई जरूरी नहीं कि वह हर समय में हर व्यक्ति के लिए उपयोगी ही साबित हो इसका विपरीत प्रभाव भी पड़ता है कारण की हमें अपनी क्षमता का सकारात्मक विस्तार देते हुए काल समय और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उसे पर अमल करना चाहिए कोई जरूरी नहीं उपरोक्त प्रयोग को हम अपने जीवन में पूरी तरह से उतार दें, क्योंकि वह उसे समय की बौद्धिक क्षमता वैज्ञानिक क्षमता के आधार पर काल, समय, परिस्थितियों के अनुरूप लिया गया निर्णय है तीसरी बात, हम किसी बौद्धिक क्षमता से ओत-प्रोत   व्यक्ति हो या राजनेता हो मानवीय मूल्यों के संरक्षण संविधान और कानून की उपयोगिता धर्म के प्रति आदर्श को लेकर बात करते हुए अपने विचार रखते हुए मैंने नहीं सुना ना तो समाज के अंदर सुनाई देता है जिसका दुष्परिणाम है कि हमारे देश की आबादी के लगभग  98% लोग अपनी नागरिकता के अधिकार और कर्तव्य से ही विमुख है। संविधान और कानून के विषय में अनभिज्ञ है। सामाजिक और राजनीतिक चिंतन की विषय में अनभिज्ञ है इसके लिए जिम्मेदार कहीं ना कहीं से हम आप हैं क्योंकि हम मात्रा चर्चा करते हैं  जाति और धर्म की क्षेत्रवाद, भाषा की अनियंत्रित महंगाई, भ्रष्टाचार, अन्याय अत्याचार, संविधान और कानून का दुरुपयोग अधिकारों का दुरुपयोग यह हमारा चर्चा का विषय नहीं होता आए हम इस विषय पर गंभीर चर्चा करें और राष्ट्रीय समाजवादी जन क्रांति पार्टी के प्रबल इस विचारधारा को आत्मसात करते हुए हम आगे बढ़ते हैं और एक मजबूत नागरिक के रूप में अपने को स्थापित करते हुए व्यक्ति समाज और देश का नव निर्माण करते हैं। हम हैं समता मूलक समाज के सजग प्रहरी गलत को गलत और सही को सही आधार पर मानवीय मूल्यों का संरक्षण करना हमारा नैतिक कर्तव्य है।

15/12/2025

प्रोफेसर हृषिकेश भट्टाचार्य द्वारा रचित 'नित्य निठुर द्वन्द्व

दिसंबर 15, 2025 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज         
प्रोफेसर हृषिकेश भट्टाचार्य 

                                                              प्रोफेसर हृषिकेश भट्टाचार्य द्वारा रचित 'नित्य निठुर द्वन्द्व' (भाग-1)'युगसंचार' के पृष्ठ- 66 से यहां उद्धृत —

परन्तु क्या आपके पुत्रों में से कोई सहमत होगा?'

'क्यों नहीं मानेंगे गुरुदेव? कोई पुत्र अपने पिता के प्राण बचाने के लिए आगे क्यों नहीं आएगा?' ययाति यह जानकर प्रसन्न हुए कि बचने का उपाय है।

'परन्तु याद रखना ययाति,' शुक्राचार्य ने कहा, 'जो रक्तदान करता है, वह धीरे-धीरे दुर्बल होता जाएगा। यदि वह रक्तदान करना बंद भी कर दे, तो भी उसे स्वस्थ होने में कम से कम छह महीने लगेंगे। यह जानकर, यदि आपका कोई पुत्र आपको अपनी युवावस्था देना चाहे, तो वह सर्वत्र महान माना जाएगा। मेरे आशीर्वाद से वह राजा और महाराणा बनेगा।'
ययाति का हृदय हर्ष और कृतज्ञता से भर गया। शाप के बदले उसे वरदान मिला। शुक्राचार्य ने उसे अवश्य क्षमा कर दिया होगा। शुक्राचार्य ने खड़े होकर उसे आशीर्वाद देते हुए कहा, 'यदि तुम्हारा कोई पुत्र सहमत हो, तो राजवैद्य को मेरे पास भेजो। मैं उसे रक्त-त्याग और आधान की विधि सिखा दूँगा। फिर भी, तुम्हें बहुत सावधान रहना होगा, यदि किसी पुत्र का रक्त लेते समय तुम्हें कोई शारीरिक कष्ट हो, तो उसे तुरंत बंद कर देना। तुम्हें यह समझ लेना चाहिए कि तुम्हारे रक्त का उस पुत्र के रक्त से कोई संबंध नहीं है।'
ययाति शुक्र की प्रत्येक बात को ध्यान से समझते हुए वहाँ से चले गए। वह देवयानी को अपने साथ ले जाना चाहते थे। परन्तु वह उन्हें कहीं नहीं मिली। जब वे आश्रम के बाहर आए, तो उन्हें देवयानी का रथ भी दिखाई नहीं दिया। उन्होंने समझ लिया कि देवयानी पहले ही जा चुकी है। ययाति का मन अब लगभग मृत्यु के द्वार से लौटकर काफी प्रसन्न था। वह पुरानी बातें भूलकर देवयानी को क्षमा कर देना चाहते थे, परन्तु ऐसा नहीं हुआ। थोड़े आहत मन से ययाति रथ पर सवार हो गए। उन्होंने समझ लिया कि देवयानी को पुराने घावों को भरने में कोई रुचि नहीं है।
महल पहुँचकर ययाति ने यदु और तुर्वसु को अपने महल में बुलाया। थोड़ी देर बाद वे दोनों ययाति के कक्ष में आए, उनके पीछे देवयानी भी आई। देवयानी को देखकर ययाति को आश्चर्य हुआ। देवयानी यहाँ कभी नहीं आती, और उन्होंने उसे पुकारा भी नहीं। पुत्रों ने प्रणाम किया और खड़े हो गए। देवयानी आगे नहीं आई, बल्कि दूर खड़ी रही। ययाति ने उसकी ओर देखा। देवयानी के चेहरे, आँखों और मुद्रा में कैसी कठोरता प्रकट हो रही थी। ऐसा लग रहा था कि युद्ध अवश्यंभावी है। देवयानी ने अपने पुत्रों को सब कुछ बता दिया होगा। क्या शुक्राचार्य की आशंकाएँ सत्य होंगी? उनका मन दुःख से भर गया और फिर आशा से वे पुनः डगमगा उठे। नहीं, ऐसा नहीं हो सकता। यदु और तुर्वसु उनकी अपनी आत्माएँ हैं, वे अपने मरते हुए पिता के अनुरोध को अवश्य ही टाल नहीं सकेंगे। आशा और भय के बीच खड़े होकर उन्होंने दोनों पुत्रों को पास बुलाया।

'मुझे लगता है कि तुमने अपनी माँ से सब कुछ सुन लिया है। मृत्यु मेरे सिर पर आ खड़ी हुई है। अब तुम ही हो जो इसे रोक सकते हो। मैं तुमसे कुछ समय की भीख माँग रहा हूँ। प्रकृति के स्वाभाविक क्रम में एक दिन मेरी मृत्यु अवश्य होगी।' लेकिन मैं अकाल मृत्यु नहीं चाहता, मुझे अभी बहुत काम करना है। अगर मैं अपनी पूजा-अर्चना नहीं कर पाया, तो मृत्यु के बाद भी मुझे शांति नहीं मिलेगी।
(नियमित रूप से पढ़ते रहें)

03/08/2025

अगस्त 03, 2025 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यू**

ब्रह्मण व ब्रह्मणबाद के पांच खुंटे पुरखो ने तो हिला दिया है और बहुजन उखाड़ने में लगे हैं*
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आप लोग भी पढ़िए क्या हैं हिंदू धर्म के 5 खूंटे जिनसे ब्राह्मणों ने सभी sc, st & obc को बांध रखा है

*(1) पहला खूॅटा:- ब्राह्मण:-*
हिन्दू धर्म में ब्राह्मण जन्मजात श्रेष्ठ है चाहे चरित्र से वह कितना भी खराब क्यों न हो, हिन्दू धर्म में उसके बिना कोई भी मांगलिक कार्य हो ही नहीं सकता। किसी का विवाह करना हो तो दिन या तारीख बताएगा ब्राह्मण, किसी को नया घर बनाना हो तो भूमिपूजन करायेगा ब्राह्मण, किसी के घर बच्चा पैदा हो तो नाम- राशि बतायेगा ब्राह्मण, किसी की मृत्यु हो जाय तो क्रियाकर्म करायेगा ब्राह्मण, भोज खायेगा ब्राह्मण, बिना ब्राह्मण से पूछे हिन्दू हिलने की स्थिति में नहीं है। इतनी कड़ी मानसिक गुलामी में जी रहे हिन्दू से विवेक की कोई बात करने पर वह सुनने को भी तैयार नहीं होता।
OBC/SC/ST के आरक्षण का विरोध करता है ब्राह्मण, OBC/SC/ST की शिक्षा, रोजगार, सम्मान का विरोध करता है ब्राह्मण!! इतना होने के बावजूद भी वह OBC/SC/ST का प्रिय और अनिवार्य बना हुआ है। क्यों? घोर आश्चर्य!! या ये कहें कि दुनिया का आठवां अजूबा!! जो हिन्दू ब्राह्मण रूपी खूॅटा से बॅधा हुआ है।

*(2) दूसरा खूॅटा: ब्राह्मण शास्त्र:-*
यह जहरीले साॅप की तरह हिन्दू समाज के लिए जानलेवा है। मनुस्मृति जहरीली पुस्तक है। वेद, पुराण, रामायण आदि में भेद-भाव, ऊॅच-नीच, छूत-अछूत का वर्णन किया गया है। मनुष्य का जन्म:-
ब्रह्मा के मुख से ब्राह्मण, भुजा से क्षत्रिय, जंघा से वैश्य, पैर से शूद्र की उत्पत्ति बताकर शोषण-दमन की व्यवस्था शास्त्रों में की गयी है, हिन्दू-शास्त्रों मे स्त्री को गिरवी रखा जा सकता है, बेचा जा सकता है, उधार भी दिया जा सकता है। हिन्दू समाज इन शास्त्रों से संचालित होता रहा है।

*(3) तीसरा खूॅटा: हिन्दू धर्म के पर्व/त्योहार:-*
हिन्दू धर्म के पर्व/त्योंहार आर्यों द्वारा इस देश के SC/ST/OBC (मूलनिवासियों) की गयी निर्मम हत्या पर मनाया गया जश्न है। आर्यों ने जब भी और जहाॅ भी मूलनिवासियों पर विजय हासिल की, विजय की खुशी में यज्ञ किया, यही पर्व कहा गया, पर्व ब्राह्मणों की विजय और त्योहार मूलनिवासियों के हार की पहचान है। त्योहार का मतलब होता है, तुम्हारी हार यानी मूलनिवासियों की हार।
इस देश के मूलवासी अनभिज्ञता की वजह से पर्व-त्योहार मनाते हैं। न तो किसी को अपने इतिहास का ज्ञान है और न ही अपमान का बोध। सबके सब ब्राह्मणवाद के खूॅटे से बॅधे हैं। अपना मान-सम्मान और इतिहास सब कुछ खो दिया है। अपने ही अपमान और विनाश का उत्सव मनाते हैं और शत्रुओं को सम्मान और धन देते हैं। यह चिन्तन का विषय है।
होली- होलिका की हत्या और बलात्कार का त्योहार दशहरा- दीपावली- रावण वध का त्योहार।
नवरात्र- महिषासुर वध का त्योहार।
किसी धर्म में त्योहार पर शराब पीना और जुआ खेलना वर्जित है। पर हिन्दू धर्म में होली में शराब और दीपावली पर जुआ खेलना धर्म है। हिन्दू समाज इस खूॅटे से पुरी तरह बॅधा हुआ है।

*(4) चौथा खूॅटा- देवी देवता:-*
हिन्दू धर्म में तैंतीस करोड़ देवी-देवता बताये गये हैं। पाप-पुण्य, जन्म-मरण, स्वर्ग-नरक, पुनर्जन्म, अगले जन्म का भय बताकर काल्पनिक देवी-देवताओं की पूजा-आराधना का विधान किया गया है। मन्दिर-मूर्ति, पूजा, दान-दक्षिणा देना अनिवार्य बताया गया है। हिन्दू समाज इस खूॅटे से बॅधा हुआ है और चमत्कार, पाखण्ड, अंधविश्वास, अंधश्रद्धा से जकड़ा हुआ है।

*(5) पाॅचवां खूॅटा : तीर्थस्थान:-*

ब्राह्मणों ने देश के चारों ओर तीर्थस्थान के हजारों खूॅटे गाड़ रखे हैं। इन तीर्थस्थानों के खूॅटे से टकराकर मरना पुण्य और स्वर्ग प्राप्ति का सोपान बताया गया है। इस धारणा पर भरोसा कर सभी ब्राह्मणों के मानसिक गुलाम OBC/SC/ST के लोग बिना बुलाये तीर्थस्थानों पर पहुँच जाते है जहाँ इनका तीर्थ स्थलों के मालिक (ब्राह्मण) आस्था की आड़ में हर प्रकार का शोषण करते हैं।

    *समाधान*:- ब्राह्मणवाद के इन खूॅटो को उखाड़ने के लिए समस्त शूद्र(OBC/SC/ST) की जातियों को एकजुट होकर चिन्तन-मनन और विचार-विमर्श करना होगा। किसी भी मांगलिक कार्य में ब्राह्मण को न बुलाने से, ब्राह्मण शास्त्रों को न पढ़ने से, न मानने से, हिन्दू (ब्राह्मण) त्योहारों को न मनाने से, काल्पनिक हिन्दू देवी-देवताओं को न मानने, न पूजने से, तीर्थस्थानों में न जाने, दान-दक्षिणा न देने से ब्राह्मणवाद के सभी खूॅटे उखड़ सकते हैं।

ब्राह्मणवाद से समाज मुक्त हो सकता है और मानववाद विकसित हो सकता है। इस पर OBC/SC/ST समाज की सभी जातियों को चिन्तन-मनन करने की आवश्यकता है। तो आइए विदेशी आर्य ब्राह्मणों को दान, मान और मतदान न देकर ब्राह्मणवाद से मुक्ति और मानववाद को विकसित करने का सकल्प लें।

*एक बार अपने दिमाग से, शांत बैठकर जरूर सोचें। पोस्ट पसंद आये तो ज्यादा से ज्यादा शेयर जरूर करें।* 

*मानववादी साहित्य एवं सत्यम पुस्तक केन्द्र के विक्रेता स्वर्गीय नारदमुनि लोहार जी गया बिहार आप सभी को*. Radheyshyam azad from varanasi 

 

13/12/2024

दिसंबर 13, 2024 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज.   नेपाल की क्रांतिकारी कम्युनिस्ट पार्टी की राष्ट्रीय एकता महाधिवेशन को सीपीआई (एमएल) रेड स्टार की ओर से शुभकामनाएं
सीपीआई एमएल लाल सितारा 



साथियों,

कॉमरेड तुहिन और मेरी ओर से व्यक्तिगत रूप से, और हमारी पार्टी सीपीआई (एम-एल) रेड स्टार की ओर से, हम रिवोल्यूशनरी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (आरसीपीएन) की यूनिटी कांग्रेस की सफलता की कामना करते हैं। इस ऐतिहासिक कांग्रेस में हमें आमंत्रित करने के लिए हम आपके आभारी हैं।

कॉमरेड, आज आपका महाधिवेशन( कांग्रेस) ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया पर फासीवाद और युद्ध का खतरा मंडरा रहा है। अमेरिकी राजनीति का फासीवादी चेहरा डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी खोई ताकत हासिल कर ली है और दूसरी बार सत्ता में वापसी की है. यह घटना साबित करती है कि पूरी दुनिया में फासीवाद के लिए उपजाऊ जमीन है। जब तक साम्राज्यवादी और पूंजीवादी अर्थव्यवस्था का भीषण संकट बना रहेगा और इसका समाधान नहीं ढूंढा जायेगा, तब तक फासीवाद का ख़तरा बना रहेगा। डोनाल्ड ट्रंप की जीत ने दिखा दिया है कि फासीवाद को सिर्फ सत्ता से हटाकर नहीं रोका जा सकता. यदि फासीवादी राजनीति, अर्थशास्त्र, सामाजिक नीति और दर्शन का कोई वैकल्पिक आख्यान नहीं बनाया जा सकता, यदि फासीवाद की जन्मस्थली पूंजीवाद के संकट का वास्तविक समाधान प्रस्तुत नहीं किया जा सकता, तो फासीवादी ताकत को सिर्फ चुनाव में हराकर फासीवाद-विरोधी जीत हासिल नहीं की जा सकती। पराजित फासीवाद बिना किसी वैकल्पिक सामाजिक-आर्थिक मार्ग और वैकल्पिक राजनीतिक कार्यक्रम के, उदारवादियों से खोई हुई शक्ति को दोगुनी ताकत और जोश के साथ वापस पाने में सक्षम है। आप देखेंगे कि पिछली शताब्दी के चालीसवें दशक में, एक ओर, उदार पूंजीपति वर्ग फासीवाद के विरुद्ध कींसवादी विकल्प प्रस्तुत करने में सक्षम था, जिसके बल पर वह अगले तीन दशक तक "पूंजीवाद के स्वर्ण युग" का निर्माण करने में सक्षम था। दूसरी ओर, कम्युनिस्टों के पास सोवियत विकल्प था। ऐसा विकल्प कि तीस के दशक की महामंदी में विश्व पूंजीवाद को नष्ट करने वाला संकट भी उसे खरोंच नहीं सका। आज पूंजीपति वर्ग के पास कोई विकल्प नहीं है। कम्युनिस्टों के पास एक भी नहीं है. हालाँकि समाजवाद के प्रथम विश्व अभियान को प्रारंभिक सफलता तो मिली, लेकिन वर्तमान में यह पूरे विश्व में संकट का सामना कर रहा है। विकल्पों की यह कमी ही फासीवाद को जीवित रहने और बढ़ने में मदद कर रही है। हमें इस पर ध्यान देना चाहिए.

साथियों, भारत में भी फासीवादी RSS/भाजपा की शक्ति का स्रोत इन विकल्पों का अभाव ही है। मोदी सरकार तीसरी बार सत्ता में लौट आई है. बावजूद इसके कि यह सरकार भारत के मजदूरों, किसानों, गरीबों और मेहनतकशों का लगातार शोषण और उत्पीड़न कर रही है, लोगों को धर्म के आधार पर बांट रही है, दलितों, आदिवासियों, धार्मिक अल्पसंख्यकों और महिलाओं पर दोयम दर्जे का नागरिक जीवन थोप रही है। फासिस्ट मोदी सरकार,अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में भी नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश समेत अपने पड़ोसियों पर आक्रामक विस्तारवादी आधिपत्य जमा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कॉरपोरेट उद्योगपति अडानी के बीच सांठगांठ इस हद तक पहुंच गई है कि इन दिनों इसे 'मोदानी' कहा जा रहा है. यह मोदानी न केवल भारत में हर जगह नदियों, जंगलों और जमीनों पर कब्जा कर रहा है, बल्कि दक्षिण एशिया के सभी देशों की सरकारों को अपने पाले में लाकर वहां के बंदरगाहों, हवाई अड्डों और जमीनों/ प्राकृतिक संसाधनों पर भी कब्जा कर रहा है। यह सार्वजनिक जीवन को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है। इसके खिलाफ साम्यवादी ताकतों, जनवादी ताकतों और दक्षिण एशिया के सभी देशों की जनता को एकजुट होकर प्रतिरोध करने की जरूरत है। साथियों, चूंकि भारत का शासक वर्ग साम्राज्यवादी पूंजी का जागीरदार और जागरूक भागीदार है, चीन के खिलाफ संघर्ष में अमेरिकी साम्राज्यवाद का रणनीतिक कनिष्ठ भागीदार है, इसलिए दक्षिण एशिया की जनता और अंतरराष्ट्रीय साम्राज्यवादी शक्तियों के बीच संघर्ष का यह एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसीलिए भारतीय विस्तारवाद के विरुद्ध एकजुट संघर्ष समय की पुकार है।। इसके अलावा, इस क्षेत्र में अमेरिका के नेतृत्व वाले गुट और चीन और रूस सहित सभी साम्राज्यवादी शक्तियों के खिलाफ हमें संघर्ष जारी रखना है। इस परिप्रेक्ष्य में, अंतर्राष्ट्रीय वामपंथियों की विफलता की पृष्ठभूमि में, फिलिस्तीन में मार्क्सवादी-लेनिनवादी ताकतों द्वारा ज़ायोनी आतंकी इज़राइल के खिलाफ हमास सहित अन्य सभी प्रतिरोध ताकतों के साथ शुरू किया गया एकजुट प्रतिरोध संघर्ष हमारे सामने एक उल्लेखनीय मॉडल है। 

साथियों, आप एक नया नेपाल, एक स्वतंत्र, संप्रभु, लोकतांत्रिक और समृद्ध नेपाल बनाने के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। हम, भारत के क्रांतिकारी कम्युनिस्ट और भारत के लोकतांत्रिक लोग, आपके पक्ष में हैं। इस संघर्ष में आपकी जीत निश्चित है.

साथियों, नेपाल एक महान देश है। यह देश महान गौतम बुद्ध का जन्मस्थान है। आज, ब्राह्मणवादियों ने गौतम बुद्ध को विकृत कर दिया है और बुद्ध द्वारा शुरू किए गए सामाजिक-राजनीतिक आंदोलन को एक धार्मिक आंदोलन में बदल दिया है, जिससे बुद्ध की क्रांतिकारी भावना खत्म हो गई है। लेकिन गौतम बुद्ध केवल शांति, करुणा और मैत्री के ही दूत नहीं थे, वे हर दृष्टि से क्रांति के दूत थे। उन्होंने सबसे पहले जाति व्यवस्था का विरोध कर समानता का उपदेश देकर समतामूलक समाज बनाने का संदेश दिया। हमारा दृढ़ विश्वास है कि नेपाल की जनता महान है और नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी सफल होगी।

हम आपकी एकता महाधिवेशन की सफलता की तहेदिल से कामना करते हैं।

साम्राज्यवाद, जियोनवाद(यहूदीवाद), फासीवाद, हिंदुत्व फासीवाद को उखाड़ फेंके ।

दुनिया के सर्वहारा और उत्पीड़ित जनता एक हो जाओ!

क्रांतिकारी अभिवादन के साथ,

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) रेड स्टार

केंद्रीय समिति

25/11/2024

राम अवध विवाह के बारे में सोच रहे हैं

नवंबर 25, 2024 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज.         मैरिज लॉन में बिबाह 
राम अवध किसान नेता


ब्याह शादी में बहुत बड़ा चेंज हुआ है। नई नई रस्में बढ़ती जा रहे हैं। 
एक नया फैशन चल पड़ा है जड़ों के दिनों में शादियों का किसी शहर या बाजार में मैरिज लॉन में विवाह करने का। 
कृषि प्रधान गांव रहे हैं। जाड़े के दिनों में खेती-बाड़ी के काम घनी भूत हुआ करते हैं। खेती से ही जीविका है आमदनी है लोगों की। 
इसलिए गांव के लोग गर्मियों के दिन में विवाह करते थे। 
जाड़े के दिन में नहीं करते थे। 
शहर बाजार के व्यापारी सर्दियों के मौसम में विवाह करते थे इसलिए कि उनका धंधा पानी मंदा चलता था खाली रहते थे तो सोचते थे कि शादी वाला काम निपटाने का फुर्सत का वक्त है। वह लोग सही सोच रहे थे। 
अब उनकी नकल बिना अकल का प्रयोग किये गांव के लोग कर रहे हैं। 
कोई तर्क देता है की राम जी का विवाह अगहन में हुआ था। इस पर विचार करना चाहिए कि वह कौन सा जमाना था। क्या राम की खेती बाड़ी करते थे किसान थे। वह तो राजकुमार थे किस नहीं थे। उनकी नकल करना इस विषय पर बेवकूफी के सिवा कुछ भी नहीं है। 
एक पाश्चात्य विचारधारा भी देश के अंदर गहरी पैठ बना चुकी है। शोर शराबा डीजे अश्लील गीत नग्न देह प्रदर्शन। औरतों को तो लगता है कि कपड़ों की महंगाई ने ही नंगा किया है सर्दी की परवाह नहीं है लेकिन पोशाक शरीर को ढकने वाली नहीं है अगर शरीर ढक लिया तो पिछड़ी औरत दिखेगी इसलिए नंगा होना जरूरी है। सर्दी से मर जाना कबूल है लेकिन कपड़ा वह नहीं चाहिए जो शरीर को ढक ले। 
व्यापारियों की नकल में कुछ नौकरी पैसा वाले लोग मैरिज लान में शादी करना शुरू किये। फिर देखा देखी खेती करने वाले लोग भी जाड़े के दिनों में विवाह करना शुरू किये। फिर देखा देखी बढ़ने लगी। 
अभी भी देखने में ऐसा आया है की खास तौर से कायस्थ भूमिहार और क्षत्रिय ब्राह्मण की शादियां मैरिज लान में अधिकतर हो रही है। इनके अलावा दूसरे लोग भी लान में जा रहे हैं लेकिन कमतर।
जाड़े की रात में मोटरसाइकिल से निमंत्रण पर शहर जाना कितना कष्टकारी है कितना खर्चीला है इस पर विचार अवश्य करना चाहिए या फिर जिन्हें लान में करना है उन्हें यह करना चाहिए कि गांव के लोगों को निमंत्रण ही ना दें। 
दिन भर आदमी खेत खलिहान और सिवान में दौड़ा फिर रात में मोटरसाइकिल से ठिठुरते हुए निमंत्रण पर जाये कितना उल्टा लगता है। 
आज भी आप देखिए तो गांव का मजदूर वर्ग या गरीब किसान वर्ग इस तरह का उत्पात वाला काम नहीं करता चाहे ज्यादा में चाहे थोड़ा में ही वह अपने गांव में विवाह करता है। 
यही असली भारत है। यही असली किसान है। जो शहर में जा रहा है वह किसान हो सकता है लेकिन दिमाग से शहरी या व्यापारी या विदेशी सभ्यता को गले लग रहा होता है। 

गांव में शादी नहीं करने के पीछे भी लोग बहुत तर्क देते हैं लेकिन उनके सभी तर्क निराधार होते हैं। 
क्षेत्र और जवार के लोग आपको आपके गांव से आपके परिवार से आपके समाज से जुड़े हुए हैं कई पीढियां से जुड़े हुए हैं किसी मैरिज लान से नहीं जुड़े हैं किसी शहर से नहीं जुड़े हैं किसी बड़े के चमकदार लकदक डेकोरेशन से शहर से नहीं जुड़े हैं। आपकी मिट्टी से आपके घर से आपके बाप दादे से लोग जुड़े हैं किसी शहर से किसी लान से नहीं। 
बंद कीजिए ऐसा उत्पात 
व्यापारियों की नकल में अपने मूल से मत कटिये।
यह विचार गांव को खेती को जवार के परस्पर को संबंध को मिटाने वाला है आत्मघाती है। 
किसी को बुरा लगे तो मैं क्षमा चाहता हूं यह मेरा विचार है आपके विचार भिन्न हो सकते हैं इस पर मुझे कोई शिकवा शिकायत नहीं है। लेकिन मेरे मन में जो खौल रहा था सोचा कि आपसे शेयर करुं।
राम अवध सिंह 
63 065 48 397 
गांव खिलची शहाबगंज चंदौली 
🙏🙏

15/11/2024

कामरेड लाभ सिंह पंजाब कॉमेटी (सीपीआई) एमएल

नवंबर 15, 2024 0
सड़क समाचार: वाराणसी,आपका स्वागत है. ब्रेकिंग न्यूज           प्रेस वक्तव्य 

*22* - *24* *नवंबर* *को* *बरनाला* *पंजाब* *में* *आयोजित* *भाकपा* ( *माले* ) *रेड* *स्टार* *के* *अखिल* *भारतीय* *प्लेनम* *को तहेदिल से* *सफल बनाएं * ** 

 *साम्राज्यवाद* , *संघी* *मनुवादी* *फासीवादी* *कॉरपोरेट* *राज* *के* *खिलाफ* *संघर्ष* *को* *तेज* *करें* !

बरनाला पंजाब, 14 नवंबर 2024 । भाकपा (माले) रेड स्टार का अखिल भारतीय प्लेनम ( विशेष सम्मेलन) आगामी 22 से 24 नवंबर को तर्कशील भवन( अमर शहीद बेअंत सिंह मुम हॉल), तर्कशील चौक( इंकलाबी जन गायक संत राम उदासी नगर) बरनाला में आयोजित हो रही है ।
इस अखिल भारतीय प्लेनम में भारत के 15 राज्यों से चुनिंदा 120 कम्युनिस्ट क्रांतिकारी शिरकत करेंगे।22 नवंबर को अखिल भारतीय विशेष सम्मेलन की शुरुआत दिन के 11 बजे रैली और आमसभा से होगी। अखिल भारतीय प्लेनम के एक दिन पहले 21 नवंबर को दिन के 1 बजे " जाति उन्मूलन आंदोलन और डॉक्टर अम्बेडकर के प्रति कम्युनिस्ट नजरिया" विषय पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया है।


उपरोक्त जानकारी देते हुए पार्टी के राज्य सचिव कॉमरेड लाभ सिंह ने कहा कि भाकपा (माले ) रेड स्टार का शिद्दत से मानना है कि मौजूदा हालात में भारत में अमीरी और गरीबी के बीच असमानता और भी गहरा गई है। क्योंकि अति-अमीर धन कुबेर अरबपतियों की संख्या और उनके पास मौजूद राष्ट्रीय संपत्ति का हिस्सा 1947 की तुलना में भयावह अनुपात तक पहुंच गया है। आज भारत 'वैश्विक गरीबी का गढ़' बन चुका है।भारत, बेरोजगारी की बंजर भूमि और दुनिया के सबसे भ्रष्ट देशों में से एक बन गया है। इस देश में मेहनतकश और गरीब आम जनता का अतिशोषण और प्रकृति की अबाधित कॉर्पोरेट लूट की कोई सीमा नहीं है। भारत के श्रम कानून, कराधान, औद्योगिक और कृषि नीतियों और पर्यावरण नियमों को इस तरह से तैयार किया गया है ताकि साम्राज्यवादी और भारतीय प्रतिक्रियावादी कॉर्पोरेट पूंजी, दोनों को बेशुमार सुविधा मिल सके।भारत का कॉरपोरेट भगवा मनुवादी/ ब्राम्हणवादी फासीवादी राज तो साम्राज्यवाद का कनिष्ठ भागीदार( जूनियर पार्टनर) है।आज की तारीख में दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे पुराने फासिस्ट संगठन आरएसएस जिसका राजनैतिक उपकरण भाजपा है,की बुलडोजर नीतियों के तले 80 फीसदी आम जनता जिनमें गरीब मेहनतकश जिनमें अधिकांश असंगठित मजदूर हैं,,किसान वर्ग,दलित/ उत्पीड़ित,आदिवासी , महिला,युवा एवम विद्यार्थी समुदाय और अल्पसंख्यक विशेषकर मुसलमान कराह रहे हैं,बर्बाद हो चुके हैं।मोदी सरकार की विनाशकारी आर्थिक नीतियों से तबाह होने वाली आम जनता का ध्यान उनके जवलंत मुद्दों से हटाने के लिए फासिस्ट संघ परिवार पूरे देश में दलितों, पिछड़ों,आदिवासियों,महिलाओं और अल्पसंख्यक विशेषकर मुसलमान जनता के खिलाफ नफ़रत और विभाजन का जहर फैला रही है ।
रेड स्टार सीपीआई एमएल पंजाब 


इस ठोस वास्तविकता को उचित परिप्रेक्ष्य में ध्यान में रखते हुए, सीपीआई (एमएल) रेड स्टार की केंद्रीय समिति ने 22 से 24 नवंबर 2024 तक पंजाब के बरनाला में पार्टी के अखिल भारतीय प्लेनम को आयोजित करने का निर्णय किया है।पार्टी ,इस प्लेनम के जरिए साम्राज्यवाद विरोधी लड़ाई को आगे बढ़ाने, संघी मनुवादी कॉरपोरेट फासीवाद को उखाड़ फेंकने और देश की सच्ची आजादी की लड़ाई को तेज करने के लिए फैसले लेगी। बरनाला के अखिल भारतीय प्लेनम में पारित नीतियों की रोशनी में पार्टी, मेहनतकश वर्ग और सभी उत्पीड़ितों( दलितों, पिछड़ों ,आदिवासियों,महिलाओं समेत अल्पसंख्यकों ) के हितों को सबसे आगे रखते हुए समान विचारधारा वाले इंकलाबी संगठनों के साथ कंधे से कन्धा मिलाकर जनता की जनवादी क्रांति को सफल बनाने का प्रयास करेगी और आगे समाजवाद की स्थापना की लड़ाई को तेज करेगी। पार्टी इस संबंध में पंजाब के महान क्रांतिकारी विरासत को ध्यान में रखते हुए राज्य के तमाम प्रगतिशील-जनवादी ताकतों और नेक इरादे वाले लोगों से भाकपा (माले) रेड स्टार के अखिल भारतीय प्लेनम को सफल बनाने के लिए तहेदिल से सहयोग करने और एकजुटता की अपील करती है।
कार्यक्रम- भाकपा (माले) रेड स्टार का अखिल भारतीय प्लेनम 
दिनांक- 22-24 नवंबर 2024
स्थान- तर्कशील भवन,तर्कशील चौक,बरनाला, पंजाब 

"आरएसएस मनुवादी कॉरपोरेट फासीवाद को उखाड़ फेंके"
" भगवा संघ परिवार, जिओनवादी आतंकवादी इजरायल और साम्राज्यवादी गठबंधन मुर्दाबाद"
"जाति उन्मूलन आंदोलन और लैंगिक समानता का आंदोलन,वर्ग संघर्ष का अटूट हिस्सा है" 
"सही क्रांतिकारी जन दिशा के आधार पर जनता के जनवाद और समाजवाद की ओर कूच करो" इस बारे में अधिक जानकारी के लिए यहां जाएं

कॉमरेड लाभ सिंह
पंजाब राज्य कमिटी सचिव 
एवम
प्लेनम स्वागत समिति संयोजक
सीपीआई (एमएल) रेड स्टार